शिवपुरी। विलोकलाँ फोरलाईन हनुमान जी के मंदिर पर चल रही नौ दिवसीय कथा के छठवें दिन श्री राम वनवास के बाद चित्रकूट पर पहुंचे। कथा व्यास वालयोगी वासुदेव नंदिनी भार्गव ने कहा कि श्री राघवजी चित्रकूट पर विराजमान हैं अब मार्मिकता इस वात में है कि चित्रकूट क्या है ? चित्र ,का अर्थ है चित्त (मन )और कूट का अर्थ है स्थित पर्वत अर्थात जब तक जीव पर्वत की तरह स्थिर नहीं हो जाता तब तक वहां राम रूपी ज्ञान, जानकी रूपी भक्ति व लछमन रुपी वैराग्य का आगमन नहीं हो सकता राम भरत की भैट भी चित्रकूट पर ही हुई क्योंकि जीव और ब्रह्म का मिलन स्थिर चित्त की पृष्ठभूमि पर ही संभव है आज कथा में सैकड़ों श्रोताओं ने भरत मिलाप के दौरान अपनी अश्रुपूरित आंखों से कथा का रसपान किया और कुछ समय के लिये श्रोताओं को ऐसी अनुभूति हुई कि मानो सव श्रोता चित्रकूट पर ही वैठकर कथा सुन रहे हौं ।राम कथा मै प्रतिदिन भक्तों की भीड़ वढती जा रही है ।
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