भोपाल/शिवपुरी। मध्य प्रदेश सरकार उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारी में तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी के चलते मध्य प्रदेश सरकार ने शनिवार को राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए जनता से सुझाव मांगने के लिए आधिकारिक पोर्टल ucc.mp.gov.in लॉन्च कर दिया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर इस पोर्टल के जरिए अब आम नागरिक, सामाजिक संगठन, और प्रतिनिधि 22 जून 2026 तक अपने ऑनलाइन सुझाव और विचार दर्ज करा सकते हैं। सरकार का उद्देश्य इस कानून को सर्वसमावेशी और जन-उन्मुखी बनाना है।
पोर्टल पर सुझाव की प्रक्रिया:
कोई भी नागरिक UCC मध्य प्रदेश पोर्टल पर जाकर अपना नाम, धर्म, जिला और मोबाइल नंबर दर्ज कर ऑनलाइन फॉर्म भर सकता है। पोर्टल पर दिए गए 12 प्रमुख प्रश्नों के उत्तर 'हाँ' या 'ना' में देने होते हैं, जिसके बाद OTP सत्यापन से सुझाव दर्ज हो जाता है।
हाई-लेवल कमेटी का गठन:
सरकार ने अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में 6 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर सभी धर्मों के लोगों से राय ले रही है।
ग्रामीण स्तर पर जागरूकता:
सीएम डॉ. मोहन यादव ने सभी जिला कलेक्टर्स को विशेष ग्राम सभाएं आयोजित करने और पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं ताकि समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
आखिर क्या है समान नागरिक संहिता (UCC)? जान lijiye
समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) का अर्थ है भारत (या राज्य) में रहने वाले प्रत्येक नागरिक के लिए एक समान कानून होना, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या समुदाय से संबंध रखता हो।
*वर्तमान में, भारत के अलग-अलग धर्मों के लोग शादी, तलाक, संपत्ति, और गोद लेने जैसे मामलों के लिए अपने-अपने पर्सनल लॉ (जैसे- हिंदू पर्सनल लॉ, मुस्लिम पर्सनल लॉ) का पालन करते हैं। UCC लागू होने से सभी धार्मिक पर्सनल लॉ समाप्त हो जाएंगे और सभी नागरिकों पर एक ही सिविल कानून लागू होगा।
*भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 (राज्य के नीति निर्देशक तत्व) में देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कही गई है।
UCC लागू होने से क्या बदल जाएगा?यदि मध्य प्रदेश में यूसीसी लागू होता है, तो मुख्य रूप से निम्नलिखित नागरिक मामलों में बड़े बदलाव आएंगे:
* शादी और तलाक का एक नियम:
सभी धर्मों में विवाह और तलाक (विवाह विच्छेद) की प्रक्रिया समान हो जाएगी।
* शादी का अनिवार्य पंजीकरण:
हर विवाह का कानूनी तौर पर रजिस्ट्रेशन कराना आवश्यक होगा।
* बहुविवाह पर रोक:
किसी भी धर्म के नागरिक को एक से अधिक जीवनसाथी रखने की अनुमति नहीं होगी।
* संपत्ति में समान अधिकार:
पिता की संपत्ति और विरासत पर बेटे और बेटी दोनों का समान अधिकार होगा।
* बच्चा गोद लेने (दत्तक ग्रहण) के नियम: सभी नागरिकों के लिए बच्चा गोद लेने और भरण-पोषण से जुड़े कानून एक समान होंगे।
* लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण: उत्तराखंड मॉडल की तरह, लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के लिए भी रजिस्ट्रेशन और नियमों का प्रावधान किया जा सकता है।
अब जानिए इसके समर्थन और विरोध में क्या तर्क हैं?
पक्ष (समर्थक)
लैंगिक समानता: महिलाओं और बेटियों को पैतृक संपत्ति व तलाक में बराबर के अधिकार मिलेंगे।
विपक्ष (विरोधी)
धार्मिक स्वतंत्रता: आलोचकों का मानना है कि यह विभिन्न समुदायों के धार्मिक व पारंपरिक कानूनों में हस्तक्षेप है।
पक्ष
*कानूनी सरलता: देश के जटिल और अलग-अलग पर्सनल लॉ की जगह एक सरल, पारदर्शी कानून होगा।
विपक्ष
विविधता को खतरा: कुछ जनजातीय और सांस्कृतिक समूहों को डर है कि इससे उनकी विशेष रीति-रिवाज प्रभावित हो सकते हैं।
पक्ष
राष्ट्रीय एकता: सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होने से सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलेगा।
विपक्ष
आम सहमति का अभाव: विरोधियों का तर्क है कि इसे बिना व्यापक आम सहमति के जल्दबाजी में लागू नहीं किया जाना चाहिए।
ये बोली सरकार
मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि वे सभी वर्गों के हितों और रीति-रिवाजों को ध्यान में रखकर, प्राप्त सुझावों के आधार पर ही संतुलित और व्यावहारिक ड्राफ्ट तैयार करेंगे।
यदि आप इस कानून के निर्माण में अपना मत देना चाहते हैं, तो आप सीधे MP UCC Portal पर जाकर अपना सुझाव सबमिट कर सकते हैं।
शिवपुरी कलेक्टर अर्पित वर्मा की भी सुनिए
'समान नागरिक संहिता' पर नागरिकों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। जिसके लिए https://ucc.mp.gov.in पर आप सुझाव दे सकते हैं।
आज मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से इस पर चर्चा की और निर्देश दिए हैं। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री Arpit Verma IAS एनआईसी से वीडियो कांफ्रेंस में शामिल हुए।
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर जन सुझाव आमंत्रित, 22 जून तक दे सकेंगे नागरिक अपने सुझाव
मध्यप्रदेश शासन द्वारा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के संबंध में जन परामर्श एवं सुझाव प्राप्त करने हेतु विशेष पोर्टल प्रारंभ किया गया है। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश के नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित करते हुए उनके सुझाव एवं मत प्राप्त करना है। आमजन 22 जून 2026 तक यूसीसी पोर्टल पर अपने सुझाव एवं अभिमत दर्ज करा सकते हैं। नागरिक ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपने विचार साझा कर सकते हैं, जिससे जनभावनाओं एवं सुझावों को व्यापक रूप से संकलित किया जा सके।
नागरिक https://ucc.mp.gov.in पोर्टल पर जाकर अथवा उपलब्ध कराए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर अपने सुझाव दर्ज कर सकते हैं।
कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री अर्पित वर्मा ने आज समस्त एसडीएम के साथ भी इस संबंध में बैठक की। उन्होंने समान नागरिक संहिता पर सक्रिय रूप से अपने विचार एवं सुझाव साझा करने की अपील की है।
जनसहभागिता से प्राप्त सुझाव प्रदेश के समावेशी एवं प्रभावी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
CM Madhya Pradesh
Jansampark Madhya Pradesh
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