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#धमाका_बड़ी_खबर: अवैध खनन पर कलेक्टर अर्पित वर्मा सख्त, खनिजों के अवैध खनन एवं परिवहन पर ठोका 17 लाख 39 हजार 510 रुपये का अर्थदंड

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शिवपुरी, 26 मई 2026। अवैध उत्खनन, खनन और परिवहन को लेकर बदनाम शिवपुरी को दाग मुक्त करने के इरादे से  कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा की कारवाई लगातार जारी है। उनके निर्देशानुसार जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भण्डारण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए लगातार कार्यवाही की जा रही है।
 कलेक्टर श्री वर्मा के निर्देशानुसार खनिज विभाग द्वारा वन, राजस्व, पुलिस एवं परिवहन विभाग के समन्वय से गठित जिला स्तरीय टास्क फोर्स के माध्यम से लगातार कार्रवाई की जा रही है। टीम ने सक्रियता दिखाते हुए सख्ती से कार्यवाही की है।
शिवपुरी शहरी क्षेत्र में व्यवसायिक प्रयोजन के लिए किए जा रहे बेसमेंट निर्माण कार्य के दौरान खनिज मुरम के अवैध उत्खनन एवं विक्रय पाए जाने पर एक प्रकरण दर्ज किया गया है और प्रकरण में संबंधित के विरुद्ध 2 करोड़ 96 लाख 10 हजार रुपये की अर्थदंड राशि अधिरोपित किए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
वहीं विगत दिवस 14 मई को तहसील पिछोर अंतर्गत गढ़रौली आर्मी फायरिंग रेंज क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन में संलिप्त 12 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पिछोर के नेतृत्व में जप्त किया गया। जप्त वाहनों को पुलिस थाना पिछोर की अभिरक्षा में रखा गया है और प्रकरण विवेचनाधीन है।
खनिज निरीक्षक ने बताया कि तहसील पोहरी में भी अनुविभागीय अधिकारी पोहरी द्वारा मुरम के अवैध उत्खनन में संलिप्त एक जेसीबी मशीन को जप्त कर पुलिस थाना पोहरी की अभिरक्षा में रखा गया है। 
जिले में माह अप्रैल से अभी तक खनिजों के अवैध परिवहन के कुल 23 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इनमें से 17 प्रकरणों का निराकरण कर 17 लाख 39 हजार 510 रुपये की अर्थदंड राशि अधिरोपित कर जमा कराई गई है, जबकि 6 प्रकरण निराकरण के लिए शेष हैं। 
इसी प्रकार रेत, गिट्टी, एम-सैंड एवं बोल्डर के अवैध भण्डारण के 5 प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें से 2 प्रकरणों में 97 हजार 400 रुपये की अर्थदंड राशि जमा कराई गई है।
कलेक्टर श्री अर्पित वर्मा के निर्देशन में जिले में अवैध खनन, परिवहन एवं भण्डारण पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से खनिज विभाग द्वारा संबंधित विभागों के समन्वय से सतत कार्रवाई जारी है।
दूसरी जगह उत्खनन, 3 क्रेशर व एक फर्शी पत्थर खदान की लीज निरस्त
कलेक्टर अर्पित वर्मा ने भौतिक सत्यापन कराने के बाद कार्रवाई करते हुए शिवपुरी जिले के तीन क्रेशर उत्खनन पट्टों और एक फर्जी पत्थर खदान लीज पर कारवाई की है। लीज की आड़ में दूसरी जगह अवैध उत्खनन किया जा रहा था। कलेक्टर ने भौतिक सत्यापन के बाद प्राप्त जांच रिपोर्ट के आधार तीनों क्रेशर और एक फर्शी पत्थर खदान की लीज निरस्त कर दी में है। कलेक्टर की इस कार्रवाई से 3 खनिज विभाग सहित राजस्व ने अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक शिवपुरी कलेक्टर अर्पित वर्मा ने जिले में माइनिंग अधिकारी की माइनिंग टीम से और फर्शी पत्थर खदानों का भौतिक सत्यापन  कराया।
जांच रिपोर्ट से पता चला है कि तीन क्रेशर व एक फर्शी पत्थर उत्खनन लीज से हटकर दूसरी जगह उत्खनन कर रही है। नरवर तहसील के ग्राम देवरीखुर्द में राजीव सिंघल के नाम से सर्व नंबर 228/1 रकबा 4 हेक्टेयर में क्रेशर उत्खनन पट्टा है। करैरा तहसील के दबरा दिनारा गांव में नीलेश पाठक का सर्वे नंबर 1352/4 रकबा 1.60 हेक्टेयर का गिट्टी क्रेशर उत्खनन पट्टा है। बदरवास तहसील के बामौर गांव में रामेश्वर गुप्ता का सर्वे नंबर में 1767, 1768, 1769, 1770/1, 1771/1, 1796/1, 1797, रकबा 2.87 हेक्टेयर में 1797, रकवा 2.87 हेक्टेयर में जबकि पिछोर तहसील के केनवाया गांव में श्याम सिंह गुर्जर के नाम से सर्वे नंबर 245 रकबा 1 हेक्टेयर में फर्शी पत्थर खदान की लीज है। चारों जगह लीज से हटकर दूसरी जगह अवैध उत्खनन पाया गया है। कलेक्टर ने जांच रिपोर्ट के आधार पर चारों की लीज निरस्त कर दी।
3 फ्रेशर और एक खदान की लीज निरस्त की है
भौतिक सत्यापन कराने पर निर्धारित लीज से दूसरी जगह उत्खनन हो रहा था। जांच रिपोर्ट के आधार पर तीन गिट्टी क्रेशर के उत्खनन पट्टा और एक फर्शी पत्थर खदान की लीज निरस्त की है। अर्पित वर्मा, कलेक्टर, शिवपुरी।

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#धमाका_खास_खबर: लुटियंस की वीआईपी 'जंग', 'दिल्ली जिमखाना' पर 5 जून को नहीं होगा 'बुलडोजर एक्शन', हाई कोर्ट में केंद्र ने दी बड़ी राहत!, रसूखदारों के 113 साल पुराने ठिकाने पर 'जबरन कब्जे' से केंद्र का इनकार

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delhi दिल्ली। लुटियंस दिल्ली के बीचोबीच 27.3 एकड़ के विशाल भूभाग में फैले देश के सबसे प्रतिष्ठित और रसूखदार दिल्ली जिमखाना क्लब (Delhi Gymkhana Club) को खाली करने के सरकारी फरमान पर दिल्ली हाई कोर्ट से एक बड़ी और राहत भरी खबर आई है. केंद्र सरकार ने अदालत में साफ कर दिया है कि 5 जून 2026 को क्लब पर कोई भी जबरन या पुलिस बल के जरिए कब्जा नहीं किया जाएगा. सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है।कि बेदखली की पूरी प्रक्रिया केवल कानून के दायरे में और उचित नोटिस देने के बाद ही आगे बढ़ाई जाएगी। हाई कोर्ट की सुनवाई:
 सरकार का रुख और कोर्ट का फैसलाजस्टिस अवनीश झिंगन की बेंच के सामने केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा. उन्होंने स्पष्ट किया कि भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) द्वारा दी गई 5 जून की डेडलाइन केवल क्लब को स्वेच्छा से जमीन सौंपने का एक विकल्प थी, न कि बलपूर्वक कब्जा लेने की तारीख।
अंतरिम रोक से कोर्ट का इनकार:
सरकार के इस लिखित आश्वासन और हलफनामे के वादे के बाद, कोर्ट ने केंद्र के आदेश पर किसी भी प्रकार की अंतरिम रोक लगाने की जरूरत नहीं समझी. 
केंद्र सरकार को समन:
दिल्ली हाई कोर्ट ने क्लब के सदस्यों और कर्मचारी संघ द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को समन जारी किया है और 8 हफ्तों के भीतर इस पर जवाब मांगा है।
मुआवजे और जमीन का विकल्प:
सरकार ने बताया कि मूल लीज डीड के क्लॉज 4 के तहत मुआवजे का प्रावधान मौजूद है. इसके तहत क्लब को आर्थिक मुआवजा या फिर अपनी गतिविधियों को चलाने के लिए दिल्ली में ही दूसरी जगह वैकल्पिक जमीन दी जा सकती है। आखिर क्यों खाली कराना चाहती है सरकार?
केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के तहत आने वाले भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने 22 मई 2026 को क्लब की लीज को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया था.
राष्ट्रीय सुरक्षा:
यह कीमती जमीन सीधे प्रधानमंत्री आवास और अति-संवेदनशील सुरक्षा क्षेत्र से सटी हुई है।
सैन्य बुनियादी ढांचा:
सरकार का तर्क है कि देश के रक्षा बुनियादी ढांचे (Defence Infrastructure) को मजबूत और सुरक्षित करने के लिए तथा अन्य महत्वपूर्ण सरकारी परियोजनाओं के लिए इस जमीन की तात्कालिक जरूरत है। भारी-भरकम बकाया:
रिपोर्टों के अनुसार, लीज रद्द करने के आदेश से पहले क्लब पर मूल किराए के अलावा करोड़ों रुपये का बकाया भी बताया गया है।
क्लब की दलील:
 '600 परिवारों की रोजी-रोटी का संकट' क्लब के सदस्यों और कर्मचारी संघ की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में पैरवी की. क्लब का कहना है कि सरकार का यह फैसला अचानक और मनमाना है. यदि बिना किसी ठोस विकल्प के इस 113 साल पुराने ऐतिहासिक क्लब को बंद किया गया, तो वहां काम कर रहे करीब 600 कर्मचारियों की आजीविका और उनके परिवारों पर सीधा संकट आ जाएगा. साथ ही, इसके 14,000 से अधिक रसूखदार सदस्यों (जिनमें रिटायर्ड जज, सैन्य अधिकारी, राजनेता और नौकरशाह शामिल हैं) की यादें और सामाजिक दायरा इससे प्रभावित होगा। ब्रिटिश काल से सत्ता के गलियारों तक का सफर
साल 1913 में 'इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब' के रूप में शुरू हुआ यह संस्थान भारत के इतिहास और सत्ता परिवर्तन का जीवंत गवाह रहा है. कनॉट प्लेस के मुख्य आर्किटेक्ट रॉबर्ट टोर रसेल द्वारा डिजाइन किया गया यह क्लब देश के सबसे रसूखदार लोगों का पसंदीदा अड्डा माना जाता रहा है, जहां मेंबरशिप मिलना भी किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं होता। 
यहाँ दिल्ली जिमखाना क्लब से जुड़ी कुछ बेहद दिलचस्प, अनसुनी और 'चटपटी' बातें दी गई हैं, जो इसके रसूख और इतिहास को बयां करती हैं:
सालों लंबी वेटिंग लिस्ट
इस क्लब की मेंबरशिप पाना देश में सबसे मुश्किल कामों में से एक है। आम लोगों के लिए इसकी वेटिंग लिस्ट 15 से 30 साल तक लंबी होती है। कई बार लोग अपने बच्चों का नाम बचपन में ही लिखवा देते हैं ताकि जवानी तक उन्हें मेंबरशिप मिल सके! 
रसूखदारों का 'पॉवर सेंटर':
यह केवल एक क्लब नहीं, बल्कि सत्ता के गलियारों का एक बड़ा केंद्र है। इसके 14,000 से ज्यादा सदस्यों में देश के पूर्व प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज, सेना के टॉप कमांडर और बड़े-बड़े ब्यूरोक्रेट्स शामिल हैं।
 ब्रिटिश दौर की 'क्लास' और 'रेसिज्म': साल 1913 में जब यह बना, तब इसका नाम 'इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब' था। ब्रिटिश काल में यहाँ भारतीयों की एंट्री पर सख्त पाबंदी थी। आजादी के बाद इसके नाम से 'इंपीरियल' शब्द तो हटा दिया गया, लेकिन इसका शाही अंदाज आज भी कायम है। 
सख्त 'ड्रेस कोड' का टशन
यहाँ आज भी ब्रिटिश जमाने के कड़े नियम और ड्रेस कोड लागू हैं। आप यहाँ बिना कॉलर वाली टी-शर्ट, स्पोर्ट्स शूज (सिर्फ स्पोर्ट्स एरिया को छोड़कर) या कैजुअल चप्पल पहनकर नहीं घूम सकते। कई बार बड़े-बड़े नेताओं और हस्तियों को ड्रेस कोड न मानने पर गेट से ही लौटाया जा चुका है। 
सस्ता और शानदार खाना
जहाँ बाहर फाइव-स्टार होटलों में खाने का बिल हजारों में आता है, वहीं इस क्लब के अंदर सदस्यों को बेहद कम और सब्सिडी वाले दामों पर शानदार खाना, चाय-नाश्ता और ड्रिंक्स मिलती हैं। यहाँ का 'मटन समोसा' और 'क्लब सैंडविच' बेहद मशहूर हैं।
विवादों से पुराना नाता
पिछले कुछ सालों में क्लब में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद (Nepotism) और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगे थे। इसके बाद केंद्र सरकार ने साल 2021 में इसके पुराने मैनेजमेंट को हटाकर अपना सरकारी प्रशासक (Administrator) नियुक्त कर दिया था, जिसके बाद से ही सरकार और क्लब के पुराने लॉबी के बीच तनातनी चल रही है। दिल्ली जिमखाना क्लब का इतिहास (Delhi Gymkhana Club History) केवल एक क्लब की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारत के औपनिवेशिक इतिहास, सत्ता के हस्तांतरण और लुटियंस दिल्ली के निर्माण का एक जीवंत दस्तावेज है।
 113 साल पुराने इस क्लब का गौरवशाली और शाही सफर निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं में सिमटा हुआ है: 
स्थापना और शाही शुरुआत (1913) राजधानी बदलने का असर: ब्रिटिश काल में जब साल 1911 में किंग जॉर्ज पंचम ने भारत की राजधानी को कलकत्ता (अब कोलकाता) से दिल्ली शिफ्ट करने का ऐलान किया, तब ब्रिटिश अधिकारियों के मनोरंजन के लिए एक विशिष्ट सामाजिक केंद्र की जरूरत महसूस हुई। 
इंपीरियल जिमखाना
इसी जरूरत के तहत 3 जुलाई 1913 को इस क्लब की स्थापना की गई। तब इसका नाम 'इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब' हुआ करता था।
पहले अध्यक्ष:
 इसके पहले प्रेसिडेंट ब्रिटिश अधिकारी श्री स्पेंसर हारकोर्ट बटलर (Spencer Harcourt Butler) थे, जो तत्कालीन यूनाइटेड प्रॉविंस के गवर्नर भी रहे। शुरुआती ठिकाना
शुरुआत में यह क्लब उत्तरी दिल्ली के सिविल लाइंस इलाके में 'कोरोनेशन ग्राउंड्स' के पास संचालित होता था। लुटियंस दिल्ली में नई रियासत (1928-1930 का दशक)27.3 एकड़ की जमीन: साल 1928 में जब नई दिल्ली (लुटियंस दिल्ली) का नक्शा तैयार हो रहा था, तब इस क्लब को सफदरजंग रोड पर 27.3 एकड़ जमीन एक 'परपेचुअल लीज' (अनंतकालीन पट्टे) पर मामूली किराए के साथ आवंटित की गई।
 शानदार वास्तुकला
क्लब की वर्तमान भव्य इमारत को मशहूर ब्रिटिश आर्किटेक्ट रॉबर्ट टोर रसेल (Robert Tor Russell) ने डिजाइन किया था। रसेल वही शख्स हैं जिन्होंने दिल्ली का ऐतिहासिक कनॉट प्लेस (Connaught Place) और 'तीन मूर्ति हाउस' भी डिजाइन किया था।
शाही चंदा और स्विमिंग पूल
1930 के दशक में भारत के वायसराय की पत्नी लेडी विलिंगडन ने क्लब में स्विमिंग पूल बनाने के लिए ₹21,000 का दान दिया था, जिसके सम्मान में वहां आज भी 'लेडी विलिंगडन स्विमिंग बाथ' की संगमरमर की पट्टिका लगी हुई है।
7 राजा बने आजीवन सदस्य
क्लब के शाही रसूख का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसके शुरुआती दौर में देश की 7 बड़ी रियासतों के महाराजा इसके लाइफटाइम मेंबर (आजीवन सदस्य) बने थे।
आजादी और 'इंपीरियल' से मुक्ति (1947) 
नाम में बदलाव
15 अगस्त 1947 को देश आजाद होने के बाद, क्लब के नाम से औपनिवेशिक प्रतीक 'इंपीरियल' शब्द को हमेशा के लिए हटा दिया गया और इसका नया नाम 'दिल्ली जिमखाना क्लब' पड़ा।
रसूखदारों का नया अड्डा
गोरों के जाने के बाद भारतीय शासक वर्ग, राजनेताओं, बड़े नौकरशाहों (IAS/IFS/IPS), सैन्य कमांडरों और जजों ने इस क्लब की कमान संभाली और यह आजाद भारत का नया 'पावर सेंटर' बन गया। 
घास के कोर्ट का गौरव
यह क्लब भारत में खेल, विशेष रूप से लॉन टेनिस के लिए काफी मशहूर रहा है। यहाँ घास के 26 टेनिस कोर्ट हैं, जो देश में किसी भी क्लब में सबसे ज्यादा हैं। यहाँ कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय (जैसे डेविस कप) टेनिस मुकाबले भी खेले जा चुके हैं। आजादी के बाद भी इस क्लब ने अपनी पुरानी ब्रिटिश परंपराओं और वीआईपी संस्कृति को बनाए रखा, जो आज 2026 में इसके अस्तित्व पर आए सबसे बड़े संकट (लीज रद्दीकरण और बेदखली नोटिस) के समय भी चर्चा का विषय बनी हुई है। 

#धमाका_न्यूज: जॉन डीयर कैंपस ड्राइव का शासकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय शिवपुरी में सफल आयोजन

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शिवपुरी। जॉन डियर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दिनांक 26 मई 2026 को शासकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय शिवपुरी में कैंपस ड्राइव का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह कैंपस ड्राइव कृषि एवं औद्योगिक मशीनरी क्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनी जॉन डीयर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आयोजित की गई, जिसमें संस्थान की इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग एवं मैकेनिकल इंजीनियरिंग शाखा के अंतिम वर्ष तथा पूर्व में उत्तीर्ण विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कैंपस ड्राइव के दौरान विद्यार्थियों ने कंपनी प्रतिनिधियों के साथ संवाद स्थापित कर अपनी तकनीकी दक्षता, व्यवहारिक ज्ञान एवं कौशल का प्रदर्शन किया तथा चयन प्रक्रिया एवं साक्षात्कार में सक्रिय सहभागिता निभाई।
संस्था के प्राचार्य द्वारा बताया गया कि यह संस्थान के लिए अत्यंत गर्व का विषय है कि विद्यार्थियों को जॉन डीयर जैसी अग्रणी कंपनी में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि यह कैंपस ड्राइव संस्थान में उद्योग एवं शिक्षा के मध्य बेहतर समन्वय तथा विद्यार्थियों की तकनीकी एवं व्यवहारिक तैयारी का प्रमाण है। भविष्य में भी इस प्रकार के कैंपस ड्राइव आयोजित किए जाने की संभावना है।
कैंपस ड्राइव के सफल आयोजन हेतु संस्था के प्राचार्य, प्रभारी टी.पी.ओ., समस्त फैकल्टी एवं कर्मचारियों द्वारा पूर्ण समर्पण एवं मेहनत से कार्य किया गया। 
वर्तमान में संस्थान में 10वीं के अंकों के आधार पर प्रथम वर्ष डिप्लोमा इंजीनियरिंग प्रवेश प्रक्रिया संचालित है। प्रथम राउंड पंजीयन की अंतिम तिथि 29 मई निर्धारित है। डिप्लोमा इंजीनियरिंग में प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थी एम.पी.ऑनलाइन कियोस्क के माध्यम से पंजीयन एवं चॉइस फिलिंग कर प्रवेश प्रक्रिया में सम्मिलित हो सकते हैं।अधिक जानकारी हेतु मोबाइल नंबर 9479815947, 9425716018, 8982520726 अथवा संस्था कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है।
















#धमाका_न्यूज: "जल संरक्षण के लिए जन अभियान", गंगा दशमी के अवसर पर आयोजित हुआ भव्य कार्यक्रम, प्रभारी मंत्री सहित अन्य जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों ने किया श्रमदान, दीदी रूठकर चली गईं

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शिवपुरी, 25 मई 2026/ प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के मुख्य आतिथ्य में गंगा दशहरा के पावन पर्व पर शिवपुरी में 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के तहत एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अभियान के अंतर्गत जल स्रोतों के संरक्षण और पुनरुद्धार को लेकर व्यापक स्तर पर गतिविधियां आयोजित की गईं।
जिला स्तरीय मुख्य कार्यक्रम शहर के गोरखनाथ मंदिर में आयोजित हुआ। जहां प्रभारी मंत्री श्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने श्रमदान किया और सभी को जल संरक्षण की शपथ दिलाई।
कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री अर्पित वर्मा, पुलिस अधीक्षक श्रीमती यांगचेन डोलकर भूटिया सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधिगण और बड़ी संख्या में आम नागरिक मौजूद थे। कलश पूजन और प्राचीन कुंड का जीर्णोद्धार
प्रभारी मंत्री श्री तोमर ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों के साथ विधि-विधान से कलश पूजन किया। इसके पश्चात, अभियान के तहत मंदिर परिसर में प्राचीन बावड़ी की सफाई की गई। प्रभार मंत्री ने स्वयं श्रमदान कर नागरिकों को जल संरचनाओं को स्वच्छ रखने का संदेश दिया।
जल संरक्षण की दिलाई गई शपथ
प्रभारी मंत्री ने जल स्रोतों को बचाने के लिए कार्यक्रम में उपस्थित सभी जनप्रतिनिधिगण, कलेक्टर, एसपी सहित सभी नागरिकों को 'पुराने जल स्रोतों की सफाई एवं संरक्षण' की सामूहिक शपथ दिलाई गई। उपस्थित जनसमुदाय ने राष्ट्र हित में पानी बचाने, जल का विवेकपूर्ण व संयमित उपयोग करने, पानी की हर एक बूंद को व्यर्थ बहने से रोकने और इसे प्रकृति की सबसे अनमोल संपदा मानकर आगामी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित करने का संकल्प लिया।
'कैच द रेन' अभियान को बढ़ावा
प्रभारी मंत्री श्री तोमर ने कहा कि पानी ही जीवन का मुख्य आधार है। "कैच द रेन" अभियान को गति देने पर विशेष जोर दिया, ताकि बारिश के पानी का अधिक से अधिक संचयन किया जा सके। उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे जल संकट से निपटने के लिए इस जन-आंदोलन का हिस्सा बनें।
​मंदिर भ्रमण और दर्शन
​कार्यक्रम के दौरान प्रभारी मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने परिसर स्थित मंदिर का भ्रमण कर देव दर्शन किए। उन्होंने मंदिर में  पूजा-अर्चना कर जिले की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
नगर पालिका सीएमओ को पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने के कड़े निर्देश
​प्रभारी मंत्री श्री तोमर ने शहर की पेयजल स्थिति को लेकर भी मुख्य नगरपालिका अधिकारी  को सख्त लहजे में निर्देश दिए कि शहर के नागरिकों को पानी की कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। उन्होंने गर्मी के मौसम में सुचारू जल प्रदाय सुनिश्चित करने और शहर की पानी की व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त रखने की हिदायत दी।
तुनक कर चली गई दीदी
नगर पालिका अध्यक्ष आज तब चर्चा में आ गई जब उपरोक्त कार्यक्रम से वे मंच छोड़कर चली गई। उनका कहना है कि उनका नाम तक नहीं लिया। दरअसल शिवपुरी के गोरखनाथ मंदिर में गंगा दशहरा पर आयोजित 'जल गंगा संवर्धन अभियान' कार्यक्रम के दौरान एक असहज स्थिति उत्पन्न हो गई। नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा नाराज होकर मंच से उठकर चली गईं।
कार्यक्रम में अतिथियों का माल्यार्पण कर सम्मान किया जा रहा था।
इसी दौरान नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा नाराज दिखीं और कुछ देर बाद मंच से उतरकर कार्यक्रम स्थल से चली गईं। इस घटना के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सीएमओ पर लगाया सुनियोजित अपमान का आरोप
नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा ने इस घटना के लिए मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) ईशांक धाकड़ पर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम नगर पालिका परिषद द्वारा आयोजित किया गया था, लेकिन सीएमओ ने सुनियोजित तरीके से मंच पर उनके लिए कुर्सी तक नहीं लगवाई।
शर्मा ने आगे बताया कि कुर्सी न होने के बावजूद वह मंच पर बैठीं, लेकिन सम्मान समारोह के दौरान उनका नाम नहीं बुलाया गया, जिससे उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित महसूस हुआ।
बोलीं- महिला जनप्रतिनिधियों का हो रहा अपमान
गायत्री शर्मा ने कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नारी शक्ति और महिलाओं के सम्मान की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर शासकीय अधिकारी महिला जनप्रतिनिधियों का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने घोषणा की कि वह इस पूरे मामले की शिकायत केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रभारी मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर, भाजपा जिला अध्यक्ष जसवंत जाटव और प्रदेश नेतृत्व से करेंगी।
सीएमओ बोले- कार्यक्रम में उनका नाम लिया गया था
इस मामले पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी ईशांक धाकड़ ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
उनका कहना है कि नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा मंच पर मौजूद थीं और कार्यक्रम के दौरान उनका नाम भी लिया गया था। सीएमओ धाकड़ ने कहा कि इसके बावजूद वह मंच छोड़कर क्यों चली गईं, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।
कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के प्रभारी मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर, भाजपा जिला अध्यक्ष जसवंत जाटव, कलेक्टर अर्पित वर्मा और एसपी यांगचेन डोलकर भूटिया उपस्थित रहे।














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