shivpuri शिवपुरी। मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में सैकड़ों पटवारियों ने स्वामित्व योजना के तहत किसानों और ग्रामीणों के भवनों की रजिस्ट्री प्रक्रिया में पटवारी को मुख्य किरदार बनाए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया। पटवारियों ने चेतावनी दी है कि इस व्यवस्था से तकनीकी या लिपिकीय त्रुटियों की स्थिति में उन्हें व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा और वे कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने को मजबूर होंगे।
शिवपुरी में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 में पटवारियों को निष्पादक बनाए जाने के विरोध में मंगलवार को 200 से ज्यादा पटवारी कलेक्ट्रेट पहुंचे। पटवारी संघ के अध्यक्ष बलराम सिंह धाकड़ के नेतृत्व में पटवारियों ने करीब एक घंटे तक प्रदर्शन और नारेबाजी की। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन सौंपा।
सरकार का नाम रखा जाए
संघ ने मांग की है कि पंजीयन दस्तावेज में पटवारी के नाम की जगह मध्यप्रदेश सरकार का नाम दर्ज किया जाए। साथ ही स्वामित्व योजना के निष्पादन, ई-केवाईसी, पंजीयन और व्यक्तिगत जिम्मेदारी वाले कामों से पटवारी संवर्ग को अलग रखा जाए। पटवारियों ने स्वामित्व योजना में सर्वेक्षण, मानचित्रण और अभिलेखीय कामों में सहयोग किया है। ग्रामीण आबादी का सर्वेक्षण और मानचित्रण पंचायत राज व्यवस्था के मार्गदर्शन में हुआ है। ऐसे में योजना का मूल निष्पादन और उससे जुड़े प्रशासनिक काम पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से कराया जाना उचित होगा।
ज्ञापन में कहा गया है कि पंजीयन विलेख में पटवारी का व्यक्तिगत नाम, पद और ई-सिग्नेचर दर्ज होने से भविष्य में सीमा, क्षेत्रफल, नाम, वारिसान, हिस्सेदारी, कब्जा या पूर्व सर्वेक्षण में गलती होने पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
संघ ने यह भी कहा कि निष्पादित अभिलेख की जांच उसी पटवारी से कराना तकनीकी रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। संघ ने यह भी कहा कि निष्पादित अभिलेख की जांच उसी पटवारी से कराना तकनीकी रूप से उचित नहीं है।












































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