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#mamakadhamakanews: शिवपुरी के 60 प्रतिभागी "आनंदम" सहयोगी कार्यशाला का बने हिस्सा, खुद से मिलने की यात्रा का किया अनुभव

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* भोपाल में तीन दिवसीय कार्यशाला में जाना आनंद बाहर खोजने की चीज नहीं खुद को पहचानने की अनुभूति है
शिवपुरी। हर व्यक्ति का जीवन भागदौड़ में बीत रहा है और परिस्थितियों से जूझने में वह इतना व्यस्त हो गया है कि स्वयं को जानना, सुनना और समझना ही भूल गया है। इसी भागदौड़ के बीच स्वयं के लिए ठहराव लेने, अपने भीतर झांकने व जीवन के आनंद को पहनानने के उद्देश्य से राज्य आनंद संस्थान मध्यप्रदेश द्वारा जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत, पशु चिकित्सा, पुलिस विभाग सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों व नागरिकों के 60 सदस्यीय दल के लिए विशेष तीन दिवसीय आनंदम सहयोगी कार्यशाला आयोजित की। 11 अगस्त से 13 अगस्त शाम तक भोपाल में विभिन्न सत्रों में आयोजित इस कार्यशाला का प्रथम दिन संस्थान के निदेशक सत्यप्रकाश आर्य ने दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। पहला सत्र आनंद की ओर विषयवस्तु  पर केन्द्रित रहा जिसमें प्रतिभागियों ने जीवन में मौजूद आनंद के अनुभवों को देखने और खुद के भीतर झांककर यह पहचानने का प्रयास किया कि वास्तविक आनंद का स्त्रोत आखिर कहां है। कार्यशाला के अंतिम दिन गुरूवार की शाम संस्थान के निदेशक प्रवीण गंगराणे ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर शिवपुरी से पहुंचे मास्टर ट्रेनर साकेत पुरोहित ने कार्यशाला का आभार व्यक्त किया। कार्यशाला में अन्य मास्टर ट्रेनर के रूप में डॉ. वीणा सिंह, पुष्पेन्द्र सिसोदिया, विनीत अग्रवाल, चंद्रकांत बोहरे, मौजूद रहे जबकि कार्यक्रम का समन्वय राजेश पटेल द्वारा किया गया। शिवपुरी से पहुंचे 60 प्रतिभागियों में से विशेष रूप से राजेन्द्र पिपलौदा, स्नेह सिंह रघुवंशी, नीरज सरैया, अतुल गौड, बृजेन्द्र भार्गव, अनिल पाराशर, संजय श्रीवास्तव, रंजना शर्मा, सलमा खान, वीरेन्द्र शिवहरे, मनोज खत्री, बालूराम रावत, हेमंत खटीक, निर्मित मिश्रा, रेखा रघुवंशी, पारवती रघुवंशी, बलराम त्रिपाठी, धर्मेन्द्र साहू, रश्मि भट्ट, भूपेन्द्र चंदेल, सुनील उपाध्याय, प्रीति सूर्यन, महेन्द्र करारे, महेश भार्गव, राजू पुरोहित, मनुराजा चौहान, सुरेन्द्र तिवारी आदि मौजूद थे। 
जीवन की बैलेंस सीट, नदी व मौन से जाना खुद को...
विभिन्न सत्रों पर आधारित इस कार्यशाला में तीन दिन के दौरान मास्टर ट्रेनर से प्रतिभागियों की खुद से पहचान कराने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित कीं जिनमें जीवन की बैलेंस सीट के माध्यम से यह सूचीबद्ध किया गया कि किसने हमारे साथ अच्छा किया और हमने किस-किस के साथ अच्छा किया। इससे यह जाना जा सके कि नि:स्वार्थ भाव से मदद करने में अलग ही आनंद की अनुभूति होती है। इसी तरह जीवन की नदी के माध्यम से यह जाना कि विभिन्न अवरोधों के बावजूद जीवन की धारा निरंतर चलती रहती है और खुद को प्रवाहमान बनाए रखने के लिए आत्ममंथन किया। इसी तरह प्रकृति के साथ आत्मपोषण की गतिविधि की गई। वहीं स्वयं से जुडऩे के लिए कनेक्शन, करेक्शन और डायरेक्शन के माध्यम से जीवन को सही दिशा देने की प्रक्रिया को समझाया गया। इसके अलावा स्वयं को पत्र लिखने एवं ढाई घंटे के मौन के माध्यम से स्वयं के साथ गहरा संवाद किया गया।
















#mamakadhamakanews: न्यायालय ने सुनाया फ़ैसला

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* विशेष न्यायालय ने डोडाचूरा तस्करी के आरोपियों को किया दोषमुक्त
shivpuri शिवपुरी। पुलिस थाना कोलारस द्वारा 16 अक्टूबर 2022 को मुखबिर की सूचना पर वाहन चेकिंग के दौरान राजस्थान की ओर से आ रहे दो वाहनों को पडोरा चौराहे पर रोका गया था। जांच के दौरान पहले वाहन से 1 बोरी और दूसरे वाहन से 22 बोरी डोडाचूरा बरामद किया गया, जिसका कुल वजन 322 किलोग्राम था।
इस मामले में पुलिस ने आरोपी राजेश कुमार, शिशान पाल गुप्ता, जतिन धीमान और रोहित (सभी निवासी जिला करनाल, हरियाणा) को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उनके खिलाफ एन.डी.पी.एस. एक्ट की धारा 8/15 के तहत अपराध क्रमांक 410/2022 दर्ज कर उन्हें विशेष न्यायालय (एन.डी.पी.एस.) शिवपुरी के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें सर्किल जेल शिवपुरी भेज दिया गया था।
पुलिस द्वारा संपूर्ण जांच पूरी करने के बाद न्यायालय में चालान पेश किया गया। मामले की पूरी सुनवाई के बाद, आरोपियों के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री अरविन्द दुबे द्वारा गवाहों से की गई जिरह और प्रस्तुत किए गए मजबूत तर्कों से सहमत होकर, माननीय विशेष न्यायालय (एन.डी.पी.एस.) शिवपुरी ने 11 अगस्त 2026 को दिए अपने निर्णय में सभी आरोपियों को इस मामले से दोषमुक्त (बरी) घोषित कर दिया है।
इस केस में आरोपियों की ओर से पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता श्री अरविन्द दुबे द्वारा की गई, जिसमें अधिवक्ता उत्कर्ष दुबे और एडवोकेट शिवारानी गुप्ता का विशेष सहयोग रहा।
















#mamakadhamakanews: ऑनलाइन हाजरी, छुट्टी के वक्त सर्वर क्रैश, बढ़ गया शिक्षकों का पारा, बारिश में आए पसीने

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डिजिटल हाजिरी के फेर में 60 किमी दूर जाने वाले शिक्षक फंसे, रात 9 बजे तक कहीं से भी 'टाइम आउट' करने की मिली राहत
भोपाल/शिवपुरी। प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए लागू की गई ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था गुरुवार को उस समय पूरी तरह चरमरा गई, जब छुट्टी के ठीक पहले मुख्य पोर्टल का सर्वर बैठ गया। इस तकनीकी गड़बड़ी के कारण न सिर्फ स्कूल आने, बल्कि छह घंटे की अनिवार्य ड्यूटी पूरी कर घर लौटने की तैयारी कर रहे शिक्षकों के बीच हड़कंप मच गया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने शाम करीब 7 बजे पोर्टल पर आपातकालीन संदेश जारी कर रात 9 बजे तक किसी भी स्थान से 'टाइम आउट' (हाजिरी दर्ज) करने की बड़ी राहत दी। 
नदी-नालों के रास्ते और 60 किमी का सफर
गुरुवार को हुई तेज बारिश ने शिक्षकों की मुसीबत को दोगुना कर दिया। जिले के दूर-दराज और वनांचल क्षेत्रों में, जहां से शिक्षकों को लगभग 60 किलोमीटर दूर तक का सफर तय करना पड़ता है, वे सबसे ज्यादा चिंतित नजर आए। बारिश के कारण उफान पर आए नदी-नालों और खराब रास्तों से होकर गुजरने वाले शिक्षकों को इस बात का डर सता रहा था कि यदि वे समय पर स्कूल परिसर (जियो-फेंसिंग) से हाजिरी नहीं लगा पाए, तो उनकी पूरे दिन की मेहनत पर पानी फिर जाएगा और वेतन कट जाएगा।
नियम सख्त, पर सिस्टम सुस्त
शासन के नए नियमों के मुताबिक, शिक्षकों के लिए स्कूल आने (टाइम इन) और जाने (टाइम आउट) के वक्त ऐप पर लाइव फोटो और लोकेशन (जियो-टैगिंग) मैच करना अनिवार्य है, इसके साथ ही, स्कूल परिसर में पूरे छह घंटे की उपस्थिति अनिवार्य की गई है। लेकिन गुरुवार को छुट्टी के ठीक पहले जैसे ही प्रदेश भर के लाखों शिक्षकों ने एक साथ 'टाइम आउट' करने के लिए ऐप खोला, लोड बढ़ने के कारण मुख्य सर्वर पूरी तरह क्रैश हो गया।
शाम तक शिक्षक स्कूल परिसरों में ही मोबाइल हाथ में लिए नेटवर्क और सर्वर आने का इंतजार करते रहे, जिससे उनके घरों को लौटने में भारी देरी हुई।
आपातकालीन संदेश से मिली राहत
चौतरफा हंगामे और शिक्षकों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए शाम 7 बजे विभाग को बैकफुट पर आना पड़ा। पोर्टल पर जारी आधिकारिक संदेश में कहा गया, "जो शिक्षक जहां है, उसी स्थान से रात 9 बजे तक अपना टाइम आउट दर्ज कर सकता है।" इस आदेश के बाद शिक्षकों को जियो-फेंसिंग के कड़े दायरे से उस दिन के लिए मुक्ति मिली और उन्होंने राहत की सांस ली।
शिक्षक संघों ने उठाई तकनीकी सुधार की मांग
इस घटना के बाद शिक्षक संगठनों ने एक बार फिर ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था के व्यावहारिक पक्षों पर सवाल उठाए हैं। शिक्षक प्रतिनिधियों का कहना है कि:
  • ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या को पहले दूर किया जाना चाहिए।
  • सर्वर की क्षमता (लोड मैनेजमेंट) को बढ़ाना बेहद जरूरी है ताकि एक ही समय पर लाखों लॉग-इन होने से पोर्टल क्रैश न हो।
  • खराब मौसम और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान इन नियमों में स्वत: शिथिलता देने का प्रावधान होना चाहिए ताकि शिक्षकों की सुरक्षा दांव पर न लगे।
















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