शिवपुरी। शिवपुरी नरवर रोड पर अक्सर तेंदुआ सड़क के आसपास देखा जाता रहा है। कभी दीवार पर तो कभी गाय को निशाना बनाने की पुलिया पर कोशिश करता दिखाई दिया है। इसी क्रम में शनिवार की रात 10:30 बजे, पत्रकार रशीद ख़ान और राज बाबू जी को नरवर के पास झिरना मंदिर मार्ग पर तेंदुआ दिखाई दिया।
शिवपुरी। प्रधान जिला न्यायाधीश शिवपुरी ने सेठ टोडरमल सुफ़ारिश्मल लोक न्यास समिति शिवपुरी की संपत्ति पर विक्रय कार्यवाही को संभावना पर इंकार कर दिया है। ट्रस्ट की संपत्ति को विक्रय करने का एक आवेदन पूर्व में कलेक्टर शिवपुरी द्वारा निरस्त किया जा चुका था।इसके बाद कलेक्टर के अतिरिक्त निर्देशन पर ट्रस्ट के प्रबंधन पर एसडीएम द्वारा की गई जाँच कार्यवाही में एसडीएम द्वारा नवीन न्यासियों को नियुक्त किया गया था, जिस कार्यवाही को कलेक्टर द्वारा निरस्त कर, प्रधान जिला न्यायालय के समक्ष उक्त जाँच कार्यवाही हेतु स्वयं आवेदन पेश कराया था।कलेक्टर द्वारा निरस्त की गई कार्यवाही के विरुद्ध नवीन न्यासियों ने भी न्यायालय में अपील की थी।शासन के आवेदन पर न्यायालय द्वारा हितबद्ध पक्षकारों को सुनने के लिए विज्ञाति प्रकाशन कराया था, जिस पर न्यास के किरायेदारों, एवं सहकारी बैंक द्वारा संपत्ति के विक्रय पर आपत्ति की गई थी।न्यायालय द्वारा शासन के आवेदन, एवं अपीलार्थी की अपील पर अंतिम आदेश लेख कर यह पाया कि वर्ष 1959 में लेख डीड पर 1967 में गठित सेठ टोडरमल एवं सेठ सुफ़ारिश्मल ओसवाल ने इस लोक न्यास समिति का गठन किया था, जिसकी डीड अनुसार प्रबंधन के लिए तीन अन्य ओसवाल परिवार के सदस्यों को भी ट्रस्टी बनाया गया था। दोनों न्यासियों ने उनकी संपत्ति को धार्मिक कार्य, और धर्मशाला का नाम बरकरार रखने के लिए ट्रस्ट का गठन किया गया था। ट्रस्ट में दान की गई संपत्ति का विक्रय वर्जित होना लेख है। वर्ष 1967 में नियुक्त न्यासियों के निधन के बाद अगले 57 वर्ष तक कोई नई नियुक्ति नहीं हुई। डीड के अनुसार मूल न्यासियों के वारिस ही न्यासी होंगे, पर किसी परिवार का स्थान रिक्त रहता है तो ओसवाल समाज शिवपुरी से न्यासी चुना जाएगा।वर्तमान में केवल सेठ टोडरमल एवं सुफ़ारिश्मल के वारिस उपस्थित है, इसलिए इन दोनों परिवारों के आवेदकों को ट्रस्टी नियुक्त किया गया है। न्यायालय ने आदेश किया कि अपील के संबंध में लोक न्यास अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ट्रस्ट संपत्ति के विक्रय की कार्यवाही इस प्रकरण में किया जाना संभव नहीं है। न्यायालय ने पाया कि ट्रस्ट संचालन एवं प्रबंधन हेतु आय की जरूरत हैं, अगर किसी भी ट्रस्टी को नियुक्त नहीं किया तो ट्रस्ट का संचालन मुमकिन नहीं है, इसलिए न्यासी नियुक्त करना आवश्यक है।दोनों प्रकरणों पर आदेश कर जिला न्यायालय द्वारा अग्रिम कार्यवाही हेतु अभिलेख को पुनः कलेक्टर शिवपुरी के समक्ष भेज दिया है।
किरायेदारों पर जिला न्यायालय की टिप्पणी को उच्च न्यायालय ने हटाया
जिला न्यायालय द्वारा किरायेदारों के आपत्ति आवेदन को अस्वीकार करने के अलावा उनके ट्रस्ट संपत्ति पर लंबे वक्त से बने रहने के व्यवहार पर की गई अतिरिक्त टिपण्णी को किरायेदार द्वारा उच्च न्यायालय के समक्ष आधारहीन होने के कारण चुनौती दी गई, जिसे न्यायालय की एकल पीठ द्वारा स्वीकार किया गया। उच्च न्यायालय द्वारा जिला न्यायालय की टिप्पणी को साक्ष्य के अभाव एवं केवल अनुमान पर आधारित होने के कारण हटा दिया।
कमेंट
प्रकरण में पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता सूर्य कुमार जैन ने बताया कि न्यास डीड लेखन अनुसार चूँकि वर्तमान में 3 न्यासी परिवारों के वारिसों गैरहाजरी है, इसलिए ओसवाल समाज की ओर से न्यासी नियुक्त किया जाना संभव है।अधिवक्ता अंचित जैन ने बताया कि जिला न्यायालय में बताया था कि चूँकि डीड में संपत्ति का विक्रय वर्जित है, इसलिए संपत्ति को जीर्णशीर्ण बताकर जीर्णोधार के लिए विक्रय करने का प्रयास ग़लत है। उच्च न्यायालय ने भी याचिकाकर्ता किरायेदार के नियमित भुगतान को देखने के बाद ही उनके पक्ष में आदेश दिया है।
Mumbai मुंबई। फिल्म अभिनेता सलमान खान RSS के सौ साल पूरे होने के अवसर पर मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में शनिवार को शामिल हुए। सलमान खान, फिल्म निर्माता सुभाष घई, गीतकार प्रसून जोशी के साथ मंच के सामने बैठे और RSS प्रमुख मोहन भागवत का भाषण सुना।
इस कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत में हिंदू ही है और कोई है ही नहीं। किसी खास रस्म या प्रार्थना से जुड़े धर्म को नहीं दिखाता है, न ही यह किसी खास समुदाय का नाम है।
उन्होंने कहा कि RSS किसी के खिलाफ नहीं है और न ही उसे सत्ता या पावर की इच्छा है। संघ राजनीति में सीधे तौर पर शामिल नहीं है, हालांकि संघ के कुछ लोग राजनीति में सक्रिय हैं।
भागवत ने कहा, "बहुत से लोग मानते हैं कि नरेंद्र मोदी RSS की वजह से प्रधानमंत्री हैं। वह एक पॉलिटिकल पार्टी चलाते हैं, लेकिन BJP एक अलग संस्था है। वह RSS की नहीं है, हालांकि उसमें हमारे स्वयंसेवक हैं।"
भागवत ने कहा- भारत का बंटवारा धर्म की वजह से हुआ। हमने कहा कि हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं, क्योंकि हम हिंदू हैं। इस्लाम, ईसाई धर्म अभी भी भारत में मौजूद हैं। झड़पें होती हैं, लेकिन देश एकजुट रहा है। हिंदू भाव को भुला देना भी बंटवारे का कारण बना।
भाषण में बोली गईं प्रमुख बातें
* संघ देश में चल रहे सकारात्मक प्रयासों को समर्थन और मजबूती देने पर फोकस करता है। संघ कोई पैरामिलिट्री फोर्स नहीं है। रूट मार्च और स्वयंसेवकों के लाठी अभ्यास के बावजूद RSS को अखाड़ा या सैन्य संगठन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
* हिंदुत्व अपनाने से किसी को कुछ भी छोड़ना नहीं पड़ता। न आपकी पूजा-पद्धति बदलती है, न भाषा, न रहन-सहन। हिंदुत्व का मतलब है सुरक्षा और साथ-साथ रहने का भरोसा। यह किसी एक धर्म को थोपने की बात नहीं करता।
*लोगों की आस्था, खाने-पीने की आदतें और भाषा अलग हो सकती हैं, लेकिन हम सब एक ही समाज, संस्कृति और देश का हिस्सा हैं। इसी सोच को हिंदुत्व कहा जाता है, आप इसे भारतीयता कह सकते हैं। इसलिए हिंदू-मुस्लिम एकता कहावत सही नहीं है, क्योंकि हम पहले से ही एक हैं।
*1925 में RSS बनने से पहले अंग्रेजों ने इंडियन नेशनल कांग्रेस (INC) को अपने सेफ्टी वाल्व के रूप में (सुरक्षा) बनाया था। लेकिन बाद में भारतीयों ने उसी कांग्रेस को आजादी की लड़ाई का मजबूत हथियार बना दिया।
*देश में अपना उत्पादन (स्वदेशी) मजबूत होना चाहिए, लेकिन दुनिया से जुड़ाव भी जरूरी है। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि यह जुड़ाव टैक्स या टैरिफ लगाकर जबरदस्ती नहीं होना चाहिए।
*परिवारों में बातचीत जरूरी है ताकि यह पक्का हो सके कि नई पीढ़ी ड्रग्स न ले या सुसाइड न करे। नागरिकों को सोचना चाहिए कि वे देश की सेवा के लिए कितना समय दे सकते हैं। सही और शांति से साथ रहने की ताकत को एक्टिवेट करने की जरूरत है, हमें एक-दूसरे का साथ देना होगा।
Unique Wedding Card बागपत में एक दूल्हे ने गजब का वेडिंग कार्ड छपवाया है. ये सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हुआ है. लोग भी इस कार्ड की खूब तारीफ कर रहे हैं. आखिर क्या है शादी के इस कार्ड में ऐसा कुछ खास, चलिए जानते हैं...
उत्तर प्रदेश के बागपत में शादी का एक अनोखा कार्ड वायरल हुआ है. दरअसल, यहां एक परिवार में बेटी की भी शादी है और बेटे की भी. बेटे आकाश ने शादी का ऐसा कार्ड छपवाया है, जिसकी चर्चा हर कहीं हो रही है. शादी में एक QR कोड छपवाया गया है. इसके पीछे का कारण जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे.
दूल्हा बनने जा रहे आकाश ने कहा- शादी में दूर-दूर से कई रिश्तेदार आते हैं. उन्हें पहले कार्ड देने के लिए भी जाना पड़ता है. मगर कई बार कार्ड देने जाने के चक्कर में और शादी समारोह में आने के वक्त सड़क हादसे हो जाते हैं. बस इन्ही को देखते हुए QR कोर्ड वाला कार्ड छपवाया गया है. यानि अगर रिश्तेदार शादी में किसी कारणवश नहीं भी आ पाएं तो QR कोड को स्कैन करके शगुन भेज सकते हैं. दूल्हे का ये भी मकसद है कि अनावश्यक खर्च और समय की भी बचत भी इससे हो सके.
7 और 8 फरवरी को हैं दोनों शादियां
दोघट कस्बा निवासी आकाश बाल्मीकि ने अपनी बहन और अपनी शादी के कार्ड पर QR कोड छपवाया है. आकाश ने बताया कि 7 फरवरी को उसकी बहन की शादी है और 8 फरवरी को उसकी खुद की शादी संपन्न होगी. दोनों शादियों के कार्ड पर छपे QR कोड के माध्यम से अब कन्यादान और दुल्हन की मुंह दिखाई का शगुन ऑनलाइन भेजा जा सकेगा. आकाश का कहना है कि शादी-विवाह के अवसर पर रिश्तेदार और परिचित अक्सर दूर-दराज से समारोह में शामिल होने के लिए यात्रा करते हैं. इस दौरान कई बार सड़क हादसे हो जाते हैं, जिससे खुशियों का माहौल मातम में बदल जाता है. इसी समस्या को देखते हुए उन्होंने यह कदम उठाया, ताकि दूर रहने वाले रिश्तेदार बिना यात्रा किए सुरक्षित तरीके से अपनी शुभकामनाएं और शगुन भेज सकें.
लोग कर रहे इस पहल की सराहना
उन्होंने बताया कि जिन रिश्तेदारों के लिए आना संभव नहीं है या जो दूरी और व्यस्तता के कारण नहीं आ पाते, वे QR कोड स्कैन कर ऑनलाइन कन्यादान या मुंह दिखाई का शगुन भेज सकते हैं. इससे न केवल उनकी सुरक्षा बनी रहेगी, बल्कि आने-जाने में होने वाला फजूल खर्च भी बचेगा. आकाश ने अपनी इस पहल के तहत पंजाब, चंडीगढ़, पानीपत समेत अन्य दूरस्थ क्षेत्रों में रिश्तेदारों को व्हाट्सएप के माध्यम से डिजिटल कार्ड भेजे हैं, जबकि आसपास के इलाकों में कार्ड स्वयं जाकर वितरित किए हैं.इस अनोखी सोच की क्षेत्र में काफी सराहना हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहल समय की जरूरत है और इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा. तकनीक के सही इस्तेमाल से परंपराओं को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया जा सकता है. आकाश की यह सोच आने वाले समय में अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है.
शिवपुरी, 07 फरवरी 2026। पोहरी महाविद्यालय प्रांगण में “विकसित भारत जी-राम-जी योजना” को लेकर सभी विभाग प्रमुखों की बैठक आयोजित की गई। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष नेहा यादव मुख्य अतिथि एवं पूर्व राज्यमंत्री सुरेश धाकड़ राठखेड़ा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष रामकली आदिवासी, मंडल अध्यक्ष आशुतोष जैमिनी, जनपद उपाध्यक्ष मुन्नालाल रावत, विधानसभा संयोजक विक्की मंगल, जनपद सीईओ ऑफिसर सिंह गुर्जर, बीएमओ डॉ. दीक्षांत गुधेनिया, जिला पंचायत सदस्य, जनपद सदस्य, पंच-सरपंच सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। जिला पंचायत अध्यक्ष नेहा यादव ने कहा कि जी-राम-जी योजना गांवों के समग्र विकास के साथ 125 दिनों के रोजगार का पक्का संकल्प है। इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों की दशा और दिशा में सकारात्मक सुधार होगा तथा ग्राम सभा में तय एजेंडा के अनुसार कार्य करते हुए ग्रामों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्य वक्ता पूर्व राज्यमंत्री सुरेश धाकड़ राठखेड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री के “हर हाथ को रोजगार” देने के संकल्प के अनुरूप इस योजना की शुरुआत की गई है। ग्राम विकास को गति देने के लिए योजना में आवश्यक संशोधन किए गए हैं, जिससे अधिक कार्यों को शामिल कर ग्रामीण प्रगति को सशक्त बनाया जा सके।