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#धमाका_न्यूज: केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने कोल्हापुर, महाराष्ट्र में आयोजित ग्रामीण डाक सेवक सम्मेलन में ग्रामीण डाक सेवकों को संबोधित कर प्रेरित किया

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शनिवार, 13 दिसंबर 2025

नई दिल्ली। 13 दिसंबर, 2025। केंद्रीय संचार एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री
श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने 13 दिसंबर 2025 को कोल्हापुर में आयोजित ग्रामीण डाक सेवक सम्मेलन में गोवा एवं पुणे क्षेत्र से आए लगभग 6,000 ग्रामीण डाक सेवकों (GDS) की विशाल सभा को संबोधित किया।
(कोल्हापुर में जीडीएस सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया)
मराठी भाषा में दिए गए अपने प्रेरणादायी संबोधन में माननीय मंत्री ने डाक कर्मचारियों की निष्ठावान सेवा भावना की सराहना की और डाकियों को “विश्वास के सेतु” बताते हुए कहा कि वे केवल पत्र ही नहीं, बल्कि बैंकिंग, बीमा और सरकारी सेवाएँ भी भारत के हर घर तक पहुँचाते हैं। उन्होंने ग्रामीण भारत को जोड़ने और राष्ट्र के विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
डाक कर्मचारियों के लिए लागू की गई विभिन्न कल्याणकारी सुधारों का उल्लेख करते हुए श्री सिंधिया ने ग्रामीण डाक सेवकों के बच्चों के लिए केंद्रीय विद्यालयों में प्रवेश, भत्तों में वृद्धि, नई वर्दी और जैकेट की शुरुआत तथा प्रोजेक्ट एरो जैसी पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये सुधार सरकार की फील्ड में कार्यरत कर्मचारियों की बात सुनने और उन्हें सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता का परिणाम हैं।
भारत पोस्ट की अभूतपूर्व उपस्थिति का उल्लेख करते हुए, जिसमें 1.65 लाख से अधिक डाकघर लगभग 6.5 लाख गाँवों को सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं, मंत्री ने विभाग को नवाचार, विश्वसनीयता और मूल्यों पर आधारित एक आधुनिक लॉजिस्टिक्स और सेवा शक्ति केंद्र में परिवर्तित करने का आह्वान किया। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “डाकिया अब बैंक लाया” के विज़न को याद करते हुए उन्होंने कहा कि भारत पोस्ट अब केवल डाक वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वित्तीय समावेशन और नागरिक सेवाओं का एक विश्वसनीय माध्यम बन चुका है, जबकि अपनी मूल “सेवा भाव” की भावना को बनाए हुए है।

सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण महाराष्ट्र के 10 उत्कृष्ट ग्रामीण डाक सेवकों का उनके असाधारण प्रदर्शन के लिए सम्मान समारोह रहा। माननीय मंत्री ने स्वयं प्रत्येक सम्मानित सेवक से बातचीत की और अपने हाथों से उन्हें नई इंडिया पोस्ट जैकेट, टोपी और पोस्टमैन बैग पहनाए, जो डाक सेवा में गरिमा, पहचान और गर्व का प्रतीक है। इस भावपूर्ण क्षण पर उपस्थित जनसमूह ने जोरदार तालियों के साथ सराहना की।

कोल्हापुर में जीडीएस सम्मेलन में डाक नायकों का सम्मान

मंच पर श्री छत्रपति शाहू महाराज, माननीय सांसद, कोल्हापुर; श्री धनंजय महाडिक, माननीय सांसद, कोल्हापुर; श्री जितेंद्र गुप्ता, महानिदेशक, डाक सेवाएँ; श्री सुवेंदु कुमार स्वैन, सदस्य (कार्मिक), डाक सेवा बोर्ड तथा श्री अमिताभ सिंह, मुख्य पोस्टमास्टर जनरल, महाराष्ट्र सर्कल उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा विकसित एआई आधारित “भाषिणी” प्लेटफॉर्म का उपयोग किया गया। इस पहल ने भाषाई और सांस्कृतिक विभाजनों को पाटने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग की सरकार की परिकल्पना को प्रदर्शित किया, जिससे एक समावेशी और बहुभाषी डिजिटल इंडिया की दिशा में कदम बढ़ाया गया।
अपने समापन संबोधन में श्री सिंधिया ने सभी डाक कर्मचारियों से गर्व, समर्पण और नवाचार के साथ सेवा जारी रखने का आग्रह किया तथा परिवर्तन और राष्ट्रीय सेवा की भावना को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा —
“धन्यवाद, जय हिंद।”
Marathi Translation
केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया यांनी कोल्हापूर, महाराष्ट्र येथे आयोजित ग्रामीण डाक सेवक संमेलनात ग्रामीण डाक सेवकांना संबोधित करून प्रेरणा दिली।










#धमाका_शेम_शेम: MP ने मारी बाजी, UGC की रिपोर्ट, 18 राज्यों के 54 प्राइवेट विश्वविद्यालयों में मध्य प्रदेश में सबसे अधिक 10 विश्वविद्यालय डिफॉल्टर घोषित

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बुधवार, 1 अक्टूबर 2025

Delhi दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से 18 राज्यों के 54 प्राइवेट विश्वविद्यालयों को डिफॉल्टर घोषित किया गया जिसमें मध्य प्रदेश में सबसे अधिक 10 विश्वविद्यालय डिफॉल्टर घोषित किए गए। इस लिस्ट में गुजरात के आठ सिक्किम के पांच और उत्तराखंड के चार विश्वविद्यालय डिफॉल्टर लिस्ट में शामिल है। अधिकारियों के अनुसार यूजीसी अधिनियम, 1956 की धारा 13 के तहत अनिवार्य जानकारी पेश नहीं करने और अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक जानकारी नहीं देने के कारण विश्वविद्यालयों पर यह कार्रवाई की गई है।
यूजीसी ने डिफॉल्टर या चूककर्ता विश्वविद्यालयों की सूची जारी की तथा उन्हें तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने की चेतावनी दी। ईमेल और ऑनलाइन बैठकों के माध्यम से कई रिमाइंडर का हवाला देते हुए, यूजीसी ने कहा कि विश्वविद्यालयों को निरीक्षण के लिए विस्तृत जानकारी पेश करने का निर्देश दिया था। साथ ही रजिस्ट्रार द्वारा सही ढंग से प्रमाणित सहायक दस्तावेज भी प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। यूजीसी सचिव मनीष जोशी ने मीडिया से कहा, उन्हें भरे हुए प्रारूप और परिशिष्टों को होम पेज पर लिंक देकर अपनी वेबसाइट पर अपलोड करने का भी निर्देश दिया गया ताकि जानकारी छात्रों और आम जनता के लिए सुलभ हो सके। इसके बाद ईमेल और ऑनलाइन बैठकों के माध्यम से कई रिमाइंडर भेजे गए। दिशानिर्देशों के अनुसार, उच्च शिक्षा संस्थानों को हितधारकों को जानकारी प्रदान करने के लिए कार्यात्मक वेबसाइट बनाए रखनी होगी।
कुछ राज्य के सिर्फ एक विश्वविद्यालय 
यूजीसी ने 18 राज्यों के कुल 54 प्राइवेट विश्वविद्यालयों को डिफॉल्टर लिस्ट में शामिल किया है। इस लिस्ट में असम, गोवा, हरियाणा, कर्नाटक, पंजाब, राजस्थान, त्रिपुरा और वेस्ट बंगाल ऐसे राज्य हैं, जिनकी डिफॉल्टर यूनिवर्सिटी की लिस्ट में केवल एक यूनिवर्सिटी शामिल है।
एमपी के ये विश्वविद्यालय डिफॉल्टर लिस्ट में शामिल
अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी, मध्य प्रदेश
आर्यावर्त यूनिवर्सिटी, सीहोर
डॉ. प्रीति ग्लोबल यूनिवर्सिटी, शिवपुरी
ज्ञानवीर विश्वविद्यालय, सागर
जेएनसीटी प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भोपाल
एलएनसीटी विद्यापीठ विवि, इंदौर
महाकौशल यूनिवर्सिटी, जबलपुर
महर्षि महेश योगी वैदिक विवि, जबलपुर
मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी, सीहोर
शुभम यूनिवर्सिटी, भोपाल।


















#धमाका_न्यूज: सुप्रीम कोर्ट में आई याचिका "मी लॉर्ड, शारीरिक संबंध बनाने की उम्र 18 से घटाकर 16 साल कर दी जाए"

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गुरुवार, 24 जुलाई 2025

New delhi नई दिल्ली। शारीरिक संबंध बनाने के लिये वैधानिक उम्र 18 वर्ष से घटाकर 16 वर्ष करने की अर्जी सुप्रीम कोर्ट पहुंची है। न्यायमित्र और वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने सहमति से शारीरिक संबंध बनाने के लिये वैधानिक उम्र 18 वर्ष से घटाकर 16 वर्ष करने की शीर्ष अदालत से सिफारिश की है। चर्चित ‘निपुण सक्सेना बनाम भारत संघ' मामले में शीर्ष अदालत की सहायता करने वाली न्यायमित्र जयसिंह ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) 2012 और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 375 के तहत 16 से 18 वर्ष की आयु के किशोर एवं किशोरियों से जुड़ी यौन गतिविधियों को पूर्ण अपराधीकरण करने को चुनौती देते हुए अपने लिखित प्रस्तुतियां दी हैं। उन्होंने दलील दी कि वर्तमान कानून किशोरों के बीच सहमति से बनाए गए प्रेम संबंधों को अपराध मानता है और उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। जयसिंह ने कहा कि कानूनी ढांचा किशोरों के बीच सहमति से बने संबंधों को गलत तरीके से दुर्व्यवहार के बराबर मानता है, तथा उनकी स्वायत्तता, परिपक्वता और सहमति देने की क्षमता को नजरअंदाज करता है। वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, ‘‘सहमति की आयु 16 से बढ़ाकर 18 वर्ष करने को उचित ठहराने के लिए कोई तर्कसंगत कारण या अकाट्य आंकड़ा नहीं है।'' उन्होंने कहा कि आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2013 द्वारा इसे बढ़ाए जाने से पहले 70 वर्षों से अधिक समय तक (यौन सहमति की) आयु सीमा 16 वर्ष ही रही थी। जयसिंह ने कहा कि (शारीरिक) संबंध बनाने के लिए सहमति की उम्र में वृद्धि बिना किसी बहस के की गई थी, और यह न्यायमूर्ति वर्मा समिति की सिफारिश के विरुद्ध है। न्यायमित्र ने कहा कि आजकल किशोर समय से पहले ही यौवन प्राप्त कर लेते हैं और अपनी पसंद के रोमांटिक और यौन संबंध बनाने में सक्षम होते हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के निष्कर्षों सहित वैज्ञानिक और सामाजिक आंकड़े बताते हैं कि किशोरों में यौन गतिविधियां असामान्य नहीं हैं। जयसिंह ने 2017 और 2021 के बीच 16-18 वर्ष की आयु के नाबालिगों से जुड़े पॉक्सो कानून के तहत अभियोजन में 180 प्रतिशत की वृद्धि का हवाला दिया। उन्होंने कहा, ‘‘अंतरजातीय या अंतरधार्मिक संबंधों से जुड़े मामलों में अधिकतर शिकायतें अक्सर लड़की की इच्छा के विरुद्ध माता-पिता द्वारा दर्ज कराई जाती हैं। न्यायमित्र ने चेतावनी देते हुए कहा कि सहमति से यौन संबंध को अपराध घोषित करने से ‘‘युवा जोड़ों को खुले संवाद और शिक्षा को प्रोत्साहित करने के बजाय छिपने, शादी करने या कानूनी परेशानी में पड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है।'' इस समस्या के समाधान के लिए, उन्होंने न्यायालय से कानून में ‘‘आयु के निकट'' अपवाद को शामिल करने का आग्रह किया, जो 16 से 18 वर्ष की आयु के किशोरों के बीच सहमति से किए गए यौन कृत्यों को पॉक्सो और आईपीसी के तहत अभियोजन से छूट देगा। उन्होंने कहा, ‘‘किशोरों के बीच यौन संबंधों को अपराध घोषित करना मनमाना, असंवैधानिक और बच्चों के सर्वोत्तम हितों के विरुद्ध है।'' वरिष्ठ अधिवक्ता ने अंतरराष्ट्रीय मानदंडों और भारतीय न्यायशास्त्र का हवाला देते हुए तर्क दिया कि कानूनी क्षमता सख्ती से उम्र-बाधित नहीं है। जयसिंह ने बंबई, मद्रास और मेघालय सहित विभिन्न उच्च न्यायालयों के रुझानों की ओर भी इशारा किया गया है, जहां न्यायाधीशों ने पॉक्सो के तहत किशोर लड़कों के खिलाफ स्वतः मुकदमा चलाने पर असहमति व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इन न्यायालयों ने रेखांकित किया कि नाबालिगों से संबंधित सभी यौन कृत्य बलपूर्वक नहीं होते हैं, तथा कानून को दुर्व्यवहार और सहमति से बने संबंधों के बीच अंतर करना चाहिए। 
जयसिंह ने शीर्ष अदालत से आग्रह किया कि 16 से 18 वर्ष की आयु के किशोरों के बीच सहमति से बनाए गए यौन संबंध को दुर्व्यवहार नहीं माना जाना चाहिए और इसे पॉक्सो तथा दुष्कर्म कानूनों के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए। उन्होंने पॉक्सो की धारा 19 के तहत अनिवार्य अभ्यावेदन दायित्वों की समीक्षा का आह्वान किया, जो किशोरों को सुरक्षित चिकित्सा देखभाल प्राप्त करने से रोकता है। जयसिंह ने अपनी लिखित रिपोर्ट में कहा, ‘‘यौन स्वायत्तता मानव गरिमा का हिस्सा है, और किशोरों को अपने शरीर के बारे में विकल्प चुनने की क्षमता से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19 और 21 का उल्लंघन है। (साभार)


#धमाका_खास_खबर: आज सर्वोच न्यायालय से पूर्व मंत्री श्री रामनिवास रावत को मिली बड़ी राहत, मामला उम्मीदवार मुकेश मल्होत्रा विजयपुर क्षेत्र के विधायक द्वारा झूठा हलफनामा दायर करने वाली याचिका का

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मंगलवार, 22 जुलाई 2025

New delhi नई दिल्ली। सर्वोच न्यायालय के न्याय मूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की खण्डपीठ ने आज मंगलवार को पूर्व मंत्री श्री राम निवास रावत को बड़ी राहत दी है। 
दरअसल बीते चुनाव में रावत के प्रतिद्वंदी उम्मीदवार मुकेश मल्होत्रा विधायक विजयपुर क्षेत्र के द्वारा झूठा हलफनामा दायर करने के संबंध में मुख्य चुनाव याचिका मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में रिट लगाई गई थी। इस चुनावी हलफ़नामे में करीब 6 आपराधिक मामलों का पूर्ण उल्लेख नहीं किया गया, जिन में बहुत ही संगीन धाराओं में भी कायमी थी, और दो मामलों में चार्ज भी लग गए। ये सारा ब्यौरा हर चुनाव उम्मीदवार को देना होता है, जो नहीं किया गया। 
पूर्व मंत्री रावत ने यह मामला उच्च न्यायालय में गलत हलफनामे के द्वारा जनता को गुमराह करके चुनाव में जीत हासिल करने को लेकर दायर किया तो सर्वोच न्यायालय में याचिका खारिज करने के खिलाफ मुकेश मल्होत्रा ने अपील दायर की है, जिनके लिए वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने सर्वोच्च न्यायालय के खिलाफ याचिका दायर की है। 
राम निवास रावत की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता श्री नीरज किशन कौल और अधिवक्ता निपुण सक्सेना ने जोड़ी बनाई।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने हाईकोर्ट के आदेश को बरकारर रखा जिसके द्वारा, चुनाव याचिका को खारिज करने की याचिका को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया था। 
सर्वोच न्यायालय ने पूर्व मंत्री राम निवास रावत की दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि एक मतदाता का मूलभूत अधिकार है कि वह अपने उम्मीदवार के बारे में पूरी जानकारी  हासिल करे। जिसके लिए हलफनामे को रखा गया है। अगर हलफनामे में प्रथम दृष्टया गलत तथ्य लिखे हैं, या झूठ कहा गया है, और संगीन मामले छुपाए गए हैं, तो ये भ्रष्ट आचरण की शुरुआत होगी। इस आधार पर चुनाव याचिका को डिसमिस नहीं किया जा सकता। अभी चुनाव याचिका माननीय मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में लंबित है। 
बता दें कि उप चुनाव में मुकेश मल्होत्रा कांग्रेस के टिकट पर मैदान में थे, जबकी पूर्व मंत्री रामनिवास रावत बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े थे। आज की जीत बीजेपी के लिए बड़ी जीत है, और 6 बार विधायक और 3 बार मंत्री रहे राम निवास रावत के लिए अभयदान देखा जा रहा है।
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