शुभ समय (सर्वश्रेष्ठ): सुबह 06:52 बजे से 07:43 बजे।
अभिजीत मुहूर्त (दूसरा विकल्प): दोपहर 12:05 बजे से 12:50 बजे तक।
प्रतिपदा तिथि: 19 मार्च सुबह 06:52 से शुरू होकर 20 मार्च सुबह 04:52 तक रहेगी।
पूजन सामग्री:
कलश स्थापना: मिट्टी का कलश, जौ (जवारे), साफ मिट्टी, आम के पत्ते, जटा वाला नारियल, कलावा, गंगाजल, सिक्के, सुपारी।
माता पूजन: दुर्गा जी की प्रतिमा/तस्वीर, चौकी, लाल कपड़ा, रोली, कुमकुम, सिंदूर, चावल (अक्षत), धूप, दीप, घी, कपूर।
श्रृंगार व प्रसाद: लाल चुनरी, सोलह श्रृंगार सामग्री, फूल-माला, फल, मिठाइयां (मिश्री), पान, लौंग-इलायची।
पूजन विधि (कलश स्थापना):
तैयारी: सुबह जल्दी स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थान पर गंगाजल छिड़कें।
चौकी स्थापना: चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें।
जौ बोना: मिट्टी के पात्र में जौ बोएं और उस पर कलश रखें।
कलश स्थापना: कलश में गंगाजल, सिक्का, सुपारी, और आम के पत्ते रखें। कलश के मुख पर नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर स्थापित करें।
पूजन: गणेश जी का ध्यान करें, फिर कलश और माता रानी की पूजा करें। दीप प्रज्वलित करें, फल-फूल चढ़ाएं और भोग लगाएं।












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