शिवपुरी। ग्राम विलोकलाँ फोरलेन स्थित हनुमान मंदिर पर चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के चौथे दिन श्री राम जानकी विवाह उत्सव मनाया
गया। कथा व्यास बाल योगी वासुदेव नंदिनी भार्गव ने बताया कि जनक जी स्वयं भक्त थे और उनकी धनुष खंडन के साथ सीता विवाह की प्रतिज्ञा की लाज भगवान ने ही रखी। भक्तों की लाज की चिंता केवल भगवान को ही
होती है और जनक जी स्वयं भक्त हैं, तभी तो अयोध्या से भगवान राम स्वयं विश्वामित्र का माध्यम लेकर आए क्योंकि और कोई राजा योग्य नहीं था अतः भक्त की प्रतिज्ञा भगवान के बिना पूर्ण नहीं होती है , हमें भी जनक जी से प्रेरणा लेकर भगवान की भक्ति करने की कोशिश लगातार करते रहना चाहिए।
होती है और जनक जी स्वयं भक्त हैं, तभी तो अयोध्या से भगवान राम स्वयं विश्वामित्र का माध्यम लेकर आए क्योंकि और कोई राजा योग्य नहीं था अतः भक्त की प्रतिज्ञा भगवान के बिना पूर्ण नहीं होती है , हमें भी जनक जी से प्रेरणा लेकर भगवान की भक्ति करने की कोशिश लगातार करते रहना चाहिए।
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