पुण्य स्मृति दिवस
(उमा शर्मा, लेखक एवम साहित्यकार)
स्वन्त्रता संग्राम के अपराजित योद्धा हमारे ससुर जी स्व लक्ष्मी नारायण शर्मा जी आज के ही दिन परशुराम छात्रावास का निर्माण कराते हुए ब्रह्मलीन हो गए थे। उनकी हार्दिक इच्छा थी कि शहर में एक ऐसा छात्रावास हो जहां गरीब प्रतिभावान ब्राह्मण बालक रहकर शिक्षा प्राप्त कर सके।क्योकि बर्तमानमे व्राह्मण कुल को सबसे ज्यादा सहयोग की आवश्यकता है बे प्राण प्रण से ऐसी कार्य मे लगे थे और वही छात्रावास के सामने ही एक सड़क दुर्घटना में उनका निधन को गया। आप समाज को एक नई सोच और नई पीढ़ी को सामाजिक सहयोग और छात्रावास सोंपकर गए
लेकिन आपसी मतभेद के चलते आज परशुराम छात्रावास के रूप में नही बल्कि परशुराम वाटिका के रूप में सन्चालित है जिसके कारण हमारे सामाजिक अगुआओं की सामाजिक उत्थान की सोच को ठेस पहुंची है।
लेकिन उनके आदर्श ओर उनकी प्रेरणा आज भी उनके आशीर्वाद के रूप में प्रत्यक्ष अनुभव होती है
आज उनकी पुण्यतिथि पर ये संकल्प लेती हूं कि अंधेरा कितना भी गहरा हो हम दिया जलाते रहेंगे।
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