पानी चीख चीख कर कहता है, हमारी कीमत उससे पूछिये जिसको हासिल नहीं हैं हम
शिवपुरी। बून्द बून्द पानी को तरसती शिवपुरी, काम धंधे छोड़कर, बच्चे स्कूल भूलकर एक एक कट्टी पानी के लिये भटकते हैं जी हाँ यह वही शिवपुरी है। फोरलेन पर सर पर गगरी रखे या साइकिल पर कट्टीयों को टांगकर लोग मिले या ऑटो में सवारी की जगह पानी भरकर जाते लोग दिखे यह भी प्यासी शिवपुरी है। शायद इस बात से बाकिफ नहीं हमारे जल प्रबंधन के अधिकारी। या जान बूझकर पानी की बर्वादी पर आमादा हैं।आज हम बायपास के होटल स्टार गोल्ड के सामने नाले में तेजी से बेकार बहते मड़ीखेड़ा पेयजल की बोलती तस्वीर लेकर आये हैं। नाले में सैकड़ों गेलन पानी बेकार बह रहा है। देखने की फुर्सत किसी को नहीं।
कनपटी पर विवेकानंद में 2 दिन में 2 घण्टे पानी की सप्लाई
जितना पानी नाले में बेकार बहाया जा रहा है उतने पानी से पॉश विवेकानंद कॉलोनी ही नहीं बल्कि खुडा जैसी जल संकट से झुझती आई कॉलोनी की नियमित प्यास बुझाई जा सकती है। अभी बमुश्किल 2 दिन के अंतराल में 2 घण्टे एक एक गली को पानी जैसे तैसे मिल पाता है। अगर इस लाइन को जोड़ दिया जाए तो पानी बेकार नहीं बहेगा बल्कि सप्लाई भी नियमित हो सकती है। 7 दिन 24 घण्टे सप्लाई वाली मड़ीखेड़ा की लाइन जरूरतमंद कॉलोनियों को छोड़कर नव विकसित कॉलोनियों की तरफ मोड़ दी गई हैं। लोग कहते हैं कि मोटी राशि देकर अवैध रूप से लाइन बिछाई जा रही हैं। आज किस तरह बर्वाद हो रहा पानी जरा देखिये।
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