गीता पब्लिक स्कूल के एग्रीकल्चर और बागवानी में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों ने ड्रिप इरिगेशन सिस्टम द्वारा फार्मिंग करने के फायदों को जाना
शिवपुरी। स्कूल के कृषि संकाय के प्रमुख दशरथ यादव सर ने विद्यार्थियों को ड्रिप सिंचाई विधि के बारे में बताया कि इस विधि में पानी की बचत होती है। इस विधि से खेती करने में 60 से 70% तक पानी की बचत होती है और इस विधि में पानी पौधों की जड़ों तक धीरे-धीरे कम दबाव से जाता है जिससे पानी बर्बाद होने से बच जाता है। इस विधि से वाष्पीकरण , लीचिंग द्वारा जो पानी की बर्बादी होती है उससे बचा जा सकता है। यह विधि फल वाले पौधों जैसे आम, पपीता, नींबू, संतरा, मौसंबी एवं सब्जी वाली फसलों में अत्यंत उपयोगी होती है। इस विधि के द्वारा खड़ी फसल में उर्वरकों को आसानी से दिया जा सकता है । कीटनाशक दवाई का भी स्प्रे आसानी से किया जा सकता है। इस विधि का मुख्य उद्देश्य यह है कि इसमें मुख्यता पानी की बचत होती है और उर्वरक एवं कीटनाशक दवाओं का सही से छिड़काव हो जाता है। इस विधि का प्रयोग करने से फसलों में खरपतवार की समस्या भी कम हो जाती है। एक बार ड्रिप फिटिंग के बाद लंबे समय तक श्रम की बहुत बचत होती है जिसका लाभ किसानों को मिलता है। यह विधि विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष रूप से समझाई गई जिससे विद्यार्थियों ने न केवल इस विधि के फायदों को जाना बल्कि बहुत से किसानों के लिए पानी की जो समस्या बनी रहती है इस विधि द्वारा खेती करने से कैसे पानी की बचत की जा सकती है उससे भी विद्यार्थियों को अवगत कराया गया । यद्यपि यह महंगी और खर्चीली तकनीक है, जिसके लिए किसानों को सरकार के द्वारा बड़ी मात्रा में सब्सिडी भी उपलब्ध कराई जा रही है अतः सभी किसानों को उसका उपयोग कर लाभ उठाना चाहिए।
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