अब बात गुटबाजी की तो बताना होगा कि ओमी जैन स्वयं सेवक संघ के कट्टर सदस्य हैं। पार्टी के उदयकाल से साथ है लेकिन गुटबाजी का ताज उन्होंने कभी नहीं पहना। अगर किसी नेता ने उन्हें नहीं समझा तो घर बैठे लेकिन जड़ें खोदने का काम कभी नहीं किया, शायद बे एक व्यवसाई भी हैं तो सारी बात भली भांति समझते हैं। आज जब उन्होंने कहा कि उनकी निजी जिंदगी की पड़ताल हो रही है तो वास्तव में एक सुलझा हुआ नेता राजनीति से तौबा करेगा लेकिन कोई बखेड़े में नहीं पढ़ना चाहेगा। खैर अब बात नपा में बदलाव की बयार की। तो बताना होगा की दो चार नाम शंकित हो सकते है जिनके दिल में किसी और नेता के लिए चाहत हो लेकिन फिलहाल कोई भी ताकतवर नेता ऐसा नहीं जो सिंधिया जी से इतर सोच रखता हो। जिनके नाम खुले तौर पर तोमर गुट के साथ लिए जाते रहे उन्हें भी बीजेपी में आने और पावर फुल राजनीति के चलते सिंधिया जी का ही ऐतिहासिक स्वागत करते देखा गया है। शायद एक वजह ये भी है कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया वो समुंदर हैं जिसमें हर नदी आकर मिलती है तो उनके रंग में रंग जाती है। उनके बारे में अलग राय रखने वाले गुटबाजी की बातें करके टीआरपी भले ही बटोरना जानते हो लेकिन ये सच है फिलहाल सिर्फ सिंधिया की छत्र छाया में शिवपुरी जिले की राजनीति पल्लवित है। हां ये भी सच है कि कभी गुटबाजी हुआ करती थी लेकिन प्रदेश सरकार की कद्दावर मंत्री रहीं यशोधरा राजे के प्रताप के समय से ही शिवपुरी में गुटबाजी जाती रही या कहिए दिल में भले किसी के लिए स्थान हो लेकिन जुबां खोलने की हिम्मत किसी में नहीं, बदलते दौर के बाद अब तो बिल्कुल भी नहीं। हां लेकिन महाराज को इस विषय पर जरूर सोचना होगा कि आखिर प्रमाणित भ्रष्टाचार पर कारवाई न हो तो मन दुखी तो होता ही है। तीस से अधिक पार्षद अगर एक ही स्वर में बगावत पर उतारू हैं तो कोई बात तो होगी, जनता का ये भी कहना है कि इन जख्म पर मरहम न लगाई तो जल्द ही सामूहिक इस्तीफे की बात से इनकार नहीं किया जा सकता। रही बात गुटबाजी की तो कई नाम हैं जो जाहिर तौर पर अन्य नेता से लगाव की मंच से बातें करते हैं लेकिन उनकी भी आस्था सिंधिया जी के लिए अटूट है, इसलिए शिवपुरी में गुटबाजी के गुल नहीं खिलते।

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