बता दें कि भिंड से बीजेपी विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह जब कलेक्टर बंगले के बाहर धरना प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान तीखी नोंकझोंक हुई। बात इतनी बढ़ गई कि सुरक्षाकर्मी मौजूद न होते तो विधायक ने मुक्का मारने जो हाथ कलेक्टर की तरफ उठाया वह उन्हें जड़ भी दिया होता। विधायक काफी गुस्से में थे और गाली देते हुए धमकी भी दे डाली। (देखिए video)
दरअसल, विधायक नरेंद्र कुशवाह कलेक्टर बंगले के बाहर विधायक धरना दे रहे थे। उन्होंने प्रशासन पर किसानों की अनदेखी खाद न मिलने का आरोप लगाते हुए किसानों के साथ नारेबाजी की।
ये तब हुआ जब कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव ने बाहर आकर प्रदर्शनकारियों से मिलने से इनकार किया। जब नारेबाजी होने लगी तब वे बाहर आए बाद में वे गेट के पास खड़े होकर विधायक से बात कर रहे थे। इसी दौरान कलेक्टर को खरी-खोटी सुनाते हुए कुशवाह ने गाली दी और मारने के लिए हाथ भी उठाया।
खाद के लिए देर रात से लाइन में लग रहे
किसान
प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा कि वे रात 12 बजे से सहकारी समितियों के बाहर कतार में खड़े हो जाते हैं, लेकिन उन्हें मुश्किल से एक या दो बोरी खाद ही मिल पा रही है। वे लगातार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। किसानों का आरोप है कि खाद खुले बाजार में महंगे दामों पर आसानी से उपलब्ध है, जिससे कालाबाजारी की आशंका गहरा रही है।
विधायक बोले- प्रशासन मूकदर्शक बना
किसानों की शिकायत लेकर विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह बुधवार सुबह कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव के निवास पर पहुंचे। यहां धरना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा- किसान खाद के लिए बेहाल हैं और प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है। खाद का वितरण सही तरीके से नहीं हो रहा है। यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो आंदोलन और भी उग्र होगा। मौके पर एसपी असित यादव, एएसपी संजीव पाठक और एडीएम एलके पांडेय भी पहुंचे थे। ये सभी अधिकारी विधायक को समझाने में जुटे रहे। विधायक ने फोन पर चंबल संभाग के कमिश्नर मनोज खत्री से भी बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कमिश्नर को बताया कि खाद संकट को लेकर कोई जमीनी तैयारी नहीं की गई है।
पहले भी सदन में अपनी सरकार को घेर चुके
भिंड से भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह ने 9 साल पहले एक मामले में तत्कालीन सामान्य प्रशासन राज्यमंत्री लालसिंह आर्य को घेरा था। उन्होंने कहा था कि आर्य सदन को गुमराह कर रहे हैं। सवा करोड़ का घपला है, जिसके बारे गलत जानकारी दी जा रही है। इस पर आर्य ने सफाई देते हुए कहा कि हमारा किसी भी आरोपी को बचाने का उद्देश्य नहीं है। जांच पूरी होते ही जो दोषी होगा, कार्रवाई की जाएगी।
टिकट नहीं मिला तब 'साइकिल' पर सवार हुए थे नरेंद्र
नरेंद्र सिंह कुशवाह सबसे पहले साल 2003 में भाजपा से भिंड के विधायक बने। वर्ष 2008 में पार्टी ने उनका टिकट काट दिया। इस पर उन्होंने बगावत करते हुए समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ा। बीजेपी की हार हुई और कांग्रेस से चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी विजयी हुए।
2013 में भाजपा से चुनाव लड़कर वे दूसरी बार भिंड से विधायक बने। 2018 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उनका टिकट काटकर चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी को दिया तो नरेंद्र ने एक बार फिर बगावत की और समाजवादी पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरे।













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