बदरवास। बच्चों को परंपरा, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से जोड़ने हेतु मिट्टी के गणेश भगवान बनाने की प्रतियोगिता का आयोजन बदरवास के शासकीय कन्या हायर सेकंडरी स्कूल में गत दिनों किया गया था। छात्राओं को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से इस प्रतियोगिता में सम्मिलित होने वाली छात्राओं को अनंत चतुर्दशी पर पुरस्कार वितरण का भव्य कार्यक्रम शनिवार को आयोजित हुआ।छात्राओं ने अपनी अद्भुत रचनात्मकता और कला का परिचय देते हुए भगवान गणेश की विविध प्रतिमाएँ बनाईं, जिनमें कला,भक्ति और सामाजिक संदेश का सुंदर संगम देखने को मिला। प्रतियोगिता में विजेता एवं सभी सम्मिलित छात्राओं को सम्मानित कर पुरस्कृत किया गया।
गणेश उत्सव के अंतिम दिवस अनंत चतुर्दशी पर कन्या हायर सेकंडरी बदरवास में आयोजित इस प्रतियोगिता का उद्देश्य छात्राओं को व्यक्तित्व विकास,सामाजिक चेतना और ये प्रेरणा देना था कि धार्मिक आस्था और त्यौहार मनाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी हमारी है। मिट्टी के गणेश बनाने की प्रतियोगिता में छात्राओं ने मिट्टी के माध्यम से अपनी कला को जीवंत करते हुए सुंदर,मनमोहक, आकर्षक और अनोखी गणेश प्रतिमाएँ बनाईं।
प्रतियोगिता मैं कक्षा 9 एवं 10 की छात्राएं जूनियर ग्रुप तथा कक्षा 11 एवं 12 की छात्राओं को सीनियर ग्रुप में रखा गया। छात्राओं द्वारा बनाई गई मूर्तियां में से सीनियर और जूनियर दोनों ही ग्रुपों में से प्रथम,द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली और प्रतियोगिता में सम्मिलित सभी छात्राओं को पुरस्कृत किया गया।
प्रतियोगिता का मूल्यांकन में प्रतिमाओं को रचनात्मकता, कलात्मकता,स्वच्छता, संदेश और भक्ति भाव जैसे मानकों पर परखा। छात्राओं द्वारा बनाई गईं सुंदर प्रतिमाओं में से सीनियर ग्रुप में प्रथम राधिका प्रजापति ,द्वितीय सोनिया कुशवाह और तृतीय स्थान प्रगति श्रीवास्तव ने प्राप्त किया तथा जूनियर ग्रुप में प्रथम रोशनी जाटव, द्वितीय मोहिनी कुशवाह ,तृतीय स्थान पर रितिका कुशवाह रहीं। प्रथम, द्वितीय,तृतीय स्थान पर रहने वाली एवं प्रतियोगिता में सहभागी समस्त छात्राओं को प्रोत्साहित करते हुए आकर्षक पुरस्कार वितरित किए गए।
छात्राओं को प्रोत्साहित करते हुए शिक्षक गोविन्द अवस्थी ने कहा कि भगवान गणेश प्रथम पूज्य तथा बुद्धि और कला प्रदाता हैं। यदि हम उनकी पूजा मिट्टी से बनी प्रतिमाओं से करेंगे तो इससे हमारी आस्था भी सुदृढ़ होगी और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। छात्राओं ने यह सिद्ध किया है कि वे न केवल पढ़ाई में बल्कि कला और सामाजिक चेतना में भी आगे हैं।प्राचार्य चंद्रवीर सिंह सेंगर ने कहा कि छात्राओं की मेहनत और उनकी रचनात्मकता वाकई सराहनीय है।यह प्रतियोगिता केवल कला प्रदर्शन नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संकल्प है।कपिल परिहार ने कहा कि इस तरह की रचनात्मक और सामाजिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण प्रतियोगिताएँ छात्राओं में कला, संस्कृति और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति सजग करने का काम करती हैं।शिक्षक चंद्रभान श्रीवास्तव,ममता श्रीवास्तव, डॉ ममता यादव,उदयसिंह,राजेश मिश्रा ने छात्राओं की प्रतिभा की प्रशंसा करते हुए उन्हें भविष्य में और भी बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्रतियोगिता सभी प्रतिभागियों के लिए एक सीख है कि किस प्रकार हम अपनी परंपराओं को जीवित रखते हुए आधुनिक समस्याओं का समाधान भी कर सकते हैं।
पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में बसंती मिंज, विनीता कुशवाह, शशि गुप्ता, मिथलेश मीणा, राजेश मिश्रा, शैलेंद्र भदौरिया, हरवीर यादव, निर्मला शर्मा, दलवीर सिंह, हितेंद्र कुशवाह, नावेद अली, बलराम परिहार सहित बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद रहीं।













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