Responsive Ad Slot

Latest

latest

#धमाका_साहित्य_कॉर्नर: माॅ तेरे दरबार से खाली कौन गया: अरुण् अपेक्षित

बुधवार, 24 सितंबर 2025

/ by Vipin Shukla Mama
माॅ तेरे दरबार से खाली कौन गया?
माॅ तेरे उपकार से खाली कौन गया?

किसी ने अपनी झोली में पत्थर डाले,
किसी ने हीरे, मोती माणिक भर डाले,
कोई आकर किसी फूल पर रीझ गया,
कोई तुम्हारी पग धूली पर सर डाले,
कुछ न कुछ ले गया, जो आया द्वारे पर,
माॅ तेरे किस द्वार से खाली कौन गया ?

किसी ने तेरी सत्ता का ही गुण गाया 
किसी को तेरी सत्ता ने ही भरमाया
कोई तुम्हारी सत्ता से अंजान रहा, 
किसी ने तेरी सत्ता में सब कुछ पाया
कोई माने या ना माने पर सच है,
माॅ तेरे आभार से खाली कौन गया?

तेरा क्या है तू ने तो सौ बार दिया,
फटे हुये आंचल को सौ-सौ बार सिया
हम लोभी थे सदा हमारा कार्य यही
अपनी क्षमता से ज्यादा हर बार लिया,
धूल धूसरित हुआ मिला वर कंचन सा,
माॅ तेरे उपचार से खाली कौन गया । 

यश, वैभव बिखरा है घर के ताखों में,
इतना दिया  कि जितने सपने आंखों में
अगर छीनने पर आई तो यूं आई,
जो नरेश थे शेष रह गये राखों में
तू मांटी को स्वर्ण, स्वर्ण मांटी कर दे,
माॅ तेरे अधिकार से खाली कौन गया । 

माॅ तेरी इच्छा पर चांद सितारे हैं
माॅु तेरी इच्छा पर सिंधु किनारे हैं
पर्वत डूबे पर तिनके तर जाते  हैं
जो तेरी इच्छा के सदा सहारे हैं 
तू ने सबको प्राण दिये,रंग रूप दिया
मां तेरे श्रंगार से खाली कौन गया। 
अरुण् अपेक्षित
क्रोली, साउथ सेसेक्स, 
लंदन यू के 
24 सितंबर 2025
















कोई टिप्पणी नहीं

एक टिप्पणी भेजें

© all rights reserved by Vipin Shukla @ 2020
made with by rohit Bansal 9993475129