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#धमाका_डिफरेंट_खबर: पढ़िए "जनता की जुबानी" नपा के कर्णधारों से लेकर मंत्री जी की हीलाहवाली की खबर, हद कर दी आपने

शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2025

/ by Vipin Shukla Mama
शिवपुरी। किसी भी शहर के विकास की जिम्मेदारी नगर पालिका या नगर निगम की होती है और लोग इसीलिए अपने मनपसंद का प्रतिनिधि चुनकर लाते हैं लेकिन विकास को भूलकर जन प्रतिनिधि भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाएं, मामला ओपन भी हो जाए लेकिन तब भी सजा न मिले और दूसरी तरफ बाकी के पार्षद पोल खोल अभियान में जुट जाएं और वार्डों के काम न हों तो सोचिए जनता पर क्या गुजरेगी। बात शिवपुरी नगर पालिका की है और हालात ठीक ऐसी ही है जिसके चलते शहर के विकास पर ग्रहण लग गया है। ऊपर से बड़े नेताओं ने ठोस करवाई न करते हुए सिर्फ बयानबाजी की रट लगा रखी है जिससे जनता बेहद गुस्से में है और सोशल प्लेटफॉर्म पर खुलकर विरोध प्रकट कर रही है। ताजा मामला बीते रोज शिवपुरी आए प्रभारी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का है जिन्होंने हर बार की तरह देखते जाएं कारवाई होगी, जांच होने दो नतीजा सामने आएगा, हम मिलकर विकास करेंगे जैसी बात कहीं, साथ ही सीएमओ को छुट्टी पर चले जाने की नसीहत दी और चलते बने तो नगर में इस बात की तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
आज शुक्रवार को सोशल प्लेटफॉर्म पर लोगों ने जमकर भड़ास निकाली जिसे हम आपके लिए लेकर आए हैं, पढ़िए जन भावना।
पत्रकार परवेज खान ने मंत्री जी का इंटरव्यू साझा किया और नीचे लिखा
नगर पालिका बनी हुई है भ्रष्टाचार का अड्डा  और शहर को बना रखा है कूड़ा दान, सिद्ध होने के बाद भी दोषियों को  मिल रहा सरक्षंण, इधर मंत्री जी का फिर वही पुराना राग  "दोषी बचेंगे नही"।
एडवोकेट संजीव बिलगैया ने कहा
शिवपुरी-आलाकमान चाहे तो व्यवस्था सुधार कर दोषियों को हटाने का शुभ कार्य भी कर दे !परंतु सब कुछ प्लानिंग से चल रहा है, हर बार नया एपिसोड और नई कहानी! स्थानीय नेताओं के विरोध स्वर में साइलेंसर लगा!
कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष विजय सिंह चौहान ने कहा
सरकार की इच्छा शक्ति पर सारे कार्यकलाप चलते हैं इसलिए दोष अकेले प्रभारी मंत्री को देना वह भी ठीक नहीं, फिर स्थानीय सांसद जी भी कुछ नहीं कर सकते, क्योंकि पार्टी की पॉलिसी नहीं है निर्वाचित जनप्रतिनिधि की बदलने की, चाहे वह कितना बड़ा दोषी क्यों न हो। इसलिए यह निर्णय तो पार्टी को और सरकार को लेना है।
एडवोकेट अनिल व्याघ्र ने कहा
कुछ नहीं हो सकता हमारे शहर का क्योंकि माननीय प्रभारी मंत्री की दृढ़ इच्छा शक्ति है ही नहीं।
जितेंद्र रघुवंशी ने कहा
प्रभारी मंत्री जी चाहे तो खुद ही एक पत्र लिखकर उन्हें छुट्टी पर भेज सकते हैं।
अभिषेक शर्मा ने कहा 
मंत्री जी खोद तो कुछ कर नहीं पा रहे, एक दो डायलॉग देकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा जाते हैं।
होटल संचालक ध्रुव शर्मा ने कहा
सीएमओ काम नहीं कर  रहे और प्रभारी मंत्री भी अपने आदेश का पालन नहीं करवा पा रहे .... अब छुट्टी पर किसे जाना चाहिए?
सनद रहे नेताजी
उपरोक्त भावना जनता की हैं जिनकी लगातार अनदेखी की जा रही है। शहर में विकास रह रहकर कराह रहा है। सीसी सड़क न बनने से लेकर मड़ीखेड़ा लाइन बिछाने के नाम पर सड़कों को उधेड़ कर छोड़ दिया है। अंधकार नपा का परम धर्म है आखिर जनता का क्या दोष, उस पर दोषियों को अपने वाहन में लादकर घूमना जनता को रास नहीं आ रहा। अगर जल्द ही कोई ठोस हल नहीं निकला तो आने वाले चुनाव में इसकी गूंज परिणाम के तौर पर सुनाई देगी!

















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