1905 में महाराजा माधवराव सिंधिया द्वारा प्रारंभ किया गया यह मेला स्थानीय कारीगरों और व्यापारियों को मंच देने के उद्देश्य से शुरू हुआ था। आज यह एशिया के सबसे बड़े और विश्व-प्रसिद्ध व्यापार मेलों में शामिल होकर ग्वालियर-चंबल अंचल की आर्थिक, औद्योगिक और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित कर चुका है।"











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