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#धमाका_डिफरेंट: 8–9 डिग्री की कंपकंपाती ठंड में उम्मीद की गरमाहट

शनिवार, 10 जनवरी 2026

/ by Vipin Shukla Mama
* 400 से अधिक आदिवासी बच्चों को मिला सर्दी से सुरक्षा का तोहफ़ा
* एसएमएस एनजीओ और नीरांजलि की मानवीय साझेदारी
* मिडास कैपिटल के सहयोग से बदली बच्चों की सर्द रातें
शिवपुरी। जब पारा 8 से 9 डिग्री सेल्सियस तक गिर चुका था और सर्द हवा मासूम शरीरों को कंपा रही थी, तब शिवपुरी ब्लॉक के अत्यंत पिछड़े आदिवासी बहुल क्षेत्रों — मामोनी खुर्द (150 बच्चे), सतनवाड़ा आदिवासी बस्ती (100 बच्चे) और चीटोरी  खुर्द (150से अधिक बच्चे) — के  400 से अधिक बच्चे ठंड से जूझ रहे थे। ऐसे कठिन समय में शक्ति शाली महिला संगठन समिति ने नीरांजलि – पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक कल्याण संस्था के सहयोग से तथा मिडास कैपिटल के आर्थिक समर्थन से एक करुणामयी पहल करते हुए इन बच्चों को ऊनी इनर, पजामा और टोपी वितरित की।
यह सिर्फ कपड़ों का वितरण नहीं था — यह उन मासूमों के लिए सुरक्षा की ढाल, उनके माता-पिता के लिए सुकून की सांस, और समाज के लिए मानवता की जीत थी।
ठंड से सिकुड़े चेहरों पर जब मुस्कान लौटी, तो हर आंख ने महसूस किया कि सच्ची सेवा वही है जो किसी का दर्द कम कर दे। इस अवसर पर नीरांजलि की संस्थापक श्रीमती सारिका बाहेती जी ने भावुक स्वर में कहा 8–9 डिग्री की इस कड़ाके की ठंड में छोटे बच्चों के लिए सर्दी सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा बन जाती है। हमारा संकल्प है कि कोई भी बच्चा ठंड के कारण बीमार न पड़े, स्कूल से दूर न हो और खुद को असहाय महसूस न करे। इसलिए हमने उन्हें पूरा ऊनी सेट देकर यह भरोसा दिया है कि वे अकेले नहीं हैं।”
वहीं शक्ति शाली महिला संगठन समिति की ओर से रवि गोयल ने अभिभावकों से आग्रह करते हुए कहा —
“आपके बच्चों की सेहत ही उनके सपनों की नींव है। कृपया उन्हें दिए गए ऊनी इनर और टोपी का नियमित उपयोग कराएँ। हमारी संस्था का उद्देश्य केवल राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि हर बच्चे के दिल में यह विश्वास जगाना है कि समाज उनके साथ खड़ा है — हर ठंड, हर मुश्किल में। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने समाज के सभी जागरूक नागरिकों, दानदाताओं और संस्थाओं से भावनात्मक अपील की कि वे आगे आएं और ऐसे मानवीय अभियानों का हिस्सा बनें, ताकि कोई भी बच्चा सर्दी, बीमारी या अभाव के कारण अपने सपनों से समझौता करने को मजबूर न हो।
क्योंकि जब समाज साथ खड़ा होता है, तो सबसे ठंडी रात भी बच्चों के लिए उम्मीद की सुबह बन जाती है।











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