बता दें कि, ग्वालियर स्थित चिरायु फार्मास्युटिकल्स के उत्पाद चिरायु और चिरायु पोषक की बिक्री पिछले कुछ समय से मध्य भारत में अचानक गिरने लगी थी, जबकि बाजार में इन दवाओं की उपलब्धता बनी हुई थी। इसी विरोधाभास ने कंपनी को सतर्क किया। आंतरिक जांच में सामने आया कि चिरायु पोषक की हू-ब-हू नकल तैयार कर उसे असली बताकर बेचा जा रहा है। ये नकली दवा शिवपुरी के कुछ आयुर्वैदिक डॉक्टरों की मिलीभगत से लिखी जाकर विक्रय की जा रही थीं। नकली दवा इतनी मिलती-जुलती थी कि बोतल के निचले हिस्से और घटिया गुणवत्ता से ही फर्क पकड़ा जा सकता था।
जांच में पता चला कि मंजीत दहल, योगेश दहल और आशीष शिवहरे बिना औषधि लाइसेंस के नकली दवा तैयार कर रहे थे और इसे जबलपुर, ग्वालियर और शिवपुरी के नेटवर्क के जरिए बाजार में उतारा जा रहा था।
आरोप है कि जबलपुर की मेसर्स खुन्नेलाल एंड कंपनी, भटेजा एजेंसी और शिवपुरी के सुषमा मेडिकल स्टोर सहित अन्य माध्यमों से यह डुप्लीकेट दवा सप्लाई की जा रही थी, जिससे असली कंपनी के उत्पाद की बिक्री प्रभावित हो रही थी और उपभोक्ताओं की सेहत भी खतरे में पड़ रही थी। मामला सामने आने के बाद चिरायु फार्मास्युटिकल्स ने पहले कानूनी नोटिस भेजकर नकली दवा का निर्माण और बिक्री बंद करने को कहा। जवाब में कुछ व्यापारियों ने लिखित तौर पर तीन लोगों को इस पूरे अवैध कारोबार का मास्टरमाइंड बताया। इसके बावजूद नकली दवा का कारोबार जारी रहा, तो कंपनी ने ग्वालियर की कॉमर्शियल कोर्ट, जिला न्यायालय ग्वालियर का रुख किया।
न्यायालय ने मामले को गंभीर मानते हुए 24 दिसंबर 2025 को नकली चिरायु और चिरायु पोषक के निर्माण व बिक्री पर अस्थायी रोक लगा दी। साथ ही कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर पुलिस बल के साथ संबंधित प्रतिष्ठानों पर छापे मारने, वीडियोग्राफी-फोटोग्राफी कराने और नकली उत्पाद जब्त करने के आदेश दिए। इसी आदेश के तहत शिवपुरी में सुषमा मेडिकल स्टोर पर छापा डाला गया। कार्रवाई के दौरान नकली आयुर्वेदिक दवाएं जब्त कर उनकी इन्वेंट्री बनाई गई और आगे की कार्रवाई के लिए दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत किए गए।











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