Bhind भिंड। परशुराम मंदिर में पिछले 33 वर्षों से प्रतीक्षित संकल्प का सपना पूरा हुआ। मंदिर परिसर में लंबे समय से प्रतीक्षारत भगवान शिव के संपूर्ण परिवार की प्राण प्रतिष्ठा आखिर संपन्न गई। इस अवसर पर ब्राह्मण समाज के कर्मठ और जुझारू स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय पंडित लक्ष्मी नारायण शर्मा की प्रतिमा का अनावरण भी किया गया। आयोजित धार्मिक एवं सामाजिक कार्य दंदरौआ सरकार के महंत रामदास महाराज के करकमलों से संपन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान कालिदास महाराज, चिलोंगा महाराज, गुड्डू महाराज, पूर्व मंत्री गिर्राज दंडोतिया, पूर्व मंत्री राकेश चतुर्वेदी सहित बड़ी संख्या में संत और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
बायपास रोड स्थित भगवान परशुराम मंदिर में आयोजन के दौरान विधि-विधान के साथ भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश कऔर कार्तिकेय की प्राण प्रतिष्ठा कराई गई। मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपत्र हुए इस कार्यक्रम ने श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह का माहौल बना दिया।
प्रतिमा का हुआ अनावरण
इसके साथ ही स्वर्गीय पंडित लक्ष्मी नारायण शर्मा की प्रतिमा का अनावरण कर समाज ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। बता दें कि स्वर्गीय पं. लक्ष्मी नारायण शर्मा ब्राह्मण समाज के प्रमुख संरक्षक और समाजसेवी के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने समाज के उत्थान और संगठन के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए। अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के गठन में भी उनकी अहम भूमिका रही थी। इस कार्य में स्वर्गीय परशुराम कटारे का भी उन्हें सहयोग मिला था। दोनों ने गांव-गांव पैदल और साइकिल से भ्रमण कर समाज को संगठित करने का कार्य किया था। उनके यह प्रयास समाज हित में सफल साबित हुए। इस अवसर पर पूर्व विधायक संजीव सिंह, शशिकांत शर्मा, उमा शर्मा, रमेश दुबे, ओमप्रकाश पुरोहित, भगवान दास बाबा, सतीश जोशी, अमित दांतरे उर्फ पिंकी, देवेश शर्मा सोनू, सुनील चौधरी, जगदम्बा शर्मा, सुनील त्रिपाठी सहित अन्य विप्र बंधु उपस्थित रहे।
(परशुराम मंदिर में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की प्रतिमा के लोकार्पण के अवसर पर मौजूद विप्रजन व संत।)
युवाओं को शिक्षित करने का लिया संकल्प
स्वर्गीय लक्ष्मीनारायण शर्मा ने समाज के युवाओं के भविष्य निर्माण को लेकर एक बड़ा संकल्प लिया था। उन्होंने जिले भर में भ्रमण करते हुए समाज से एक-एक रुपए का सहयोग एकत्र किया और जमीन खरीद कर यहां भगवान परशुराम की प्रतिमा स्थापित की थी। इसके साथ ही परिसर और में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए छात्रावास निर्माण सपना देखा। उद्देश्य था कि समाज के गरीब जरूरतमंद विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए उचित व्यवस्था मिल सके। छात्रावास निर्माण के दौरान ही उनका असमय सड़क दुर्घटना में निधन हो गया।
परिजनों ने की सहभागिता
स्वर्गीय लक्ष्मीनारायण शर्मा के असमय निधन के बाद उनके अधूरे संकल्प को उनके परिजनों द्वारा पूरा करने की जिम्मेदारी ली गई। इसके साथ उनकी स्मृति को जीवित रखने और उनके कार्यों को सम्मान देने के लिए उनकी प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया था। लगभग 33 साल बाद राजौरिया परिवार के सहयोग से मंदिर परिसर में भगवान शिव परिवार की प्राण प्रतिष्ठा करने के साथ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लक्ष्मी नारायण शर्मा की प्रतिमा स्थापित कर यह संकल्प पूरा किया गया।
ये बोली परिवार की बहु उमा
भगवान परशुराम छात्रावास निर्माण में अपने तन, मन ओर धन की आहुति देने वाले हमारे ससुरजी पंडित लक्ष्मीनारायण शर्मा स्वतंत्रता सेनानी एवं मीसा बंदी की स्मृति में भवन का लोकार्पण एवं शिवपरिवार की स्थापना का सौभाग्य ईश्वर कृपा से प्राप्त हुआ। ये हमारे परिवार के लियभावुक ओर गौरव पूर्ण महसूस करने का समय है। महापुरुषों को सम्मान देना हमारी संस्कृति और संस्कार है।














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