Responsive Ad Slot

Latest

latest

#धमाका_न्यूज: इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ होम्योपैथिक फिजिशियन शिवपुरी ने मनाया विश्व होम्योपैथी दिवस

सोमवार, 13 अप्रैल 2026

/ by Vipin Shukla Mama
*मरीज के लिए सुरक्षित है होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति : डॉक्टर प्रमोद बिंदल
शिवपुरी। इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ होम्योपैथिक फिजिशियन द्वारा विश्व होम्योपैथिक दिवस पर होम्योपैथी के जनक डॉक्टर सैमुअल हैनिमैन की जयंती का कार्यक्रम वरिष्ठ चिकित्सक डॉ प्रमोद विंदल के निवास महल कॉलोनी श्री बृज धाम पर रखा गया जिसमें डॉक्टर हैनीमैन के जीवन पर प्रकाश डाला गया एवं होम्योपैथी के विषय पर संवाद किया गया इस अवसर पर शिवपुरी शहर के होम्योपैथिक चिकित्सा का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ कार्यक्रम में आईएसपी जिला अध्यक्ष डॉक्टर गोपाल दंडोतिया ने बताया की होम्योपैथिक की शुरुआत 1976 में डॉक्टर सैमुअल हैनीमैन द्वारा जर्मनी में की गई थी विश्व के कई देशों में इसका उपयोग होता है लेकिन भारत अग्रणी है यह एलोपैथिक एवं आयुर्वेद की तरह एक चिकित्सक चिकित्सा सुविधा देती है  जिला अध्यक्ष डॉ गोपाल दंडोतिया ने बताया कि पहला विश्व होम्योपैथिक दिवस 10 अप्रैल 2005 को बनाया गया था हर साल विश्व होम्योपैथिक दिवस की एक खास थीम के तहत सेलिब्रेट किया जाता है इस साल की थीम है "दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी" चिकित्सा विज्ञान में तथा रोगियों को ठीक करने के लिए होम्योपैथी विश्व में प्रयोग की जाने वाली दूसरे नंबर की सबसे बड़ी पैथीं है गंभीर एवं असाध्य बीमारियों को जड़ से ठीक करने के साथ बिना किसी प्रतिकूल प्रभाव के कार्य करती है    होम्योपैथिक चिकित्सा सुरक्षित चिकित्सा पद्धति है -डॉ प्रमोद विंदल
 कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर प्रमोद बिंदल ने कहा कि होम्योपैथिक चिकित्सा सुरक्षित चिकित्सा पद्धति है इसकी आदत नहीं पड़ती यह गर्भवती, स्तनपान करने वाली महिलाओं, बच्चों एवं वृद्ध जनों के लिए सुरक्षित है यह मधुमेह में भी ले सकते हैं यह इस विश्वास पर चलती है कि मरीज खुद को ठीक कर सकता है हर व्यक्ति के अंदर एक जीवनी शक्ति होती है जिसे वाइटल फोर्स कहते हैं उस जीवनी शक्ति से ठीक रहने से रोग स्वतः समाप्त हो जाते हैं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ प्रमोद विंदल नें कहा कि प्रत्येक चिकित्सक को अपने पेशे के साथ पीड़ित मानवता की सेवा का भाव लेकर कार्य करना चाहिए चिकित्सक को ईश्वर के बाद सबसे अधिक सम्मान प्राप्त होता है और हमें अपने पेशे के साथ हमेशा सेवा भाव रखना चाहिए 
आयुर्वेद की तरह तीन मियाज्म- डॉ. राकेश राठौर           आईआईऐचपी के जिला उपाध्यक्ष डॉ राकेश राठौर ने बताया कि आयुर्वेद की तरह तीन मियाज्म होते हैं आयुर्वेद पद्धति में बीमारी के कारण त्रिदोष बताए गए हैं इसी तरह होम्योपैथी में भी तीन मियाज्म हैँ शोरा,सिफलिस एवं साइकोसिस को बताया गया है जब तक बीमारी की जड़ को ठीक नहीं किया जाता है बीमारी को नहीं हटाया जा सकता है होम्योपैथी में बीमारी को जड़ से ठीक किया जाता है इसलिए इन तीनों मियाज्म के मरीज को चिन्हित कर उचित दवा प्रदान की जाती है.              
दुष्प्रभाव रहित है होम्योपैथिक चिकित्सा -निर्पेंद्र रघुवंशी        आईआई एचपी के जिला सचिव डॉ नृपेंद्र रघुवंशी ने बताया की होम्योपैथिक की चिकित्सा पद्धति में किसी भी तरह के दुष्परिणाम नहीं आते हैं मरीज को इसकी इसमें घबराने की आवश्यकता नहीं है यह भ्रांति है कि यह पहले रोग को बढ़ाती है लेकिन यह गलत है यह सुरक्षित व कारगर चिकित्सा पद्धति है  विश्व होम्योपैथिक दिवस के अवसर पर डॉ प्रमोद बिंदल,डॉक्टर गोपाल दंडोतिया, डॉ राकेश राठौर,डॉ नृपेंद्र रघुवंशी, डॉ वीरेंद्र वर्मा, डॉ रामकुमार गुप्ता आदि चिकित्सक उपस्थित हुए।

कोई टिप्पणी नहीं

एक टिप्पणी भेजें

© all rights reserved by Vipin Shukla @ 2020
made with by rohit Bansal 9993475129