Responsive Ad Slot

Latest

latest

#धमाका_दुखद_खबर: बस जल रही थी, बेटे को अभिषेक खो चुके थे इसी बीच जब मीडिया साथी मौके पर पहुंचे तो अभिषेक ने रोते रोते कहा, "मीडिया आप बिक मत जाना, मेरा मीडिया से ये कहना है कि कम से कम इतना तो करवा दो की ये हादसे फिर न हो, मैने तो अपना भविष्य खो दिया लेकिन आगे कभी किसी का भविष्य न जले, मेरा 4 साल का बेटा जिंदा जल गया", मासूम अनय की रविवार की सुबह शिवपुरी मुक्तिधाम में उठावनी होगी, देखिए कलेजे को चीरती अभिषेक की करुण पुकार, video, साथ ही देखिए खामियां और क्या सुधार आवश्यक विस्तृत खबर सिर्फ धमाका न्यूज शिवपुरी पर

शनिवार, 16 मई 2026

/ by Vipin Shukla Mama
शिवपुरी। पूरी तरह फैल सिस्टम का नतीजा है शुक्रवार शनिवार की देर रात शाजापुर के पास हुआ इंटरसिटी ट्रेवल्स अग्निकांड जिसमें सवार अपने मासूम सुपुत्र अनय जैन के असमय काल के मुंह में समाने के वियोग में दुखी पिता CA अभिषेक जैन की करुण पुकार रह रहकर कलेजा चीर रही है। सोचिए इस पिता पर क्या गुजरी होगी जिसने अपने परिवार की सुध भूलकर अन्य यात्रियों की जान बचाई। लोग तमाशबीन बने video शूट करते रहे लेकिन इसी बीच आग का गोला बनी बस में मासूम की चिता धधक उठी। जब मिली तो पहले हितेचि से बस काटनी पड़ी और तब अनय कंकाल के रूप में मिला। शिवपुरी के मुक्तिधाम में रविवार सुबह मासूम की उठावनी रखी गई है। 
इधर वो "वीडियो" झकझोर देने वाला है जिसमें अभिषेक जैन अपने दुख से अधिक भविष्य में ऐसे हादसे रोकने की विनती कर रहा है।
सुनिए आंखों को भिगो देने वाले बोल...
बस जल रही थी, बेटे को अभिषेक खो चुके थे इसी बीच जब मीडिया साथी मौके पर पहुंचे तो अभिषेक ने रोते रोते कहा,  "मीडिया आप बिक मत जाना, मेरा मीडिया से ये कहना है कि कम से कम इतना तो करवा दो की ये हादसे फिर न हो, मैने तो अपना भविष्य खो दिया लेकिन आगे कभी किसी का भविष्य न जले, मेरा 4 साल का बेटा जिंदा जल गया। इस बस में न पीछे गेट था, न अग्निशमन, कांच तोड़ने का कोई इंतजाम भी नहीं था, फेल सिस्टम की भेंट चढ़ गया मेरा बेटा अनय जैन"।
एक दुखी पिता की करुण पुकार क्या पहुंचेगी पत्थर दिल सरकार के कानों तक
आखिर कैसे सड़कों पर दौड़ रही हैं मौत की गारंटी देती वीडियो कोच बसें, इन्हीं हादसों के चलते विदेशों में लग चुका है वैन लेकिन हमारे देश में पैसे की खनक के सामने बौनी हुईं सरकार, आखिर कब तक जिंदा जलेंगे लोग ? बसों में कब लगेंगे 2 गेट और अग्निशमन यंत्र पूछती है आवाम।
वास्तव में यह एक अत्यंत हृदयविदारक घटना है, और अपने 4 साल के मासूम बेटे अनय को खोने वाले पिता अभिषेक जैन का दर्द पूरी तरह से झकझोर देने वाला है। एक पिता का यह पूछना बिल्कुल जायज है कि नियमों की अनदेखी के कारण आखिर कब तक मासूम जिंदगियां यूं ही खत्म होती रहेंगी।
ऐसी दुर्घटनाएं स्पष्ट रूप से परिवहन सुरक्षा प्रणालियों (Transport Safety Systems) और नियमों के लागू होने में गंभीर कमियों को उजागर करती हैं।
बसों में सुरक्षा के अनिवार्य नियम और वास्तविकता भारत में कमर्शियल बसों के लिए सुरक्षा मानक (जैसे Central Motor Vehicles Rules) तय हैं, लेकिन जमीन पर उनका पालन न होना ही बड़े हादसों का कारण बनता है:
आपातकालीन निकास (Emergency Exits): नियमों के मुताबिक हर बस में पीछे या दाईं तरफ एक स्पष्ट इमरजेंसी गेट या टूटने वाली बड़ी कांच की खिड़की (Safety Glass) होनी चाहिए।
ग्लास ब्रेकिंग हैमर (Glass Hammers): आपात स्थिति में शीशा तोड़ने के लिए खिड़कियों के पास लाल रंग के विशेष हथौड़े लगे होने अनिवार्य हैं।
अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguishers): बस में ड्राइवर की सीट के पास और यात्रियों की पहुंच में चालू हालत वाले फायर एक्स्टिंग्विशर होने चाहिए।
विदेशों में कड़े नियम :
कई विकसित देशों में बसों के निर्माण (Bus Body Code) और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर जीरो-टॉलरेंस की नीति है:
* वहां बसों में दो नियमित दरवाजों के अलावा छत पर भी निकास (Roof Hatches) होते हैं।
* इंजनों में ऑटोमैटिक फायर सप्रेशन सिस्टम (Automatic Fire Suppression Systems) लगे होते हैं जो आग लगते ही खुद ब खुद एक्टिव हो जाते हैं।
* फिटनेस सर्टिफिकेट और सेफ्टी ऑडिट के बिना किसी भी कमर्शियल गाड़ी को सड़क पर उतरने की अनुमति नहीं होती।जवाबदेही और बदलाव की जरूरत जनता और पीड़ित परिवारों का यह आक्रोश पूरी तरह न्यायसंगत है। इस फेल सिस्टम को सुधारने के लिए केवल कागजी नियम नहीं, बल्कि इन सख्त कदमों की जरूरत है:
कड़ा भ्रष्टाचार विरोधी रुख
अनफिट बसों को फिटनेस सर्टिफिकेट देने वाले अधिकारियों और आरटीओ (RTO) पर सीधी कानूनी कार्रवाई हो।
डिजिटल चेकिंग
बसों में सुरक्षा उपकरणों की जांच के लिए औचक निरीक्षण (Surprise Inspections) और कैमरे आधारित चेकिंग हो।
कड़ा जुर्माना और परमिट रद्दीकरण: नियमों का उल्लंघन करने वाले बस ऑपरेटरों के लाइसेंस और परमिट तुरंत रद्द किए जाएं। 
वीडियो कोच बसों में सवारी से ज्यादा कमाई के लिए छत और फर्श के नीचे भारी कार्गो लादना और मूल वायरिंग (original wiring) से छेड़छाड़ करना बस हादसों और आग लगने का सबसे बड़ा कारण बनता है।
अतिरिक्त भाड़ा कमाने के चक्कर में की गई यह लापरवाही यात्रियों की जान को गंभीर खतरे में डालती है। इसके मुख्य दुष्परिणाम और कारण नीचे दिए गए हैं:
शॉर्ट सर्किट और आग का खतरा (Wiring Tampering)
अवैध कनेक्शन: बसों में एक्स्ट्रा लाइटें, हैवी म्यूजिक सिस्टम, चार्जिंग पॉइंट और AC मॉडिफिकेशन के लिए मूल वायरिंग को काटा-छांटा जाता है।
घटिया क्वालिटी के तार:
 बिना सुरक्षा मानकों (ISI मार्क) के लोकल मैकेनिकों से वायरिंग कराई जाती है।
ओवरलोडिंग
अतिरिक्त बिजली उपकरणों के कारण तारों पर लोड बढ़ता है, जिससे वे गर्म होकर पिघल जाते हैं और शॉर्ट सर्किट से आग लग जाती है।
अनियंत्रित संतुलन और पलटने का जोखिम (Cargo Overloading)
सेंटर ऑफ ग्रेविटी बिगड़ना
छत पर भारी सामान (जैसे बाइक, लोहे के बक्से या व्यावसायिक माल) लादने से बस का संतुलन (Center of Gravity) ऊपर की तरफ खिसक जाता है।
पलटने का खतरा
तेज मोड़ पर या अचानक ब्रेक लगाने पर बस बहुत जल्दी अनियंत्रित होकर पलट जाती है।
ब्रेक फेल होना: फर्श के नीचे (डिक्की में) क्षमता से अधिक भारी कार्गो भरने से गाड़ी का कुल वजन तय सीमा से बहुत ज्यादा हो जाता है, जिससे इमरजेंसी में ब्रेक काम करना बंद कर देते हैं।
3. आग फैलने की तेज रफ्तार और दम घुटना ज्वलनशील सामान
कार्गो में कई बार चोरी-छिपे सिंथेटिक कपड़ा, प्लास्टिक, या रासायनिक सामान ले जाया जाता है जो आग को तेजी से भड़काता है।
रास्ते ब्लॉक होना
अतिरिक्त सामान कभी-कभी बस के आपातकालीन द्वारों (Emergency Exits) के सामने रख दिया जाता है, जिससे दुर्घटना के समय यात्रियों को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिलता।जहरीला धुआं
वायरिंग और कार्गो के जलने से निकलने वाला गाढ़ा, जहरीला धुआं यात्रियों को चंद सेकंड में बेहोश कर देता है।
भारत सरकार के मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम और केंद्रीय मोटर वाहन नियमों (CMVR) के अनुसार यात्री सुरक्षा से समझौता करने वाली बसों पर बहुत कड़े जुर्माने और सुरक्षा नियम लागू किए गए हैं। तीन प्रश्नों के सटीक कानूनी और व्यावहारिक जवाब नीचे दिए गए हैं:
ओवरलोडिंग और अवैध वायरिंग पर RTO के कानूनी जुर्माने कार्गो ओवरलोडिंग (सामान का अतिरिक्त भार): यदि बस की छत या डिक्की में तय सीमा से अधिक कमर्शियल माल लादा जाता है, तो न्यूनतम ₹20,000 का बेस जुर्माना लगाया जाता है। इसके साथ ही हर एक अतिरिक्त टन वजन के लिए ₹2,000 प्रति टन का अतिरिक्त जुर्माना वसूला जाता है और माल को तुरंत अनलोड कराया जाता है।
सवारी ओवरलोडिंग (तय क्षमता से अधिक यात्री): बस की आरसी (RC) में दर्ज क्षमता से अधिक सवारी बैठाने पर ₹200 प्रति अतिरिक्त सीट/यात्री का जुर्माना लगता है।
अवैध वायरिंग और मॉडिफिकेशन
बिना अनुमति के ओरिजिनल वायरिंग से छेड़छाड़ करने या लोकल वर्कशॉप से बस बॉडी मॉडिफाई कराने पर गाड़ी का फिटनेस सर्टिफिकेट और रजिस्ट्रेशन (RC) तुरंत निरस्त (Cancel) कर दिया जाता है। आरटीओ द्वारा बस को सीज (जब्त) भी किया जा सकता है।
2. बसों में फायर एक्स्टिंगुइशर और इमरजेंसी एग्जिट के नियमसड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) के AIS-135 और AIS-153 मानकों के तहत सभी यात्री और स्लीपर बसों के लिए नियम बहुत कड़े हैं।
इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन द्वार) का नियम:हर बस में कम से कम 4 इमरजेंसी एग्जिट होने अनिवार्य हैं (जिसमें 1 मुख्य आपातकालीन दरवाजा, 2 रूफ हैच यानी छत के रास्ते और 1 अतिरिक्त एग्जिट शामिल हैं)।
आपातकालीन निकास के रास्तों (Passageway) की चौड़ाई कम से कम 450 mm होनी चाहिए ताकि लोग आसानी से निकल सकें।
आपातकालीन द्वारों की आंतरिक सीमा पर रेट्रो-रिफ्लेक्टिव (चमकदार) टेप लगी होनी चाहिए ताकि अंधेरे या धुएं में भी रास्ता दिख सके।
फायर एक्स्टिंगुइशर (अग्निशामक यंत्र) का नियम:बस में कुल मिलाकर न्यूनतम 10 किलोग्राम क्षमता के अग्निशामक सिलेंडर होने चाहिए। इन्हें केवल ड्राइवर के पास नहीं, बल्कि बस के अंदर अलग-अलग सुलभ जगहों पर रखना अनिवार्य है।
ग्लास ब्रेकिंग हैमर (हथौड़ा): आपातकालीन खिड़कियों के शीशे तोड़ने के लिए हर बर्थ/सीट के पास लोहे के विशेष लाल रंग के हथौड़े टंगे होना कानूनी रूप से अनिवार्य है।फायर अलार्म सिस्टम (FDSS): सभी नई स्लीपर और लंबी दूरी की बसों के यात्री केबिन में फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम (FDSS) और अलार्म अनिवार्य किया गया है जो धुआं उठते ही पानी की बौछार या अलार्म शुरू कर देता है।
3. यात्री के तौर पर आपको किन सुरक्षा बातों की जांच करनी चाहिए?सफर शुरू करने से पहले एक जागरूक यात्री के नाते बस में इन 4 मुख्य बातों की जांच अवश्य करें:
आपातकालीन हैमर (Hammers) की मौजूदगी: देखें कि क्या खिड़कियों के पास लगे लाल हथौड़े अपनी जगह पर मौजूद हैं या गायब हैं।रास्तों की रुकावट (Blocked Passageways): ध्यान दें कि बस के बीच का रास्ता (गैलरी) या इमरजेंसी गेट के ठीक सामने कोई कार्गो, भारी बैग या एक्स्ट्रा सीटें लगाकर रास्ता ब्लॉक तो नहीं किया गया है।
फायर एक्स्टिंगुइशर और उसकी एक्सपायरी: ड्राइवर के केबिन और बस के पिछले हिस्से में अग्निशामक सिलेंडर की जांच करें। सुनिश्चित करें कि उसका प्रेशर मीटर 'हरे निशान' पर हो और वह एक्सपायर्ड न हो।स्पार्क या जलने की गंध: यदि बस के केबिन में कहीं से भी तारों के जलने की गंध आ रही हो, या कोई अनधिकृत हैवी लाइट/म्यूजिक सिस्टम लगा दिखे, तो तुरंत ड्राइवर से आपत्ति जताएं या सफर करने से बचें।













कोई टिप्पणी नहीं

एक टिप्पणी भेजें

© all rights reserved by Vipin Shukla @ 2020
made with by rohit Bansal 9993475129