पुलिस का पक्ष:
पुलिस के अनुसार, युवती डीएनए टेस्ट से बचने के लिए झूठे आरोप लगा रही है। अधिकारियों का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया (पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म के मामले) के तहत बच्चे, युवती और युवक तीनों का डीएनए परीक्षण अनिवार्य है।
मामले की पृष्ठभूमि:
दिसंबर 2024 में नाबालिग के लापता होने पर अपहरण और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था। लगभग एक महीने पहले पुलिस ने युवती को नवीन राठौर के साथ बरामद किया। युवती के गर्भवती होने के कारण नवीन पर दुष्कर्म की धाराएं बढ़ाई गईं और उसे जेल भेज दिया गया। नवीन राठौर को 27 अप्रैल को जमानत मिली। युवती का दावा है कि वह अब बालिग है, जबकि पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसकी जन्मतिथि वर्ष 2011 है, जो उसे अभी भी नाबालिग साबित करती है।
हंगामे का कारण:
युवती और उसका साथी (नवीन राठौर) अपने 15 दिन के नवजात बच्चे के DNA टेस्ट का विरोध कर रहे थे। हंगामे के दौरान उन्होंने बच्चे को जमीन पर तक रख दिया था।
मारपीट के आरोप:
युवती ने सिटी कोतवाली में पदस्थ सब इंस्पेक्टर भावना राठौर पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि पुलिस वाहन में ले जाते समय उसके पेट में लात मारी गई और उसके साथ मारपीट की गई।
वर्तमान स्थिति:
एसडीओपी संजय चतुर्वेदी और कोतवाली टीआई रोहित दुबे द्वारा वकील की उपस्थिति में कानूनी प्रक्रिया समझाने के बाद, जोड़ा डीएनए जांच के लिए सहमत हो गया है।













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