इच्छा के विपरीत समाज के आग्रह के आगे झुके कोचेटा
इस चुनाव की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि राजेश कोचेटा पिछले दो दशकों से इस जिम्मेदारी को संभाल रहे थे और इस बार उन्होंने स्वेच्छा से पदमुक्त होने की इच्छा जताई थी। वे चाहते थे कि समाज का कोई नया चेहरा इस जिम्मेदारी को संभाले। हालांकि, समाज के सदस्यों ने उनके पिछले रिकॉर्ड और निष्पक्ष कार्यशैली को देखते हुए उनके इस फैसले को स्वीकार नहीं किया। सभी सदस्यों के
सर्वसम्मत और भावुक आग्रह के आगे अंततः उन्हें अपना निर्णय बदलना पड़ा।चातुर्मास कमेटी की दोहरी जिम्मेदारी
बैठक के दौरान खुद राजेश कोचेटा ने संगठनात्मक सुधार का सुझाव देते हुए कहा कि चातुर्मास के सफल संचालन के लिए एक अलग कमेटी और अलग अध्यक्ष नियुक्त किया जाना चाहिए। लेकिन समाज ने उनके लंबे अनुभव और कुशल नेतृत्व पर एक बार फिर भरोसा जताते हुए, चातुर्मास कमेटी के अध्यक्ष पद का दायित्व भी उन्हीं को सौंप दिया।
साध्वी प्रमोद कुंवर जी का शिवपुरी में प्रस्तावित चातुर्मास
इस वर्ष का चुनाव समाज के लिए इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस साल प्रसिद्ध जैन साध्वी प्रमोद कुंवर जी महाराज साहब ठाणा-3 का चातुर्मास शिवपुरी में प्रस्तावित है। इतने बड़े धार्मिक
आयोजन को सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए समाज को एक अनुभवी नेतृत्व की जरूरत थी, जिसे देखते हुए कोचेटा को यह दोहरी कमान दी गई है।
गुटबाजी को भुलाकर समाजहित का संकल्प
बैठक में समाज के महिला और पुरुष सदस्यों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इस दौरान सदस्यों ने आपसी मतभेद और गिले-शिकवे भुलाकर समाजहित में मिलकर काम करने का संकल्प लिया। कोचेटा के दोबारा निर्वाचन के बाद समाज जनों ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया। इस मौके पर निर्मल कर्नावट, मनीषा कोचेटा, अशोक जैन, डॉ. एनके जैन, राजकुमार जैन, सुमत कोचेटा, प्रीति कोचेटा और समता कोचेटा सहित समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित थे, जिन्होंने नई कार्यकारिणी के गठन का समर्थन किया।
















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