छात्रों की आड़ में 'अपना उल्लू सीधा' करने की साजिश
दिए गए ज्ञापन में नागरिकों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि इस तथाकथित आंदोलन का मकसद छात्रों का हित नहीं, बल्कि कुछ चुनिंदा तत्वों द्वारा अपना 'उल्लू सीधा' करना था। आंदोलन के नाम पर पूरे शहर का शांतिपूर्ण माहौल बिगाड़ने का एक कुत्सित प्रयास किया गया है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मीडिया से अभद्रता, जातिगत टिप्पणी और देवी-देवताओं का अपमान
जागरूक नागरिकों ने शिकायत में बताया कि इस अवैध धरने के दौरान कतिपय शरारती तत्वों ने कवरेज करने पहुंचे मीडियाकर्मियों के साथ न सिर्फ अभद्रता की, बल्कि उन पर तीखी जातिगत टिप्पणियां भी कीं। इतना ही नहीं, आंदोलनकारियों ने देवी-देवताओं के चित्रों का इस्तेमाल कर पोस्टर के माध्यम से बेहद अमर्यादित और अभद्र टिप्पणियां कीं, जिससे स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाएं गंभीर रूप से आहत हुई हैं।
देश के संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को बनाया निशाना
माहौल खराब करने की इस सोची-समझी साजिश में देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर बैठे गणमान्य लोगों को भी नहीं बख्शा गया। प्रदर्शनकारियों द्वारा उनके खिलाफ अत्यंत अशोभनीय, अमर्यादित और देश विरोधी लहजे वाली भाषा का खुला इस्तेमाल किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य केवल और केवल तनाव पैदा करना था।
तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की मांग
शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और अधिवक्ताओं ने दोटूक शब्दों में प्रशासन से कहा है कि छात्रों के पवित्र नाम को बदनाम करने वाले और समाज में जहर घोलने वाले इन चेहरों को बेनकाब किया जाए। ज्ञापन सौंपने वालों में शिवपुरी के कई जागरूक नागरिक व हस्ताक्षरकर्ता शामिल रहे, जिन्होंने उम्मीद जताई है कि पुलिस प्रशासन इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उपद्रवियों पर तत्काल प्रभाव से कड़ी कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई करेगा ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।
















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