* अंतर्राष्ट्रीय जानकी सेना की भव्य माँ जानकी सम्मान पदयात्रा संपन्न
* कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन सीता नवमी को शासकीय स्तर पर 'माता जानकी प्राकट्य दिवस' घोषित करने की उठाई मांग
शिवपुरी। त्यागमयी, पतिव्रता और अदम्य आत्मबल की साक्षात प्रतिमूर्ति जगत जननी माता जानकी का जीवन संपूर्ण मानव जाति के लिए संस्कार और नारी सशक्तिकरण का शाश्वत प्रेरणापुंज है। उनके इन्हीं पावन आदर्शों को जन-जन के जीवन में पिरोने के पावन उद्देश्य से, अंतर्राष्ट्रीय जानकी सेना संगठन द्वारा विगत दो माह से एक वृहद सांस्कृतिक अभियान चलाया जा रहा है।
इसी क्रम में आज शिवपुरी शहर में अंतर्राष्ट्रीय जानकी सेना के तत्वावधान में एक अत्यंत भव्य, दिव्य और अनुशासित 'मां जानकी सम्मान पदयात्रा' गरिमामयी ढंग से संपन्न हुई। यह पावन पदयात्रा शहर के मां जानकी लव-कुश पार्क से प्रारंभ होकर प्रमुख मार्गों से गुजरी। यात्रा के दौरान संपूर्ण वातावरण "माता जानकी के सम्मान में— जानकी सेना मैदान में" के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
हाथों में ध्वज और हृदय में माता सीता के प्रति अगाध श्रद्धा लिए सैकड़ों जानकी सैनिक पूर्ण अनुशासन के साथ पंक्तिबद्ध होकर चल रहे थे। शहरवासियों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर और मालाएं पहनाकर पदयात्रा का भव्य स्वागत किया। पदयात्रा जब कलेक्ट्रेट परिसर पहुंची, तो वहां कलेक्टर अर्पित वर्मा की उपस्थिति में महिला इकाई की जिलाध्यक्ष अनुषा भटनागर ने ज्ञापन का वाचन किया। ज्ञापन के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति, भारत सरकार, प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल से सर्वसम्मति से मांग की गई कि 'सीता नवमी' (माता जानकी प्राकट्य दिवस) को शासकीय स्तर पर आधिकारिक रूप से घोषित और मान्य किया जाए।
चरित्र निर्माण से मिटेंगी सामाजिक विसंगतियां
राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रम सिंह रावत ने अभियान के व्यापक दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए कहा "यदि शासकीय स्तर पर यह पर्व मनाया जाएगा, तो घर-घर में माता जानकी के पावन चरित्र की चर्चा होगी। नारी सम्मान में वृद्धि होगी जब हमारी आने वाली पीढ़ी माता सीता के त्याग, चरित्र और स्वाभिमान को अपने जीवन में ढालेगी, तो समाज में बेटियों और बहनों को लेकर पनप रही विसंगतियां स्वतः समाप्त हो जाएंगी पूजा-अर्चना और उनके आदर्शों का चिंतन समाज में छिन्न-भिन्न हो रहे नैतिक मूल्यों व संस्कारों को पुनर्जीवित करेगा।
गौरतलब है कि अंतर्राष्ट्रीय जानकी सेना इस न्यायसंगत व सांस्कृतिक मांग को लेकर पूरी तरह संकल्पबद्ध है। इससे पूर्व संगठन द्वारा शिवपुरी तथा प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रेस वार्ता आयोजित की जा चुकी है। साथ ही, संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री से भेंट कर उन्हें मांग पत्र भी सौंप चुका है।
संगठन को पूर्ण विश्वास है कि सरकार इस सांस्कृतिक व नैतिक विषय की गंभीरता को समझते हुए शीघ्र ही माता जानकी प्राकट्य दिवस को शासकीय मान्यता प्रदान करेगी।
इनका कहना है
जिस प्रकार राधा अष्टमी, हनुमान जयंती, महाशिवरात्रि और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी जैसे महापर्व घर-घर में उल्लास के साथ मनाए जाते हैं, उसी प्रकार माता जानकी प्राकट्य दिवस को भी शासकीय मान्यता मिलनी चाहिए। माता सीता केवल एक पौराणिक चरित्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में शील, धैर्य, मर्यादा और सहनशीलता की पराकाष्ठा हैं।"














सच्ची और अच्छी खबरें पढ़ने के लिए लॉग इन कीजिये "मामा का धमाका डॉट कॉम"।
ये है, आपकी अपनी आवाज।
फोन कीजिये। खबर भेजिये वाट्सअप नम्बर 98262 11550 या मेल कीजिये 550vip@gmail.com
कोई टिप्पणी नहीं
एक टिप्पणी भेजें