शिवपुरी। जैन धर्म के आत्मशुद्धि, संयम और क्षमा के पावन पर्व पर्युषण महापर्व की आराधना आज से प्रारंभ हो रही है। श्वेतांबर जैन समाज द्वारा इस आठ दिवसीय महापर्व को श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया जाएगा।
जैन धर्म में पर्युषण महापर्व का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यह पर्व आत्मचिंतन, तप, त्याग, स्वाध्याय एवं संयम के माध्यम से स्वयं के भीतर झांकने और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का अवसर प्रदान करता है। इस दौरान श्रावक-श्राविकाएं उपवास, सामायिक, प्रतिक्रमण, ध्यान, स्वाध्याय एवं प्रवचन आदि धार्मिक आराधनाओं में सहभागिता करेंगे।
जैनाचार्यों के अनुसार पर्युषण का मुख्य उद्देश्य मन, वचन और काया से हुए दोषों के लिए आत्मचिंतन करते हुए क्षमा मांगना तथा आने वाले समय में संयमित एवं सदाचारी जीवन जीने का संकल्प लेना है।
इस वर्ष पर्युषण महापर्व 8 सितंबर से 15 सितंबर तक मनाया जाएगा। समाज के अध्यक्ष तेजमल जी सांखला एवं सचिव विजय जी पारख ने बताया कि पर्युषण महापर्व के दौरान विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
पर्व की आराधना के लिए श्री वर्धमान स्वाध्याय मंडल द्वारा विशेष धार्मिक आयोजन किए जाएंगे। इनमें श्री सौरभ जी आकोटिया, उज्जैन (नलखेड़ा) एवं तनमय जी, भवानी मंडी द्वारा प्रवचन एवं अन्य धार्मिक गतिविधियां कराई जाएंगी।
महापर्व के दौरान प्रवचन, प्रतिक्रमण, शिविर एवं विविध धार्मिक प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा। इन कार्यक्रमों को लेकर जैन समाज के श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। समाजजन बड़ी संख्या में धार्मिक आयोजनों में शामिल होकर पर्युषण महापर्व की आराधना करेंगे।
पर्युषण महापर्व का संदेश है—आत्मचिंतन करें, संयम अपनाएं और सभी जीवों के प्रति क्षमा एवं मैत्री का भाव रखें।











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