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#धमाका_अच्छी_खबर: शासकीय उमा विद्यालय झिरी में पदस्थ प्रधानाध्यापक सतीश उपाध्याय 31 अक्टूबर को अपनी लंबी पारी खेलने के बाद सेवा निवृत हुए

रविवार, 1 नवंबर 2026

/ by Vipin Shukla Mama
shivpuri शिवपुरी। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय झिरी में पदस्थ प्रधानाध्यापक सतीश उपाध्याय 31 अक्टूबर को अपनी लंबी पारी खेलने के बाद सेवा निवृत हो गए। उनकी सेवा निवृत्ति के अवसर पर अनेक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए जिसकी शुरुआत 30 नवंबर से हुई और इस दौरान सुंदरकाण्ड हुआ। 31 अक्टूबर 2026 को सेवा निवृत्ति के अवसर पर स्कूल में विधिवत विदाई समारोह का आयोजन हुआ। उसी दिन शिक्षकों और झिरी स्कूल से संबद्ध सभी स्कूल के शिक्षकों को श्री सतीश जी ने दाल बाटी खिलवाई। बाद में शिक्षकों ने बैंड पर सेवा भावना से ओतप्रोत गीतों की धुन पर उन्हें विदा किया। याद रहे कि श्री सतीश उपाध्याय पहले झिरी प्राथमिक विद्यालय और बाद में पदोन्नति के साथ झिरी हाई स्कूल में कई सालों से पदस्थ थे और स्टाफ को परिवारजनों की तरह साथ लेकर चले जिसकी झलक विदाई के अवसर पर साफ नजर आई जब स्टाफ साथियों ने उन्हें दिल को छू लेने वाले गीतों की प्रस्तुति और गाजे
बाजे के साथ करीब एक किमी दूर झिरी के स्कूल से लेकर बस स्टैंड तक पैदल साथ चलकर विदा किया। इधर श्री सतीश जी खुली जीप में खड़े होकर स्टाफ, आमजन और झिरी के लोगों का अभिवादन स्वीकार करते रहे, इसी बीच कई अवसर ऐसे आए जब लोगों के साथ श्री सतीश जी के आंसू छलक पड़े। जो उनके बीते कई सालों की मेहनत, बच्चों और स्टाफ के प्रति परस्पर समन्वय की गवाही दे रहे थे। स्थानीय लोगों का कहना था कि एक व्यक्ति चाहे तो अपने व्यवहार से सभी का दिल जीत सकता है और ये गुण उपाध्याय जी में विद्यमान है। उनके जैसे व्यक्तित्व की पूर्ति होना मुश्किल है। भरत सिंह धाकड़ ने भी उनकी मुक्तकंठ से सराहना की।
30 को हुआ घर पर सुंदर कांड का आयोजन 
श्री सतीश उपाध्याय ने जहां सरकार की सेवा पूरी शिद्दत के साथ की तो वहीं धर्म से भी बराबर अपने आपको जोड़े रखा। नौकरी के साथ अपने गुरु के प्रति समय निकालकर उनका आशीर्वाद हासिल किया। जिसके नतीजे में जगतगुरू दयारामदास देवाचार्य जी ब्रह्मपुरी ऋषिकेश उत्तराखण्ड से खास अवसर पर उनके निवास पधारे और श्री सतीश उपाध्याय जी के घर पर सुंदर कांड का आयोजन किया गया। इसी दौरान उन्होंने श्री सतीश जी को लेकर कहा कि उन्होंने शासकीय सेवा का पूर्ण समर्पण भाव से निर्वहन किया। नित्य प्रति शिवपुरी से 25 किमी दूर ठीक समय पर स्कूल जाना, सर्दी, बरसात, गर्मी की परवाह किए बिना अपने कर्तव्य को बखूबी निभाया। साथ ही धर्म के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी निभाई। हम उनकी सेवा निवृत्ति के अवसर पर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं। 
1 नवंबर को हुआ अखंड रामायण का पाठ
सरकारी सेवा अगर सच्ची लगन से की जाए तो पूरी जिंदगी हम घर, बच्चे और दूसरे कार्य का निर्वहन करते तो है लेकिन फिर भी अभाव रहता है और जब सेवा का आखिरी पड़ाव आता है तो उसी सेवा से दूर जाने का मन में अभाव भी खलता है, लेकिन श्री सतीश जी ने उस सेवा के भाव को मन में रखते हुए भगवान के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए पहले गुरुजी के आगमन पर सुंदर कांड और बाद में 1 नवंबर को अखंड रामायण पाठ का आयोजन किया। 
बीईओ अवधेश ठाकुर ने कहा कभी शिकायत का मौका नहीं दिया
स्कूल में आयोजित प्राचार्य हासे स्कूल झिरी श्री सतीश उपाध्याय के विदाई समारोह में अनेक शिक्षक मौजूद थे। उक्त अवसर पर मौजूद पोहरी के beo अवधेश सिंह ठाकुर ने कहा कि श्री सतीश उपाध्याय जैसे अच्छे इंसान कम मिलते हैं उन्होंने अपनी सेवा के दौरान कभी किसीको कोई शिकायत का मौका नहीं दिया और न ही अपने कर्तव्य से कभी पीछे नहीं हटे। यहां तक कि कई सरकारी कर्मचारी चुनाव में लगने वाली ड्यूटी से इनकार करते हैं लेकिन श्री सतीश जी ने लगातार चुनाव में ड्यूटी दी और हर तरह के चुनाव का अनुभव हासिल किया उनकी ज्यादातर ड्यूटी पिछोर, खनियाधाना में लगती थी। बाद में श्री सतीश उपाध्याय ने सभी साथियों का आभार प्रकट किया। स्कूल में उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मनोरमा उपाध्याय और परिजन मौजूद थे। 
दोनों बेटे और बहू काफिले के साथ लाये पिता श्री को घर
श्री सतीश उपाध्याय के बड़े बेटे दवा व्यवसाई अमित उपाध्याय, छोटे बेटे मेजर सुमित उपाध्याय और उनकी बहुओं ने झिरी स्कूल से लेकर घर तक लाने में भी अनूठी पेशकश की। अपने पिता को करीब छह कार और ढोल बजाकर वाहनों के काफिले के साथ शिव कॉलोनी स्थित घर तक लेकर आए। घर पर सभी ने अपने पिता की नई पारी के लिए उन्हें शुभकामनाएं देते हुए जमकर नृत्य किया और आतिशबाजी छोड़ी। कुलमिलाकर प्राचार्य श्री सतीश उपाध्याय जी की शानदार, जानदार विदाई की बेला से ये साबित होता है कि जीवन में सादगी, ईमानदारी, सच्चाई और सभी को साथ लेकर चलने का हुनर हो तो जीवन में सेवा निवृत्ति को भी जमकर सेलिब्रेट किया जा सकता है और फिर एक नई राह पर चला जा सकता है। उन्होंने कहा कि अब ईश्वर की आराधना का प्रतिशत सबसे अधिक रहेगा। 












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