इस पूरे मामले की तीन सबसे दिलचस्प और चौंकाने वाली कड़ियां इस प्रकार हैं:
बदला नाम, पर नहीं बदली किस्मत: पोहरी के प्राथमिक स्कूल पाटनपुर में तैनात शिक्षक गोविंद धाकड़ महल रोड स्थित केसीआई कोचिंग में बच्चों को पढ़ा रहे थे। जब जांच टीम पहुंची, तो उन्होंने अपना नाम 'राहुल' बताकर बचने की कोशिश की। कोचिंग संचालक ने भी माना कि वह उन्हें हर महीने 5 हजार रुपये देते हैं। लेकिन फोटो के जरिए हुई पहचान ने 'राहुल' उर्फ गोविंद धाकड़ को सीधे सस्पेंड करवा दिया।
पत्नी के नाम कोचिंग, सेवा खुद की: कुछ शिक्षक और भी चालाक निकले। स्टार अकादमी में कन्या आश्रम के शिक्षक कृष्णकांत राठौर की पत्नी के नाम पर कोचिंग दर्ज थी, लेकिन क्लास खुद गुरुजी ले रहे थे।
"स्कूल के बाद पढ़ाया" वाला बहाना भी फेल: पकड़े जाने पर शिक्षकों ने तर्क दिया कि वे स्कूल समय के बाद ट्यूशन ले रहे थे। लेकिन कानूनन यह पूरी तरह अवैध है। 'सिविल सेवा आचरण नियम' और 'राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट की धारा 28' के तहत कोई भी सरकारी शिक्षक बिना अनुमति के निजी या व्यावसायिक कोचिंग नहीं दे सकता। ऐसा करना एक संज्ञेय अपराध और अनुशासनहीनता माना गया है।












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