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#धमाका_डिफरेंट: प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के मार्गदर्शन में ‘प्रोजेक्ट चीता’ की ऐतिहासिक सफलता का जीवंत प्रमाण है तीन साल की हुई मुखी: सिंधिया

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रविवार, 29 मार्च 2026

Sheopur श्योपुर। कूनो राष्ट्रीय उद्यान को चीता प्रोजेक्ट से आज नई पहचान मिल चुकी है। पीएम नरेंद्र मोदी ने विलुप्त चीतों को दक्षिण अफ्रीका से लाकर भारत में फिर से बसाने की सोच रखते हुए अपने जन्मदिन पर जिन चीतों को छोड़ा था उनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। उनमें से एक भारत में जन्मी पहली चीता ‘मुखी’ आज 3 वर्ष की हो चुकी है जो इस प्रोजेक्ट की दूरगामी सोच को दर्शाता है। 
केंद्रीय मंत्री द ग्रेट ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया ट्वीट
मध्यप्रदेश के ‘कूनो नेशनल पार्क’ में, भारत में जन्मी पहली चीता ‘मुखी’ का आज 3 वर्ष का होना और एक नन्हे शावक से आत्मविश्वासी माँ बनने तक की उसकी यात्रा हम सभी के लिए गर्व और संतोष का क्षण है, साथ ही आदरणीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के मार्गदर्शन में ‘प्रोजेक्ट चीता’ की ऐतिहासिक सफलता का जीवंत प्रमाण भी है।
‘कूनो नेशनल पार्क’ आज न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे देश के वन्यजीव संरक्षण के संकल्प, सामर्थ्य और संभावनाओं का प्रतीक बन चुका है और यह उपलब्धि हम सभी को प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को और सशक्त करने की प्रेरणा देती है।













#धमाका_बड़ी_खबर: एसडीओपी बड़ौदा अवनीत शर्मा ने कौन बनेगा करोड़पति की विजेता तहसीलदार अमिता सिंह तोमर को किया गिरफ्तार, किसानों की ढाई करोड़ राशि सौ से अधिक पटवारियों के साथ मिलकर डकारने का मामला, सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली जमानत, देखिए video

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शुक्रवार, 27 मार्च 2026

श्योपुर। गुना व शिवपुरी के बाद अब श्योपुर जिले में अपनी शानदार पुलिस कार्रवाई का जलवा बड़ौदा एसडीओपी अवनीत शर्मा ने दिखाना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए शर्मा ने श्योपुर जिले की बड़ौदा तहसील में बाढ़ राहत की राशि में से 2.57 करोड़ का गबन करने वाली तहसीलदार अमिता तोमर को वर्ष 2023 में दर्ज एफआईआर के क्रम में गिरफ्तार कर लिया है। तहसीलदार अमिता तोमर पुलिस से दूरी बनाकर चल रही थी लेकिन बड़ौदा एसडीओपी अवनीत शर्मा Awanit Sharma को जैसे ही इस मामले की कमान सौंपी गई तो उन्होंने शीघ्र ही तहसीलदार अमिता सिंह तोमर को ग्वालियर
स्थित उनके निवास से पुलिस गिरफ्त में लेकर न्यायालय में पेश किया, जहां से तहसीलदार अमिता तोमर को जेल भेज दिया गया है। जो अब शिवपुरी महिला जेल में रहेंगी।
बता दें कि एसडीओपी अवनीत शर्मा गुना और शिवपुरी जिले में भी बड़े-बड़े मामलों में सटीक विवेचना करने वाले पुलिस अधिकारी के रूप में जाने जाते रहे हैं साथ ही उनके नेतृत्व में गुना और शिवपुरी जिला का कोलारस थाना आईएसओ अवार्ड प्राप्त कर चुके हैं। 
केबीसी में 50 लाख जीत देश में ख्याति पाने वाली तहसीलदार अमिता तोमर ने कर दिया बाढ़ राहत में घोटाला, 2.57 करोड़ के बाढ़ राहत घोटाले में दर्ज हुआ केस, सुप्रीम कोर्ट तक से नहीं मिली जमानत
केबीसी में 50 लाख रुपए जीतकर सुर्खियों में आई तहसीलदार अमिता सिंह तोमर गुरुवार को पुलिस गिरफ्त में आई
उन पर श्योपुर के बड़ौदा में साल 2021 में हुए 2.57 रुपए के बाढ़ राहत घोटाले का आरोप है। पुलिस ने उन्हें ग्वालियर में
चंद्रबदनी नाका स्थित निवास से पकड़ा और श्योपुर ले जाकर श्योपुर न्यायालय में पेश किया। जहां से न्यायालय के आदेश के बाद उन्हें शिवपुरी महिला जेल भेज दिया गया। तहसीलदार अमिता की गिरफ्तारी से एक दिन पहले ही विजयपुर तहसीलदार के पद से हटाया गया था।
तहसीलदार अमिता सिंह तोमर की गिरफ्तारी सुप्रीम कोर्ट से उनकी जमानत याचिका खारिज होने के बाद की गई है। उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए पहले ट्रायल कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। वहां से राहत नहीं मिलने के बाद हाईकोर्ट और अंत में वे सुप्रीम कोर्ट पहुंची। तीनों स्तर पर उन्हें राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अग्रिम जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता। इस मामले में पुलिस ने अभी और आरोपियों के नाम बढ़ने की संभावना जताई है। इस मामले में एसडीओपी श्योपुर नवनीत शर्मा ने बताया कि तहसीलदार अमिता सिंह तोमर को ग्वालियर स्थित घर से गिरफ्तार किया गया है। न्यायालय से उन्हें शिवपुरी स्थित महिला जेल भेज दिया गया है। 
अकेली तोमर ही नहीं पूरी रेल की रेल घोटाले में शामिल, प्रशासन ने 6 पटवारियों के खिलाफ कराई थी FIR, अब 110 आरोपी
श्योपुर में 2021 में आई बाढ़ के बाद बड़ौदा क्षेत्र में 794 हितग्राहियों को राहत राशि दी जानी थी। ऑडिट में सामने आया कि बाढ़ राहत के नाम पर 127 फर्जी हितग्राहियों के बैंक खातों में राशि ट्रांसफर कर करीब ₹2.57 करोड़ का गबन किया गया। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर हुई जांच के बाद 6 पटवारियों को गबन का दोषी मानते हुए उनके खिलाफ 2023 में एफआईआर कराई। बाकी से राशि जमा कराकर उन्हें राहत दे दी गई। इस मामले में अब तक 22 पटवारी सहित कुल 110 आरोपी बन चुके हैं। इनमें पटवारी, उनके परिजन सहित तहसीलदार अमिता सिंह तोमर भी शामिल हैं।
आरोप है कि पैसे लेकर दूसरों के खातों में राशि ट्रांसफर की
तहसीलदार अमिता तोमर पर आरोप है कि पटवारियों ने जो भुगतान पत्रक उन्हें पेश किए, उन्हें डीडीओ (आहरण एवं संवितरण अधिकारी) पावर के नाते सत्यापित करना था। इसके बाद बैंक खातों में राशि भेजनी थी। तहसीलदार ने कई ऐसे खातों में राशि जारी कर दी, जो पीड़ितों में शामिल ही नहीं थे। यह खातेदार तहसील क्षेत्र के बाहर के लोग थे। इसके बदले तहसीलदार पर पैसे लेने का आरोप पुलिस जांच में पाया गया।
जांच पर सवाल, 16 पटवारियों ने राशि लौटाई तो उन्हें छोड़ दिया, लेकिन क्यों ?
ऑडिट में गबन का मामला खुलने के बाद डिप्टी कलेक्टर ने विस्तृत जांच की। जांच के बाद 16 पटवारियों से गबन की राशि जमा करा ली गई। इन सभी की गबन की गई राशि 5 लाख रुपए से कम थी। बाकी छह पटवारियों पर एफआईआर दर्ज करा दी गई। पुलिस ने जांच की तो इन 16 पटवारियों द्वारा राशि जमा कराना सामने आया। पुलिस ने इसे ही गबन का साक्ष्य बना लिया। इससे स्पष्ट हो गया कि गबन किया गया था। लेकिन क्या वे 16 पटवारी उतने ही दोषी नहीं जितनों में अमिता और अन्य पटवारी शामिल हैं।
22 पटवारी सहित 27 गिरफ्तार, 16 पटवारियों को अग्रिम जमानत
बाढ़ राहत घोटाले में तहसीलदार अमिता सिंह की गिरफ्तारी से पहले 26 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें 22 पटवारी सहित कुल 26 लोग शामिल हैं। अमिता के गिरफ्तार होने के बाद यह संख्या 27 हो गई है। बड़ौदा एसडीओपी अवनीत शर्मा ने बताया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद 16 पटवारियों ने अग्रिम जमानत प्राप्त कर ली है, इसलिए वे भी गिरफ्तार की श्रेणी में माने गए हैं।
'कौन बनेगा करोड़पति' (सीजन-5) में शामिल हुई थीं
तहसीलदार अमिता सिंह तोमर साल 2011 में कौन बनेगा करोड़पति सीजन-5 में 50 लाख रुपए जीतकर चर्चा में आईं थीं। तब उन्होंने कहा था कि वह एक साधारण परिवार से आती हैं और इस राशि का उपयोग अपने परिवार को मजबूती देने के साथ समाज के वंचित तबके की सेवा के लिए करना चाहती हैं। वे श्योपुर जिले के कराहल, बड़ौदा, वीरपुर और विजयपुर तहसील में तहसीलदार के तौर पर पदस्थ रहीं। गिरफ्तारी से एक दिन पहले तक वे विजयपुर तहसीलदार थीं। उनकी पहचान लंबे समय तक "KBC वाली मैडम' के रूप में रही।

#धमाका_बड़ी_खबर : खुशी अधरों से आकर लौटी, रामनिवास बनाम मुकेश मल्होत्रा, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का निर्णय किया खारिज, बिना वेतन, नो वोट के साथ मुकेश ही रहेंगे विजयपुर विधायक, पिक्चर अभी बाकी है

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गुरुवार, 19 मार्च 2026

Delhi दिल्ली। दोस्तों कहते हैं न कि खुशी अधरों से होकर लौट गई, कुछ ऐसा ही हुआ है श्योपुर जिले के कद्दावर नेता रामनिवास रावत के साथ जब कुछ दिन पहले आए हाईकोर्ट के फैसले ने उनके चेहरे की गायब खुशी वापिस लौटा दी थी लेकिन उसी फ़ैसले में जो रास्ता मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए दे दिया गया था उसी रास्ते से खुशी रामनिवास जी की तरफ से तो लौट गई लेकिन वापिस जाकर मुकेश और उनके खेमे के लिए खुशखबरी ले आई है। 
जी हां मध्य प्रदेश की विजयपुर विधानसभा सीट को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा की विधायकी को बरकरार रखते हुए एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच के उस आदेश को खारिज कर दिया है, जिसमें रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट में मुकेश मल्होत्रा का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने दलीलें पेश कीं, जिसके बाद अदालत ने मल्होत्रा को राहत दी।
देखिए सुप्रीम कोर्ट की दो प्रमुख शर्तें
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की डबल बेंच ने मुकेश मल्होत्रा को विधायक के रूप में जारी रखने की अनुमति तो दी है, लेकिन अंतिम फैसला आने तक ये पाबंदियां भी लगाई हैं।
वोट नहीं डाल सकेंगे:
 मुकेश मल्होत्रा फिलहाल राज्यसभा के लिए मतदान नहीं कर सकेंगे। ऐसे में अब मुकेश जून में होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए वोट नहीं डाल पाएंगे।
नहीं मिलेगा वेतन: 
जब तक कोर्ट इस मामले में अपना अंतिम निर्णय नहीं सुना देता, तब तक उन्हें विधायक के रूप में मिलने वाला वेतन और भत्ते नहीं दिए जाएंगे।
हालांकि, उन्हें विधायक निधि मिलेगी या नहीं यह अभी साफ नहीं है। वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने बताया कि अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी।
15 दिन का दिया था सुप्रीम कोर्ट जाने का समय
बता दें कि एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने क्रिमिनल केस छिपाने के चलते मल्होत्रा का चुनाव शून्य घोषित करते हुए भाजपा नेता रामनिवास रावत को विजेता माना था। इसके तुरंत बाद मल्होत्रा ने हाईकोर्ट में ही एक आवेदन देकर अपील करने के लिए समय मांगा था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मुकेश मल्होत्रा के पास सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए 15 दिन का समय था।














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