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#धमाका_बड़ी_खबर : खुशी अधरों से आकर लौटी, रामनिवास बनाम मुकेश मल्होत्रा, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का निर्णय किया खारिज, बिना वेतन, नो वोट के साथ मुकेश ही रहेंगे विजयपुर विधायक, पिक्चर अभी बाकी है

गुरुवार, 19 मार्च 2026

/ by Vipin Shukla Mama
Delhi दिल्ली। दोस्तों कहते हैं न कि खुशी अधरों से होकर लौट गई, कुछ ऐसा ही हुआ है श्योपुर जिले के कद्दावर नेता रामनिवास रावत के साथ जब कुछ दिन पहले आए हाईकोर्ट के फैसले ने उनके चेहरे की गायब खुशी वापिस लौटा दी थी लेकिन उसी फ़ैसले में जो रास्ता मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए दे दिया गया था उसी रास्ते से खुशी रामनिवास जी की तरफ से तो लौट गई लेकिन वापिस जाकर मुकेश और उनके खेमे के लिए खुशखबरी ले आई है। 
जी हां मध्य प्रदेश की विजयपुर विधानसभा सीट को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा की विधायकी को बरकरार रखते हुए एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच के उस आदेश को खारिज कर दिया है, जिसमें रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट में मुकेश मल्होत्रा का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने दलीलें पेश कीं, जिसके बाद अदालत ने मल्होत्रा को राहत दी।
देखिए सुप्रीम कोर्ट की दो प्रमुख शर्तें
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की डबल बेंच ने मुकेश मल्होत्रा को विधायक के रूप में जारी रखने की अनुमति तो दी है, लेकिन अंतिम फैसला आने तक ये पाबंदियां भी लगाई हैं।
वोट नहीं डाल सकेंगे:
 मुकेश मल्होत्रा फिलहाल राज्यसभा के लिए मतदान नहीं कर सकेंगे। ऐसे में अब मुकेश जून में होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए वोट नहीं डाल पाएंगे।
नहीं मिलेगा वेतन: 
जब तक कोर्ट इस मामले में अपना अंतिम निर्णय नहीं सुना देता, तब तक उन्हें विधायक के रूप में मिलने वाला वेतन और भत्ते नहीं दिए जाएंगे।
हालांकि, उन्हें विधायक निधि मिलेगी या नहीं यह अभी साफ नहीं है। वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने बताया कि अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी।
15 दिन का दिया था सुप्रीम कोर्ट जाने का समय
बता दें कि एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने क्रिमिनल केस छिपाने के चलते मल्होत्रा का चुनाव शून्य घोषित करते हुए भाजपा नेता रामनिवास रावत को विजेता माना था। इसके तुरंत बाद मल्होत्रा ने हाईकोर्ट में ही एक आवेदन देकर अपील करने के लिए समय मांगा था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मुकेश मल्होत्रा के पास सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए 15 दिन का समय था।














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