शिवपुरी। आज 19 मार्च से नवरात्र का आरंभ हो चुका है। घर घर और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में मां की घट स्थापना और पूजन के साथ आराधना शुरू हो जाएगी। इस अवसर पर माँ दुर्गा की स्थापना का महूर्त देखकर, मंत्र सहित उनकी स्थापना कीजिए, अधिक जानकारी के लिए डॉ विकास दीप शर्मा श्री मंशापूर्ण ज्योतिष से जानिये।
नवरात्रि पूजन: संपूर्ण सरल विधि, मंत्र एवं कलश स्थापना का नवरात्रि का विशेष महत्व है। यह नौ दिन शक्ति की उपासना, संकल्प और आत्मशुद्धि के होते हैं। यदि आप घर पर ही शास्त्रीय मर्यादा के साथ सरल विधि से पूजन करना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा।
पूजन से पूर्व की तैयारी में सबसे पहले पूजा स्थान को साफ करें और स्वयं स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो लाल या पीले) धारण करें।
आवश्यक सामग्री: माँ दुर्गा की चौकी, लाल कपड़ा, कलश (मिट्टी/ताँबा), नारियल, आम के पत्ते, मिट्टी का पात्र और जौ, गंगाजल, कलावा, अक्षत, धूप-दीप, कुमकुम, फल-फूल मिठाई,और श्रृंगार सामग्री।
मुख्य पूजन विधि (नित्य क्रम)
नौ दिनों तक प्रतिदिन सुबह-शाम इसी क्रम में पूजा करें:
आचमन और शुद्धि: हाथ में जल लेकर तीन बार पिएं और अपने ऊपर जल छिड़कें। स्वयं को शुद्ध करें ।
आचमन के लिए दाहिने हाथ की हथेली में थोड़ा जल लें और प्रत्येक मंत्र के साथ उसे ग्रहण करें (पिएं):
प्रथम आचमन: ॐ केशवाय नम:
द्वितीय आचमन: ॐ नारायणाय नम:
तृतीय आचमन: ॐ माधवाय नम:
(चौथी बार 'ॐ गोविंदाय नम:' बोलकर हाथ धो लें।)
2. शरीर शुद्धि (पवित्रीकरण) मंत्र
आचमन के बाद बाएं हाथ में जल लेकर उसे दाहिने हाथ की उंगलियों से अपने ऊपर और पूजा सामग्री पर छिड़कें। यह मंत्र पढ़ते हुए भावना करें कि आप बाहर और भीतर से पवित्र हो रहे हैं:
ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
य: स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर: शुचि:।।
अर्थ: जो पुण्डरीकाक्ष (भगवान विष्णु) का स्मरण करता है, वह चाहे पवित्र हो या अपवित्र, अथवा किसी भी अवस्था में हो, वह बाहर और भीतर से शुद्ध हो जाता है।
3. पृथ्वी पूजन (आसन शुद्धि) मंत्र
जिस आसन पर आप बैठे हैं, उसे भी शुद्ध करना अनिवार्य है। आसन के नीचे थोड़ा जल छिड़कें और इस मंत्र को बोलें:
ॐ पृथ्वि त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता।
त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्।।
कलश (घट) स्थापना विधि और मंत्र:-
कलश को भगवान गणेश और सभी तीर्थों का स्वरूप माना जाता है।
जौ बोना: एक मिट्टी के बड़े पात्र में थोड़ी मिट्टी डालें और उसमें जौ के दाने फैला दें। फिर ऊपर से हल्की मिट्टी और जल छिड़कें।
कलश तैयार करना: कलश पर कलावा बांधें और उस पर रोली से 'ॐ' या 'स्वास्तिक' बनाएं। कलश में जल, गंगाजल, सिक्का, दूर्वा, सुपारी , हल्दी और अक्षत डालें।
आम के पत्ते पल्लव और नारियल: कलश के मुख पर आम के 5 या 7 पत्ते रखें। एक नारियल को लाल चुनरी या कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर इस प्रकार रखें कि उसका मुख आपकी ओर हो।
कलश स्थापना मंत्र: कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित करते समय इस मंत्र का ध्यान करें:
कलशस्य मुखे विष्णु: कण्ठे रुद्र: समाश्रित:।,मूले त्वस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणा: स्मृता:।।
मंत्र बोलकर कलश पर जल चढ़ावे, रोली, चावल, पुष्प चढ़ावे, कलश के पास नैवेध भोग फल दक्षिणा रखे
अखण्ड ज्योति / दीपक स्थापना
पूजा के संकल्प के अनुसार दीपक जलाएं। दीपक जलाते समय इस मंत्र का उच्चारण करें
शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धनसंपदा।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते।।
मंत्र बोलकर दीपक पर जल चढ़ावे, रोली, चावल, पुष्प चढ़ावे, कलश के पास नैवेध भोग फल मिठाई ओर दक्षिणा रखे
ध्यान और संकल्प: हाथ में जल पैसा सिक्का लेकर संकल्प लें कि आप श्रद्धापूर्वक 9 दिन माँ की पूजा करेंगे। फिर दीपक को जलावे ।
आह्वान: माँ दुर्गा का ध्यान करें और उन्हें आसन ग्रहण करने की विनती करें।
अभिषेक व तिलक: प्रतिमा पर जल छिड़कें और कुमकुम से तिलक लगाएं। अक्षत अर्पित करें।
वस्त्र व श्रृंगार: माँ को लाल चुनरी और श्रृंगार का सामान चढ़ाएं।
भोग: फल और मिठाई का भोग लगाएं।
पंचोपचार पूजन: माँ को गंध (चंदन), पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य (भोग) अर्पित करें।
माँ दुर्गा की स्थापना और आवाहन
चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। माँ को फल, फूल और नैवेद्य अर्पित करने से पहले उनका आवाहन करें:
आवाहन मंत्र:--
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके, शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तुते।।
ॐमहाकाली-महालक्ष्मी-महासरस्वती स्वरूपिण्यै श्रीदुर्गायै नमः।
सबसे प्रभावशाली मंत्र (नवार्ण मंत्र):
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।
क्षमा प्रार्थना
"हे माँ, अनजाने में पूजा में कोई भूल हुई हो तो मुझे क्षमा करें।"
मंत्र बोलकर कलश पर जल चढ़ावे, रोली, चावल, पुष्प चढ़ावे, कलश के पास नैवेध भोग फल, मिठाई दक्षिणा रखे , सुहाग सामग्री रखे, माँ से पूर्व में ही अपनी पूजा में जाने अनजाने में गलतियों की छमा याचना करे ।
नवार्ण मंत्र का जाप: कम से कम 108 बार इस मंत्र का जाप करें:
* "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे"
नवग्रह पूजन: सभी ग्रहों की शांति के लिए मन मे नवग्रह देवताओं का ध्यान करके इस मंत्र का ध्यान करें:
* ब्रह्मा मुरारि स्त्रिपुरान्त कारी भानु: शशी भूमिसुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्र: शनि राहु केतव: सर्वे ग्रहा: शान्तिकरा भवन्तु।।
आरती और क्षमा प्रार्थना
पूजन के अंत में माँ दुर्गा की आरती प्रेमपूर्वक करें। आरती के बाद हाथों में पुष्प लेकर माँ के चरणों में अर्पित करें और अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें:
क्षमा मंत्र: अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।
दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि।।
विशेष
* नौ दिनों तक दुर्गा चालीसा , नवार्ण मंत्र,दुर्गा 32 नाम, गुरु मंत्र, देवी कवच, दुर्गा अष्टटोतर या दुर्गा सप्तशती के पाठ का श्रवण या वाचन अत्यंत शुभ होता है।
प्रतिदिन माँ को अलग-अलग रंगों के पुष्प अर्पित करना श्रेष्ठ माना जाता है।
क्षमा प्रार्थना (पूजा के अंत में)
पूजा में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए अंत में यह मंत्र अवश्य बोलें:
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरि।।
अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।
दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि।।
यह विधि और मंत्र अत्यंत सरल और सात्विक हैं। आप अपनी श्रद्धा के अनुसार इनका प्रयोग कर सकते हैं।
श्री मंशापूर्ण ज्योतिष केंद्र शिवपुरी डॉ. विकासदीप शर्मा 9993462153
नौ दिनों तक सात्विक भोजन ग्रहण करें।
यदि संभव हो तो दुर्गा चालीसा का पाठ अवश्य करें।












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