ईई बाथम के बंगले पर निकला सांप, मचा हड़कंप
शिवपुरी। नगर के दो अलग अलग हिस्सों में मंगलवार को दो सांप निकलने से हड़कंप मच गया। एक सांप पीएचई के ईई एसएल बाथम की कोठी में निकला तो दूसरा सांप महल के पीछे विजयपुरम कोलोनी में निकला। दोनों जगह वन विभाग की रेस्क्यू टीम को जाना पड़ा। टीम के सदस्य दाताराम आर्य और नरेंद्र झा को सूचना मिली थी कि ईई बाथम के मोहनी सागर स्थित बंगले के बगीचे में एक बड़ा सांप मौजूद है। यहां माली की नजर में सांप आया तो वह टीम को सूचित किया। जिसके बाद दोनों मौके पर गए। रेस्क्यू कर जब सांप पकड़ा तो देखा घोड़ा पछाड़ सांप करीब 6 फीट लंबा इधर से उधर भागने की कोशिश कर रहा था। तेज दौड़ने में माहिर होने के चलते ही इस सांप को घोड़ा पछाड़ के नाम से जाना जाता है। इसे पकड़कर दाताराम ओर नरेंद्र ने नेशनल पार्क में छोड़ा। तभी दूसरी जानकारी मिली कि महल के पीछे विजयपुराम के एक घर मे सांप मौजूद है। दोनों गए तो यहां करैत सांप 3 फीट लंबा मिला जिसे पकड़कर नेशनल पार्क में छोड़ा।
बता दे कि करैत साँप जहरीला होता है। कोबरा की तरह ये भी टॉप फाइव जहरीला है। जबकि दौड़ने माहिर घोड़ा पछाड़ कम जहरीला होता है।
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ये है, दुनिया का हाल
रिपोर्ट्स की माने तो सांप काटने से दुनियाभर में होने वाली मौतों की संख्या में भारत सबसे आगे है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक हर साल 83,000 लोग सांप के दंश का शिकार होते हैं। उनमें से 11,000 की मौत हो जाती है। मौत का सबसे बड़ा कारण तुरंत सही इलाज न होना है। अगर समय रहते डॉक्टर की सलाह ले ली जाए। झाड़ फूंक से दूर रहे तो जान बच सकती है।
अरे बाप रे फुस्स
रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में सांपों की लगभग 550 प्रजातियां हैं। इनमें से ज्यादातर सांप जहरीले नहीं होते। जैसे कोबरा, वाइफर, करैत जहरीले हैं। ऐसी 550 किस्म की सांपो की जातियां हैं।
डर के कारण मौत
सांप के काटने का डर इतना होता है, कि कई बार आदमी हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट से मर जाता है। बता दें कि सांप से मन में डर इतना ज्यादा होता है, कि सांप के काटने से कम इसके डर से लोग जल्दी मर जाते हैं।
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