शिवपुरी। जीवन में कभी कभी ऐसी बडी घटनाएं घटित हो जाती हैं जिनको भूल पाना आसान नहीं होता। आज फिर इसी तरह की एक बड़ी घटना याद आई तो शहरवासियों की आंखे नम हो गईं।
जब 8 साल पहले नगर के एक नामचीन स्कूल के मासूम उत्सव गोयल 13 पुत्र कमल गोयल को नगर की डीजे कोठी के पास ट्यूशन से कुछ बदमाश अगवा कर ले गए थे। विश्वास की जिस डोर पर दुनिया कायम है उसे मोहरा बनाकर स्कूल वेन के चालक ने उत्सव को अगवा कर लिया। याद रखियेगा बच्चे को स्कूल लाते ले जाते समय उस चालक ने उत्सव से दोस्ती के बहाने दिल मे जगह बना ली थी, जबकि शातिर दिमाग अपहरण की साजिश रच चुका था। बस उसी दोस्ती के झांसे में खेलने दौड़ने की उम्र वाला उत्सव धोखा खा बैठा और जब उसे बहाने से अगवा किया गया तो निशानी में उत्सव की अकेली साइकिल खड़ी मिली थी। जब सांझ ढले उत्सव रोजाना की तरह घर नहीं पहुंचा तो तलाश शुरू की गई। परिजनों की अथक मेहनत से वो बिंदु भी हाथ आ गया था जो उत्सव तक पहुंचने काफी था लेकिन पुलिस के तत्कालीन कुछ साथियों की लापरवाही कहें या होनी, अपहर्ता हाथ में आकर फिर विश्वास को धोखा देने में कामयाब हुए और नतीजे में शिवपुरी झाँसी फोरलेन के सिंध नदी के पानी में उत्सव को पत्थर के साथ बांधकर मौत के घाट उतार दिया गया। अब उत्सव हम सबके बीच नहीं था और उसकी बीते दो दिनों से तलाश करते सैकड़ों लोग, व्यवसायी इस कदर आक्रोशित हुए की शिवपुरी जल उठी। वो हुआ जो इतिहास में कभी नहीं हुआ था। हजारों लोग कानून हाथ में लेकर घरों से सड़क पर निकल पड़े और तोड़फोड़, अराजकता की सीमाओं को तोड़कर रख दिया। प्रतिशोध की आग में नगर बदसूरत हो चुका था। इधर उत्सव के भोले भाले परिजन लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते रहे तब जाकर आक्रोश थमा। जो भी हुआ भगवान करे कभी किसी की औलाद के साथ न हो। लेकिन उत्सव की माँ और पिता कमल ने तभी से शिवपुरी छोड़ दी। उनके भाई बन्धु आज भी नगर में रहते हैं लेकिन जब भी साल में 5 मार्च आती है वे सिहर उठते हैं। इधर उन्हें इस बात का गम आज भी है कि उत्सव हत्याकांड का मास्टर माइंड साकिर आज भी पुलिस से दूर है। बड़े बड़े अपराधों के खुलासे इन 8 सालों में हुए लेकिन साकिर आज तक मोस्ट वांटेड ही है। उत्सव के चाचा भोला गोयल ने कहा कि उत्सव को हम तभी दिल से श्रधांजलि दे पाएंगे जब साकिर पकड़ा जाएगा। उन्हें जिले के संवेदनशील एसपी राजेश सिंह चन्देल से उम्मीद है।
हम अपनी बगिया के फूलों की करें रखवाली
उत्सव के साथ विस्वासघात हुआ था। सभी जानते हैं। इसलिए हमारी आप सभी से गुजारिश है कि बच्चे कहाँ जाते हैं किससे मिलते हैं। कौंन उनके सम्पर्क में है। कभी कभी अचानक चेक करते रहें। खासकर बेटियों को ट्यूशन कोचिंग के समय एकाएक जरूर परखते रहें। हम नहीं कहते कोई अनहोनी होगी लेकिन होशियारी का संदेश इस नगर को उत्सव ने दे दिया है। इतिहास बेहतर हो तो उसे याद रखा जाता है और बदसूरत हो तो सबक याद रखना चाहिये। उत्सव कांड भी कुछ ऐसा ही है जिसे सबक के तौर पर हम याद रखेंगे तो कभी फिर कोई उत्सव सदा के लिए हमसे दूर नहीं होगा। उत्सव बेटा हम तुम्हे भुला न पाएंगे।
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