लुकवासा। भगवान जन्म नहीं लेते भगवान तो अवतार लेते हैं प्रकट होते हैं क्योंकि भगवान का यह विशेष गुण है जब भक्त तपस्या करते हैं और परमात्मा को प्राप्त करने के लिए उनकी लीला देखने के लिए उनके साथ में विहार करने के लिए भक्त तपस्या करते हैं तो परमात्मा करोड़ों वर्षों की तपस्या को सफल करने के लिए किसी के पुत्र बनकर प्रकट होते हैं किसी के भगवान बनकर प्रकट होते हैं यह प्रवचन लुकवासा के समीप ग्राम आनंदपुर में चल रही श्रीराम कथा के अवसर पर आचार्य बृजभूषण महाराज ने कथा के तृतीय दिवस पर श्री राम जन्म उत्सव पर यह प्रवचन कहें और उन्होंने बताया कि दशरथ जी और कौशल्या माता ने पिछले जन्म में बहुत महान तप किया था और भगवान से वरदान मांगा था कि आप हमारे पुत्र के रूप में प्रकट हो तो भगवान नारायण ने उनकी इच्छापूर्ण की और उनके पुत्र बनकर के प्रगट हुए आचार्य जी ने कथा के प्रसंग में नारद मोह की लीला का वर्णन किया और उन्होंने बताया कि भगवान की माया नारद जी को मोहित कर सकती है जो कि महान ज्ञानी है तो फिर तुच्छ मनुष्य उनके आगे कहां लगते हैं आचार्य जी ने कहा रावण महान पापी दुष्ट आत्मा हुआ उसने संतो को ब्राह्मणों को देश से निकालने के आदेश दिए और उन पर अत्याचार किया अपने भक्तों की करुण पुकार सुनकर के भगवान ने अयोध्या में अवतार लिया और पापियों का संघार किया इस कथा का आयोजन समस्त ग्रामवासी आनंदपुर वाले करवा रहे एवं इस कार्यक्रम में श्री राम जानकी मंदिर प्रतिष्ठा एवं पंच कुंडी यज्ञ कराया जा रहा है यह कार्यक्रम 26 जनवरी तक होगा।
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