तालाब के तीनों तरफ किया गया था अतिक्रमण
ये अतिक्रमण देदला गांव में बने तालाब से तीनों तरफ था। फॉरेस्ट की जमीन पर कब्जा कर खेत बना लिए गए थे। वहीं जिन लोगों की निजी जमीन हैं, उनकी जमीनों को मिलने वाले पानी को भी इन अतिक्रमणकारियों ने अपने खेतों में मोड़ लिया था। इस कारण ग्रामीणों में झगड़े की स्थिति बन रही थी।
रेंजर सौरभ द्विवेदी ने बताया कि अतिक्रमण के खिलाफ लगातार 12वीं कार्रवाई है। इसके पहले पागड़ीघटा से 200 बीघा, बटावदा में भी 150 बीघा, चारण पुरा में 80 बीघा, सागोडीया में 90 बीघा वन भूमि, चांचौड़ा में 15 बीघा चौराहे की वन भूमि को मुक्त करवाया जा
चुका है। आज हुई कार्रवाई के दौरान SDM चाचौड़ा रवि मालवीय, एसडीओपी चाचौड़ा दिव्या राजावत, डिप्टी कलेक्टर मंजूषा खत्री के नेतृत्व में रेंजर बीनागंज सौरभ द्विवेदी, तहसीलदार चांचौड़ा, थाना प्रभारी चांचौड़ा, वन अमला, पुलिस और प्रशासन मौजूद रहा।
कमलपुर में वन अमले पर हुआ था हमला फरवरी 2016 में जब वन विभाग का अमला वनभूमि पर अतिक्रमण की रोकथाम के लिए अतिक्रमण रोधक खंती खुदवा रहा था, तब कमलपुर गांव के मीना और कुलंबह गांव के गुर्जर समाज के लोग लाठी, डंडा, फरसा लेकर झगड़ा करने आ गए थे। इस कारण कार्रवाई नहीं हो सकी थी।










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