मामले के अनुसार परिवादी रघुराज सिंह से आरोपी ने ₹600000 अपनी आवश्यकता की पूर्ति हेतु उधार प्राप्त किए थे, इस उधार राशि को अदा किए जाने हेतु आरोपी ने अपने बैक खाते का 600000 रुपए का चैक परिवादी रघुराज सिंह को दिया था, जब आरोपी द्वारा उधार धन की अदायगी हेतु दिए गए चैक को परिवादी रघुराज सिंह ने अपने खाते के बैक में भुगतान के प्रस्तुत किया तो वह चैक आरोपी के बैक खाते के बंद होने के कारण डिसऑनर हो गया, परिवादी ने अपने अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव के माध्यम से चैक राशि का भुगतान किए जाने हेतु आरोपी के निवास के पते पर सूचना पत्र भी भेजा, किन्तु आरोपी द्वारा परिवादी से प्राप्त उधार राशि 600000 रूपये की अदायगी परिवादी को नही की गई, माननीय न्यायालय द्वारा दोनों पक्षों की सुनवाई किए जाने के उपरांत परिवादी रघुराज सिंह का परिवाद प्रमाणित मानते हुए आरोपी अजय को एक वर्ष के कारावास सहित कुल सात लाख तेईस हजार रूपए के जुर्माने से दंडित किये जाने का निर्णय पारित किया!










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