#धमाका_रिमझिम_न्यूज: जमकर बरसे "मेघ", लगा ऐसे जैसे झील झरनों ने गाया "मल्हार राग", भदैया कुंड और पवा का झरना बहा, कूनो उफनी तो पुराना पुल कर गई पार
शिवपुरी। मल्हार का अर्थ भारतीय शास्त्रीय संगीत में एक राग है जो वर्षा ऋतु से जुड़ा है। इसे "मल्हार राग" भी कहा जाता है। यह एक लोकप्रिय राग है और माना जाता है कि इसे गाने से बारिश होती है, तो दोस्तों बीते दो दिनों की तरह सोमवार का दिन गुना, अशोकनगर, कोलारस, बदरवास और शिवपुरी ही नहीं बल्कि कई इलाकों में जोरदार बारिश के बीच गुजरा। नतीजा ये हुआ कि पर्यटन नगरी शिवपुरी अपने नैसर्गिक स्वरूप में परिवर्तित दिखाई दी। एक समय सिंधिया राज घराने की ग्रीष्म कालीन राजधानी रही शिवपुरी के कई इलाकों में झील, झरने बह निकले।शहर के प्राचीन भदैया कुंड का झरना बहने लगा तो वहीं पोहरी इलाके का पवा जल प्रपात भी अपने विहंगम रूप में आ गया। इधर शिवपुरी श्योपुरमार्ग पर स्थित कूनो नदी पर पुराना पुल डूब गया। लोग नए पुल पर जाकर सेल्फी लेते रहे हालांकि ये खतरनाक हो सकता है। इसके अलावा कोलारस इलाके में एक पुलिया बह जाने की खबर है जिससे कई ग्रामों का रास्ता बंद हो गया है।
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