जिले में सहरिया जनजाति के लिए आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत 3 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ
शिवपुरी, 20 अगस्त 2025। जिले में आदि कर्मयोगी अभियान : रेस्पॉन्सिव गवर्नेस प्रोग्राम के प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने हेतु आज बुधवार को नक्षत्र गार्डन शिवपुरी में तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ कलेक्टर रवींद्र कुमार चौधरी के मुख्य आतिथ्य में हुआ।
कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हिमांशु जैन, जनजातीय कार्य विभाग के जिला संयोजक राजकुमार सिंह, एनआरएलएम परियोजना अधिकारी अरविंद भार्गव, महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी धीरेंद्र जादौन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
इस आवासीय कार्यशाला में जिले के आठ विकासखण्डों से चयनित 7 ग्रामीण विकास, वन, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, शिक्षा एवं जनजातीय कार्य विभागों के 56 खण्डस्तरीय मास्टर ट्रेनर्स ने भाग लिया। कार्यशाला में राज्य स्तर पर प्रशिक्षित जिला मास्टर ट्रेनर्स द्वारा अभियान के उद्देश्य, स्वरूप एवं क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी गई।
कलेक्टर रवींद्र कुमार चौधरी ने मास्टर ट्रेनर्स को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशिक्षण को गंभीरता से ग्रहण करें और इसे व्यवहार में उतारते हुए अभियान को सफल बनाएं। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं से सभी अवगत हैं, अब इन्हें धरातल पर उतारना ही वास्तविक उद्देश्य है ताकि प्रत्येक जनजातीय परिवार तक शासन की योजनाओं का समुचित लाभ पहुंच सके।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी हिमांशु जैन ने कहा कि यह कार्यशाला जिला स्तर पर आयोजित पहला कार्यक्रम है, जिसके माध्यम से मास्टर ट्रेनर्स अभियान की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित कर सकेंगे।
आइए समझिए क्या है उद्देश्य
जिला मास्टर ट्रेनर्स द्वारा बताया गया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य मास्टर ट्रेनर्स को सक्षम बनाना है, ताकि वे विकासखण्ड स्तर पर अभियान की गतिविधियों का संचालन कर सकें।
जिले भर में चलेगा अभियान
अभियान के अंतर्गत जिले के 8 विकासखण्डों के 746 जनजातीय ग्रामों का चयन किया गया है। प्रत्येक ग्राम के लिए अलग-अलग प्लान तैयार कर शासन की योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुँचाना सुनिश्चित किया जाएगा।
आखिर कोई नहीं हुए अब तक सक्षम
ये कवायद के पीछे कलेक्टर रवीन्द्र कुमार चौधरी कहते हैं कि सरकार ने एक जनजाति के व्यक्ति पर एक से पांच लाख तक खर्च किए हैं लेकिन तब भी उनका उत्थान न होने की जानकारी सामने आती है। जनसुनवाई में भी आवेदक आते हैं इसीलिए हमने तय किया है कि सभी को तय शुदा लाभ सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए अभी तक अलग अलग विभाग पृथक कार्य करते हैं लेकिन अब हमने सभी को जोड़ दिया है। जिसमें
ग्रामीण विकास, वन, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, शिक्षा एवं जनजातीय कार्य विभाग के कर्मचारी प्रशिक्षण के बाद गांव गांव जाएंगे। इनमें भी हमने सेवा भावी कर्मचारियों को प्राथमिकता दी है साथ ही हम एनजीओ को भी अभियान से जोड़ रहे हैं। ये सभी जाकर देखेंगे कि आवास, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, विद्युत, सड़क सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ जनजातीय परिवारों तक पहुँचा या नहीं, नहीं तो इन्हें पहुंचना होगा यही इनका लक्ष्य रखा गया है।
एक खिड़की पर होगी समस्या निराकृत
इसके लिए ग्राम स्तर पर "आदि सेवा केंद्र" स्थापित किए जाएंगे, जो एक ही खिड़की के माध्यम से सभी सेवाएं उपलब्ध कराएंगे। ये केंद्र न केवल मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे बल्कि योजनाओं एवं कार्यक्रमों के सतत क्रियान्वयन में भी प्रमुख भूमिका निभाएंगे।
रोजगार, व्यवसाय भी लक्ष्य में शामिल
जनजाति वर्ग के ग्रामीण अधिकतर घने जंगलों में रहते हैं उनके अनुसार उनकी जिस कार्य में रुचि होगी उससे संबंधित कार्य में उनको जोड़ा जाएगा। खेती, जड़ीबूटी या जो भी व्यवसाय से उनके जीवन में आर्थिक सम्पन्नता आ सके उसके अनुसार डाटा संग्रहित कर उन्हें व्यवसाय देने और रोजगार के साधन उपलब्ध कराए जाएंगे। आवश्यकता के अनुसार उनके द्वारा तैयार खेती से फसल या जड़ीबूटियां आदि सीधे बाजार में बड़े व्यवसायियों की तर्ज पर विक्रय के इंतजाम करने का भी लक्ष्य रखा गया है। ये जानकारी प्रेस वार्ता में दी गई।












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