शिवपुरी। घोटालों की नगर पालिका शिवपुरी में अब संगठित ठेकेदारों ने नलकूप संधारण के नाम पर 4 करोड़ हड़प डाले हैं, हद ये है कि पूर्व ठेकेदार जितेंद्र समाधियां ने इसी काम के एवज में 99 लाख का ठेका लिया उसे लगातार परेशान करते हुए लाखों की चपत लगवा डाली जिसके चलते उसे ठेका छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा बाद में सालों से दीमक की तरह नपा को चाट रहे कुछ संगठित ठेकदारों ने मिलकर उसी कार्य के एवज में 4 करोड़ का भुगतान ले डाला। इधर एडवोकेट जितेंद्र समाधिया ने हार नहीं मानी और संपूर्ण दस्तावेजों के साथ पीड़ित ने जब ईओडब्ल्यू में शिकायत की, तब संयुक्त संचालक ने इस पूरे मामले की जांच करवाई तो अब नपाध्यक्ष, सीएमओ सहित पीआईसी के दोषी पाए जाने की जानकारी सामने आई है। जब हमने ठेकेदार शिकायतकर्ता जितेंद्र समाधियां से बातचीत की तो उनका कहना था कि आप लोग ध्यान से समझिए आखिर क्यों कुछ कलमकार नपा में बिस्तर डाले रहते हैं यानि कि उन्हें ऐसा क्या लालच है कि सिर्फ नपा से ही चिपके हुए हैं और सालों से अलग अलग नाम पर सरकार की जनता की सुविधाओं के लिए भेजी जाने वाली राशि को हड़प रहे हैं। कभी हरियाली के नाम पर तो कभी नलकूप खनन के नाम पर इनका खेला जारी है। अधिकारियों पर दवाब बनाकर ये गिरोह राजस्व को ठिकाने लगाने में लगा है।
कई ठेकदारों को किया चलता लेकिन समाधियां हारकर भी नहीं हटे पीछे
ठेकेदार जितेंद्र समाधियां को इस गिरोह ने उसी तरह निपटाया जैसे पहले कई ठेकदारों को निपटा चुके है। जब भी टेंडर होता है और गिरोह के हाथ ठेका नहीं लगता तो ये नए ठेकेदार के रस्ते में संकट खड़ा कर देते हैं। उसे काम नहीं करने देते परेशान करते है जिससे घाटा खाकर ठेकेदार काम छोड़ देता है ये उसे ब्लेक लिस्ट तक करवा देते है ठीक यही हाल जितेंद्र समाधियां के साथ हुआ। जब उन्होंने नगरपालिका के 493 नलकूपों के रखरखाव सहित संधारण का ठेका मेसर्स समाधियां एंड कंपनी को 3 मई 2023 को नपा ने देते हुए कार्यादेश जारी किया। समाधियां को शहर के सभी 39 वार्डों का यह काम 99 लाख रुपए से अधिक की राशि में दिया गया था। समाधिया को एक ट्यूबबेल संधारण की राशि 1388 रुपए तय की गई थी। इस राशि में ही उसे स्टार्टर, केबल एवं मोटर भी बदलना थी। समाधिया के सामने कुछ ऐसे हालात बनाए की वह समय पर काम नहीं कर पाया और फिर नियमों के विपरीत ठेका निरस्त कर दिया गया।
फिर आई संगठित गिरोह की बारी
इधर नगरपालिका के संगठित गिरोह ने शहर को 4 जॉन में बांटकर नलकूपों का संधारण 4 फर्मों के नाम ले लिया। जिसमें छोटी मोटर रिपेयरिंग का 3440 रुपए, मीडियम मोटर का 4440 रुपए तथा बड़ी मोटर का 5940 रुपए भुगतना तय किया गया। आपको जानकार आश्चर्य होगा कि इस ठेके में मोटर का भुगतान अलग से दिए जाने पा प्रावधान किया गया।
इन फर्मों को हुआ 4 करोड़ से अधिक भुगतान
जांच के बिंदु में शामिल पीआईसी से गलत ठहराव प्रस्ताव पास करके 4 फर्मों को नलकूप संधारण का काम दिया गया। जिनसे आईएमजी इलेक्ट्रिक कंस्टक्शन एवं जेएस एस इन्फ्रा को दो ठेके तथा एक बिना निविदा के काम दे दिया। इस काम में नगरपालिका ने 4 करोड़ 83 लाख 65 हजार 705 रुपए का भुगतान किया गया। यानि ठेकेदार को 99 लाख में जो ठेका दिया गया, उसके बदले में नपा के संगठित गिरोह को 4 गुना से अधिक का भुगतान कर दिया गया।
तोड़े नियम, की मनमानी
नगरपालिका ने नियमों को ताक पर रखकर ठेका दिया जो संयुक्त संचालक की जांच में सामने आया है। जिसमें नगरपालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा, तत्कालीन सीएमओ के अलावा पीआईसी कमेटी जांच में दोषी पाए गए हैं। ईओडब्ल्यू में शिकायत करने वाले ठेकेदार एडवोकेट जितेन्द्र समाधियां ने भी उक्त मामले में कुछ दिन पूर्व बयान दर्ज करवाए हैं। कुलमिलाकर भारी भ्रष्टाचार की गढ़ नगर पालिका परिषद शिवपुरी में अब नलकूप के नाम पर करोड़ों की गड़बड़ी की गई है।
















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