ज्ञात रहे कि शिवपुरी शहर के विभिन्न वार्डों की कालोनियों में बरसात के दौरान कच्चे रास्तों पा गड्ढों को भरने के लिए नगरपालिका शिवपुरी ने गिट्टी-जीरा का टेंडर किया था। आरोप है कि यह काम शिवम् कंस्ट्रक्शन के मालिक अर्पित शर्मा ने लिया और बिना सड़कों के गड्ढे भरे नपा से पूरा भुगतान निकाल लिया। इसका खुलासा तब हुआ, जब पार्षदों ने इस संबंध में नगरपालिका में शिकायत दर्ज कराई। फिर जांच हुई तो सने आया की भुगतान नपा के जिम्मेदारों पर दवाब बनाकर ले लिया गया।
हाईकोर्ट जज राजेश कुमार गुप्ता ने भी अपने निर्णय में सहअभियुक्त बने नपा के सहायक यंत्री और उपयंत्री जितेंद्र परिहार और सतीश निगम को मिली जमानत को यह कहते हुए नजरअंदाज कर दिया कि उक्त दोनों ने तो सीएमओ इशांक धाकड़ के निर्देश पर एमबी में काम चढ़ाया, तथा नपाध्यक्ष गायत्री शर्मा और ईई मनोहर बागड़ी की टीप के बाद भुगतान किया गया है। हाईकोर्ट जज ने भी अपने निर्णय में यह इशारा किया है कि इस मामले में सीएमओ एवं नपाध्यक्ष सहित ईई को पार्टी बनाया जाना चाहिए।
ये लिखा आदेश में
परिस्थितियों के अनुसार, उसे इस स्तर पर ज़मानत नहीं दी जानी चाहिए।
6. मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के साथ-साथ उसके आपराधिक इतिहास से संबंधित तथ्य और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि अग्रिम ज़मानत आवेदन खारिज होने के बाद, आवेदक के विद्वान वकील द्वारा परिस्थितियों में कोई बदलाव नहीं बताया जा सका, इसलिए 15.09.2025 को लिए गए विचार को बदला जा सकता है क्योंकि उसे गुण-दोष के आधार पर बार-बार खारिज किया गया है।
7. परिणामस्वरूप, आवेदक द्वारा दायर BNSS की धारा 483 के तहत यह ज़मानत आवेदन एतद्वारा खारिज किया जाता है।
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