Sanatan Ekta Padyatra : जैसा कि सभी जानते हैं कि देश में विभिन्न वर्ग के लोग जाति के नाम पर आपस में उलझ रहे हैं। जिससे सामाजिक ढांचा बिगड़ रहा है। अब तक सदियों से मिल जुलकर साथ रहते आए लोग नेताओं की बातों में आकर खुद उलझ रहे हैं इस बीच उन्हें जाग्रत करने की आवश्यकता है जिससे वे पहले की तरह एक रह सकें। इसी मूल विचारधारा से प्रेरित होकर बागेश्वर धाम के प्रमुख संत धीरेंद्र शास्त्री की 'हिंदू एकता पदयात्रा' पर निकले हैं। आज हरियाणा के पलवल जिले के गांव खटेला सराय में अचानक तबीयत बिगड़ने से धीरेंद्र शास्त्री सड़क पर ही लेट गए। 100 डिग्री से ज्यादा बुखार होने पर डॉक्टर ने उन्हें दो दिन के आराम की सलाह दी। लेकिन, दवा खाकर थोड़ी देर आराम करने के बाद उन्होंने फिर से यात्रा शुरू कर दी। यह जज्बा देखकर उनके साथ चल रहे यात्रियों में जोश का संचार हो गया।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, "यह यात्रा हिंदू एकता के लिए है, बीमारी से रुकना मुमकिन नहीं। हिंदू एक होंगे तो धमाके नहीं होंगे"
इससे पहले यात्रा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने आतंकवाद और एकता पर जोरदार बयान दिया था। उन्होंने कहा, 'हिंदू एक होंगे तो धमाके नहीं होंगे। आतंकवाद की घटनाओं में एक ही कौम के लोगों का नाम क्यों आता है? यह सवाल हर हिंदू के मन में उठना चाहिए। अभी आठ लोग मारे गए हैं, अगर हम एक नहीं हुए तो 80 हजार मर जाएंगे।' वे बोले, 'हिंदू एक होने में जितनी देर करेंगे, उतने हिंदू घटते जाएंगे। कई शहरों को दहलाने की साजिश रची गई थी। दंगा भड़काने वाले घर से बाहर न निकलें, इतनी एकता होनी चाहिए। विदेशी ताकतें हमें डराने के लिए ये सब कर रही हैं। हम सब भारतीयों को कदम मिलाकर जवाब देना होगा। दिल्ली ब्लास्ट के बाद हमने पदयात्रा में गीत-संगीत बंद कर दिया है।'
यात्रा में जोश और उत्साह का कोई ठिकाना नहीं
यात्रा में जोश और उत्साह का कोई ठिकाना नहीं है, लोगों का जोश सातवें आसमान पर है
करीब 20 से 25 हजार भक्त पैदल चल रहे हैं। धीरेंद्र शास्त्री को देखने के लिए युवा क्रेन पर चढ़ गए, तो कोई पेड़ पर नजर आया। जगह-जगह छतों से फूल बरसाए गए, तो क्रेन से पुष्पवर्षा हुई। शास्त्री ने खुद जमीन पर बैठकर भोजन किया और एक बुजुर्ग भक्त के साथ ढोल बजाकर माहौल गर्मा दिया। यह नजारा देखकर हर कोई उत्साहित हो गया।
आज पलवल के तुमसरा गांव से शुरू हुई यात्रा शाम तक 16 किलोमीटर का सफर तय कर चुकी है। चार दिन बाद, यानी 16 नवंबर को यह वृंदावन पहुंचेगी। यात्रा का मकसद हिंदू समाज को एकजुट करना है, और धीरेंद्र शास्त्री का यह जज्बा इसे और मजबूत बना रहा है। बुखार के बावजूद रुके बिना आगे बढ़ना उनकी निष्ठा, हिम्मत और जोश का प्रतीक है।















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