सवाई माधोपुर। रणथंभौर में टेरिटरी (इलाके) को लेकर बाघों का भिड़ना आम बात है, खासकर बढ़ती आबादी के कारण, जहाँ हाल ही में मां-बेटी (रिद्धि और मीरा), भाई (T-120 और T-121), और अन्य बाघों के बीच हिंसक झड़पें हुईं, जो पर्यटकों द्वारा कैमरे में कैद हुईं और सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिससे साफ हो गया कि जंगल में वर्चस्व की लड़ाई जारी है और पर्यटकों को रोमांचक नज़ारे देखने को मिल रहे हैं, हालांकि यह संघर्ष खतरनाक भी हो सकता है. खैर ताजा मामला सोमवार का है जब सवाईमाधोपुर के रणथम्भौर में पर्यटकों की जिप्सी के पास आकर दो टाइगर खड़े हो गए। टाइगर टी-101 और टी-105 टाइग्रेस की दहाड़ सुनकर सैलानी सहम गए। कुछ देर बाद पर्यटकों ने कैमरे और मोबाइल फोन में इस रोमांचक पल को कैद किया। मामला रणथंभौर के जोन नंबर 2 में सोमवार शाम की पारी का है। अचानक टाइगर के सफारी ट्रैक पर आ जाने से और जिप्सियों के बीच से गुजरने से सैलानियों की सांसें अटक गईं।
रणथंभौर के जोन नंबर 2 में सोमवार शाम की पारी में सैलानी सफारी पर गए थे, पर्यटकों को टाइगर टी-101 और टी-105 टाइग्रेस के दीदार हुए। टाइगर और टाइग्रेस आक्रामक मूड में थे। गुर्राते हुए पर्यटकों की गाड़ियों के नजदीक आ गए। यह देखकर जिप्सी में बैठे सैलानी सहम गए।
इसी दौरान टाइगर टी-101 दहाड़ते हुए गाड़ियों के बीच से निकल कर दूसरी तरफ जा पहुंचा। इसके बाद टाइग्रेस भी तेजी से उसके पीछे गई और दोनों कुछ सेकेंड के लिए एक-दूसरे के आमने - सामने हो गए।
हालांकि करीब 3 मिनट बाद ही दोनों जंगल में गायब हो गए। पर्यटकों ने इस पूरे मूवमेंट को अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया।
डीएफओ बोले- हो सकती थी टेरिटोरियल फाइट
रणथंभौर के डीएफओ मानस सिंह ने बताया-यह वाकया रणथंभौर के जोन नम्बर 2 का है। इसमें टाइगर टी 101 और टी 105 (टाइग्रेस) आपसी संघर्ष की मुद्रा में आ गए थे, लेकिन उनके बीच आपसी टकराव टल गया।
मानस के अनुसार- जब भी दो बाघ किसी एक इलाके में आ जाते है तो उनके बीच टैरिटरी को लेकर अक्सर आपसी टकराव हो जाता है। हालांकि गनीमत रही कि यहां दोनों के बीच आपसी टकराव होने से बच गया।
आइए और जान लीजिए कब कब हुई फाइट
* मां-बेटी की लड़ाई: बाघिन रिद्धि (T-124) और उसकी बेटी मीरा के बीच ज़ोन-3 में वर्चस्व को लेकर संघर्ष हुआ, जिसे पर्यटकों ने कैद किया.
* भाईयों के बीच संघर्ष: T-120 और T-121 (T-63 के शावक) के बीच ज़ोन-4 में टेरिटरी को लेकर लड़ाई हुई, जिसमें T-121 घायल हो गया.
* बढ़ती आबादी: रणथंभौर में बाघों की संख्या बढ़ने से उनके लिए पर्याप्त जगह नहीं है, जिससे उन्हें अपना क्षेत्र बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है, अक्सर अपनी मां या भाई से भी.मादा के लिए लड़ाई: नर बाघों के बीच मादा बाघिनों (जैसे T-39 नूर) के लिए भी लड़ाई होती है.
* पर्यटकों के अनुभव: इन लड़ाइयों को देखकर पर्यटक रोमांचित होते हैं, लेकिन वन विभाग इनकी निगरानी करता है और ज़रूरत पड़ने पर बाघों का इलाज भी करवाता है
* क्यों होती हैं ये लड़ाइयाँ?
प्राकृतिक व्यवहार: जब शावक बड़े होते हैं, तो उन्हें अपनी मां से अलग होकर नया क्षेत्र बनाना पड़ता है, जिससे अक्सर टकराव होता है.
* क्षेत्र का अभाव: बढ़ती आबादी के कारण हर बाघ को पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती, जिससे क्षेत्र पर कब्ज़े के लिए संघर्ष बढ़ जाता है. ये घटनाएँ रणथंभौर के जंगल के जंगली और अप्रत्याशित स्वभाव को दर्शाती हैं, जहाँ बाघों के बीच वर्चस्व की जंग जारी रहती है.












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