पहली बार गुलाबी नगरी में आयोजन
आज की सुबह गुलाबी नगरी जयपुर (Jaipur) के लिए स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गई जब भारतीय सेना के 78वें स्थापना दिवस (78th Army Day) के अवसर पर गुरुवार सुबह 10:00 बजे जयपुर के जगतपुरा स्थित महल रोड (Mahal Road) पर एक भव्य और ऐतिहासिक आर्मी डे परेड (Army Day Parade) आयोजित की गई।यह आयोजन न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए ऐतिहासिक है, क्योंकि पहली बार सेना ने अपनी वार्षिक परेड को किसी सैन्य छावनी (Cantonment) के बंद घेरे से निकालकर आम जनता के बीच लाने का निर्णय लिया।
गौरवशाली शुरुआत और सम्मान
मुख्य अतिथि सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी की मौजूदगी में जयपुर के महल रोड पर 78वीं सेना दिवस परेड का आयोजन हुआ। जनरल द्विवेदी ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले 5 जांबाजों को (मरणोपरांत) सेना मेडल वीरता पुरस्कार प्रदान किए:-
सूबेदार मेजर पवन कुमार, हवलदार सुनील कुमार, लांस नायक दिनेश कुमार, लांस नायक सुभाष कुमार, लांस नायक प्रदीप कुमार।
पुरस्कार समारोह के बाद परेड कमांडर के साथ परमवीर चक्र और अशोक चक्र जैसे सर्वोच्च पदकों के विजेताओं ने सलामी मंच का अभिवादन किया।
आसमान से फूलों की बारिश
सेना के तीन चेतक हेलीकॉप्टरों ने आसमान से परेड ग्राउंड पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाकर माहौल को उत्सव जैसा बना दिया। सैन्य शक्ति के साथ-साथ राजस्थान की सांस्कृतिक झलक भी देखने को मिली, जिसमें प्रसिद्ध कालबेलिया नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए जयपुर की जनता सुबह से ही बड़ी संख्या में महल रोड पहुंच गई थी। परेड के दौरान मिजोरम के राज्यपाल जनरल वीके सिंह, राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी और प्रेम चंद बैरवा मौजूद रहे। इसके साथ ही राज्य सरकार के कई मंत्री और सैन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
'मेड इन इंडिया' हथियारों का दम
परेड में भारतीय सेना की उन्नत हथियार प्रणालियों और बख्तरबंद वाहनों का भव्य प्रदर्शन हुआ, जिसमें भारत का मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन, के-9 वज्र और धनुष तोप व दुनिया की सबसे तेज़ ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली प्रमुख थे।
"भैरव बटालियन" जिसे देखते रह गए लोग
आज की परेड में पूरी दुनिया की नजरें 'भैरव बटालियन' पर टिकी थी, जो पहली बार सार्वजनिक रूप से दुनिया के सामने आई। आधुनिक हाइब्रिड युद्ध की बदलती प्रकृति को देखते हुए इस यूनिट का गठन किया गया है। यह पैरा स्पेशल फोर्सेस और नियमित इंफेंट्री के बीच एक 'ब्रिज' का काम करती है। यह बटालियन विशेष रूप से ड्रोन-आधारित युद्ध और मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस के लिए ट्रैंड है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के अनुभवों ने इस बटालियन की नींव रखने में अहम भूमिका निभाई है। कठिन और दुर्गम इलाकों में दुश्मन के ठिकानों पर सटीक और त्वरित हमला करने की क्षमता इसे सबसे अलग बनाती है। परेड की सबसे बड़ी हाइलाइट, भैरव बटालियन ने मार्च-पास्ट किया। आधुनिक हेडगियर और टैक्टिकल ड्रोन कंट्रोलर्स से लैस इन सैनिकों ने दिखा दिया कि भारतीय सेना अब पूरी तरह 'फ्यूचर रेडी' है। यह बटालियन विशेष रूप से हाइब्रिड वॉरफेयर के लिए तैयार की गई है।
'नामिका' का मैदान में प्रवेश
मैकेनाइज्ड कॉलम में अब नामिस (Nag Missile System MK-1) पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित 'टैंक रोधी' मिसाइल प्रणाली है। एक बार मिसाइल छूटने के बाद यह दुश्मन के टैंक का पीछा करके उसे तबाह कर देती है, चाहे टैंक अपनी लोकेशन बदल ही क्यों न ले। नामिस की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह रात और दिन, दोनों समय और किसी भी मौसम में दुश्मन को खोज निकालने में सक्षम है।
रोबोटिक म्यूल्स और भविष्य की सेना
भविष्य के युद्ध को ध्यान में रखते हुए, आज परेड में रोबोटिक डॉग्स और UGVs (Unmanned Ground Vehicles) जैसे सैपर स्काउट और ऐरावत-1000 को भी प्रदर्शित किया जा रहा है। ये मशीनें कठिन परिस्थितियों में सैनिकों के लिए रसद पहुंचाने और रेकी करने का काम करती हैं।
'मशीनी योद्धा' रोबोटिक डॉग की एंट्री
परेड का आकर्षण रोबोटिक डॉग (MULE) भी रहा. यह चार पैरों वाला रोबोट कठिन रास्तों, सीढ़ियों और मलबे के बीच जासूसी और हमला करने में सक्षम है। यह रोबोटिक डॉग बिना जान जोखिम में डाले दुश्मन के बंकरों में घुसकर डेटा भेजने की क्षमता रखता है।परेड में पहली बार मल्टी-यूटिलिटी रोबोटिक डॉग का प्रदर्शन किया गया। यह रोबोटिक डॉग पूरी तरह से ऑटोनॉमस है और इसे पहाड़ी रास्तों, सीढ़ियों और मलबे के बीच भी आसानी से चलते देखा गया। यह रोबोटिक डॉग विशेष रूप से आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए है। यह घने जंगलों या संकरी गलियों में छिपकर बैठे दुश्मनों की लोकेशन रीयल-टाइम में कंट्रोल रूम को भेजता है। इसके ऊपर लगी गन और सेंसर इसे एक घातक हथियार बनाते हैं जो जवानों की जगह पहले खतरे का सामना करता है।
जमीन से आसमान तक भारत की धमक
आज की परेड में सेना अपनी अत्याधुनिक युद्धक प्रणालियों का प्रदर्शन कर रही है
1. मिसाइल और रॉकेट सिस्टम
ब्रह्मोस (BrahMos): 800 किमी की मारक क्षमता वाली दुनिया की सबसे घातक क्रूज मिसाइल।
पिनाका (Pinaka): गाइडेड रॉकेट सिस्टम, जो 120 किमी तक सटीक हमला कर सकता है।
2. एयर डिफेंस और ड्रोन वॉरफेयर
आकाशतीर (Akashteer): स्वदेशी सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, जिसने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान तुर्की और चीनी मूल के ड्रोन्स को मार गिराकर वैश्विक ध्यान खींचा था।
कामिकाजे ड्रोन्स (Kamikaze Drones): मिनी हार्पी, हारोप और स्काई स्ट्राइकर जैसे 'सुसाइड ड्रोन्स' आज मुख्य आकर्षण शामिल है।
MUM-T तकनीक: पहली बार सैनिक और मानवरहित वाहन (UGVs) एक साथ तालमेल बिठाते हुए दिखाई देंगे।
3. बख्तरबंद शक्ति और हेलीकॉप्टर
अपाचे और प्रचंड: सेना के बेड़े में हाल ही में शामिल हुए अपाचे (Apache AH-64E) और स्वदेशी प्रचंड (LCH) हेलीकॉप्टर आसमान में अपनी कलाबाजी दिखा रहे हैं।
T-90 भीष्म टैंक:
भारतीय सेना का मुख्य युद्धक टैंक 'भीष्म' अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहा है। यह टैंक 'हंटर-किलर' क्षमता से लैस है, यानी यह रात के अंधेरे में भी दुश्मन को ढूंढकर उसे सटीक निशाना बना सकता है। इसकी 125mm की स्मूथबोर गन किसी भी किले को ढहाने में सक्षम है।
भीष्म टैंक केवल अपनी तोप के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा के लिए भी मशहूर है. इसमें लगा 'एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर' (ERA) इसे दुश्मन की मिसाइलों से सुरक्षित रखता है।
वेटरन्स को सम्मान, कल की शाम थी खास
परेड से पहले, बुधवार शाम को जयपुर मिलिट्री स्टेशन में थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 'इन्वेस्टिचर सेरेमनी' में वीरता पुरस्कार प्रदान किए।
10 सेना मेडल (वीरता) दिए गए। ऑपरेशन सिंदूर में अदम्य साहस दिखाने वाली 26 यूनिट्स को विशेष साइटेशन (Citations) प्रदान किए गए।
नेपाल सेना की कदमताल
विशेष कूटनीतिक संबंधों की झलक! नेपाल सेना की टुकड़ी ने भारतीय जांबाजों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मार्च किया। यह दृश्य दोनों देशों के बीच के गहरे सैन्य रिश्तों का प्रमाण है।
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