शिवपुरी। पिछले कई दिनों से अनवरत जारी स्वदेशी मेले में गुरुवार रात्रि को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन ओज कवि आशुतोष ओज के संचालन में संपन्न हुआ, जिसमें कई कवियों ने अपनी श्रेष्ठ रचनाओं की प्रस्तुति देकर सभी को मंत्र मुग्ध किया।
सर्वप्रथम सरस्वती माता ,भारत माता,दत्तोपंत जी ठेंगड़ी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर कवि सम्मेलन का शुभारंभ हुआ।पोहरी के गीतकार श्याम बिहारी सरल ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।तत्पश्चात शिवपुरी के कवि अजय जैन अविराम ने तार दे मा तार दे अज्ञानता से मां तार दे की प्रस्तुति दी।करेरा से आए कवि सौरभ सरस ने भारत मा की आरती नित नित गाता हु,उसके चरणों में अपना शीश झुकाता हु,प्रस्तुत की।
प्रदीप अवस्थी ने एक ऐसा ख्याल आए,यू जिंदगी संवर जाए कि प्रस्तुति दी।
मुरैना से आए कवि शिवाजी ने झांसी की रानी रूप धरी खुद्दारी थी,भारत की बेटी वह तो झलकारी थी कि प्रस्तुति दी।
विजयपुर से आए सत्येंद्र सत्यज ने मेरी मां की दुआएं साथ चलती है,उसके आशीषो से ही किस्मत बदलती है सुनाई।
विदिशा से आए कवि ध्रुव बेचैन ने आओ मिलकर ऐसा काम करे,जीवन अपना देश के नाम करे,प्रस्तुत की।
ओज कवि आशुतोष ओज ने भावो के आवेग प्रबल,मचा रहे उर में हलचल,आज देश की परिस्थिति में कुछ कहने को आया हु,शिरा रक्त खोला ने बस में यहां जगाने आया हु प्रस्तुत की।कवयित्री अंजली गुप्ता ने पास बैठो जरा तुम घड़ी दो घड़ी प्रस्तुत की।
शिवपुरी की नवोदित कवयित्री संस्कृति जैन ने भी अपनी प्रस्तुति इस अवसर पर दी।अंत में सभी ने स्वदेशी का संकल्प लिया,आभार गोपाल गौड और संकल्प गजेंद्र शिवहरे ने कराया।











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