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#धमाका_न्यूज: "आखिर कब करें होलिका दहन 2026", चंद्र ग्रहण, धुलेंडी का शंका समाधान श्री मंशापूर्ण ज्योतिष से जान लीजिए, क्लिक लिंक

रविवार, 22 फ़रवरी 2026

/ by Vipin Shukla Mama
शिवपुरी। दोस्तों देश में हर त्यौहार पर किसी न किसी कारण से अब बाधा आने लगी है, नतीजे ने त्योहार किस दिन मनाया जाए इसे लेकर जानकारों की अलग राय सामने आने लगती है और इधर आमजन समझ नहीं पाता कि त्यौहार आखिर किस दिन मनाया जाए। इस बार होली पर भी यही हाल है। इसलिए हम सबसे पहले शिवपुरी जिले के बड़े ज्योतिषाचार्य डॉ विकासदीप शर्मा की राय लेकर हाजिर हैं। उनका गणित और सितारे क्या कहते हैं जरा जान लीजिए। बेशक त्यौहार मनाना आपकी इच्छा पर निर्भर है फिर भी विचारों के आदान प्रदान में कोई परेशानी हमें नजर नहीं आती। तो फिर आइए क्या कहते हैं युवा ज्योतिषाचार्य डॉ शर्मा जानते हैं उन्हीं के अनुसार।
" होलिका दहन इस बार 2 मार्च 2026 को  प्रदोष काल में शाम 6 से 8 बजे किया जाएगा। होलिका दहन और चंद्र ग्रहण दोनों ही एक साथ पढ़ने जा रही है ऐसे में कब होगा होलिका दहन आईए जानते हैं।
मित्रों इस बार होलिका दहन 3 मार्च 2026 को है लेकिन इस दिन  चंद्र ग्रहण भी है, ऐसे में होलिका दहन करना ग्रहण काल में शुभ नहीं माना जाता है।
पंचांग अनुसार ऐसी स्थिति में ग्रहण युक्त होलिका से मुक्त होकर ग्रहण मुक्त होलिका  एक दिन पूर्व ही होलिका दहन मानना ही  शास्त्र सम्मत सही है।
निर्णय सागर पंचांग अनुसार 2 मार्च 2026 प्रदोष काल में पूर्णिमा और संपूर्ण रात्रि में भद्रा की व्याप्ति
निर्णय सागर पंचांग अनुसार 2 मार्च 2026 प्रदोष काल में पूर्णिमा और संपूर्ण रात्रि में भद्रा की व्याप्ति है जो दूसरे दिन पूर्णिमा सूर्यास्त से पूर्व समाप्त हो रही है किंतु पूर्णिमा की व्याप्ति साढ़े तीन पहर से अधिक है और प्रतिपदा तिथि वृद्धि गामी है इसलिए शस्त्र वचन के अनुसार होलिका दहन पूर्णिमा के दिन 3 मार्च 2026 को होना चाहिए था, परंतु 3 मार्च के दिन ग्रस्तोदित  चंद्र ग्रहण है और ग्रहण काल तथा प्रदोष से पूर्व भी पूर्णिमा समाप्त हो रही है ऐसी स्थिति में धर्म सिंधु के अनुसार होलिका दहन  पूर्व  2 मार्च को  ही करना चाहिए।
"इदम चंद्र ग्रहण सतवे ,वेध मध्ये कार्यम , ग्रस्तोदये  परदिने प्रदोषे पूर्णिमा सतवे ग्रहण मध्य एवं कार्यम अन्यथा पूर्व दिन"
अर्थात
धर्म सिंधु अनुसार दूसरे दिन ग्रस्त उदय ग्रहण हो और प्रदोष काल में पूर्णिमा ना हो तो पूर्व दिन ही होलिका दहन पूजा करें 
साढ़े तीन  प्रहर से अधिक पूर्णिमा और प्रतिपदा वृद्धि गामी होते हुए भी धर्म सिंधु में दिए हुए ग्रहण विचार के वचन अनुसार
होलिका दहन 2 मार्च 2026 को प्रदोष काल में  शाम 6 बजे से 8 बजे करना शास्त्र संवत शुभ होगा। इस दिन भद्रा शाम को  5 56 से मध्य रात्रि के बाद रात्रि शेष 3 मार्च  की सुबह 5:29 तक रहेगी 
लेकिन भद्रा के संबंध में शास्त्रों में लिखा गया है कि यदि भद्रा निशीथ काल अर्थात मध्य रात्रि के बाद तक रहे तो फिर भद्रा में ही प्रदोष के समय भद्रा का मुख छोड़कर होलिका का दहन करें। इस वर्ष प्रदोषकाल में भद्रा का मुख नहीं रहेगा 
इससे प्रदोष बेला सूर्यास्त  से 2 घंटे 24 मिनट में होलिका का दहन करना शास्त्रोक्त है। इसलिए मित्रों 2 मार्च को होलिका दहन सूर्यास्त के पश्चात 06: 36 से 8: 36 शाम को  करना शुभ रहेगा ।
इसी समय काल में होलिका दहन करना शास्त्र अनुसार शुभ और मान्य है।
डॉ विकासदीप शर्मा 
ASTROLOGER
श्री मंशापूर्ण ज्योतिष शिवपुरी, 
9993462153
9425137382
सोशल मीडिया पर  कुछ ज्योतिष जानकारों  के अनुसार 3 तारीख को भी चंद्र ग्रहण के उपरांत होलिका दहन का बताया गया है लेकिन यह होलिका दहन ग्रहण उपरांत मान्य तो है लेकिन ग्रहण उपरांत होलिका दहन शुभ नहीं माना जाता इसलिए 2 मार्च को ही होलिका दहन पर्व मनाया जाए जो उत्तम रहेगा।
होली खेलें 4 मार्च को
इस बार होली खेलना जिसे धुलेंडी कहते है 4 मार्च को रहेगा, क्योंकि होलिका दहन के अगले दिन 3 मार्च को ग्रहण होने के कारण ऐसे में होली खेलना शुभ नहीं माना जाएगा। ग्रहण का प्रभाव होने से 2 मार्च को होलिका दहन प्रदोष काल में शाम 6 बजे से शाम 8 बजे और 4 मार्च को धुलेंडी मानी जायेगी।













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