शिवपुरी। प्रधान जिला न्यायाधीश शिवपुरी ने सेठ टोडरमल सुफ़ारिश्मल लोक न्यास समिति शिवपुरी की संपत्ति पर विक्रय कार्यवाही को संभावना पर इंकार कर दिया है। ट्रस्ट की संपत्ति को विक्रय करने का एक आवेदन पूर्व में कलेक्टर शिवपुरी द्वारा निरस्त किया जा चुका था।इसके बाद कलेक्टर के अतिरिक्त निर्देशन पर ट्रस्ट के प्रबंधन पर एसडीएम द्वारा की गई जाँच कार्यवाही में एसडीएम द्वारा नवीन न्यासियों को नियुक्त किया गया था, जिस कार्यवाही को कलेक्टर द्वारा निरस्त कर, प्रधान जिला न्यायालय के समक्ष उक्त जाँच कार्यवाही हेतु स्वयं आवेदन पेश कराया था।कलेक्टर द्वारा निरस्त की गई कार्यवाही के विरुद्ध नवीन न्यासियों ने भी न्यायालय में अपील की थी।शासन के आवेदन पर न्यायालय द्वारा हितबद्ध पक्षकारों को सुनने के लिए विज्ञाति प्रकाशन कराया था, जिस पर न्यास के किरायेदारों, एवं सहकारी बैंक द्वारा संपत्ति के विक्रय पर आपत्ति की गई थी।न्यायालय द्वारा शासन के आवेदन, एवं अपीलार्थी की अपील पर अंतिम आदेश लेख कर यह पाया कि वर्ष 1959 में लेख डीड पर 1967 में गठित सेठ टोडरमल एवं सेठ सुफ़ारिश्मल ओसवाल ने इस लोक न्यास समिति का गठन किया था, जिसकी डीड अनुसार प्रबंधन के लिए तीन अन्य ओसवाल परिवार के सदस्यों को भी ट्रस्टी बनाया गया था। दोनों न्यासियों ने उनकी संपत्ति को धार्मिक कार्य, और धर्मशाला का नाम बरकरार रखने के लिए ट्रस्ट का गठन किया गया था। ट्रस्ट में दान की गई संपत्ति का विक्रय वर्जित होना लेख है। वर्ष 1967 में नियुक्त न्यासियों के निधन के बाद अगले 57 वर्ष तक कोई नई नियुक्ति नहीं हुई। डीड के अनुसार मूल न्यासियों के वारिस ही न्यासी होंगे, पर किसी परिवार का स्थान रिक्त रहता है तो ओसवाल समाज शिवपुरी से न्यासी चुना जाएगा।वर्तमान में केवल सेठ टोडरमल एवं सुफ़ारिश्मल के वारिस उपस्थित है, इसलिए इन दोनों परिवारों के आवेदकों को ट्रस्टी नियुक्त किया गया है। न्यायालय ने आदेश किया कि अपील के संबंध में लोक न्यास अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ट्रस्ट संपत्ति के विक्रय की कार्यवाही इस प्रकरण में किया जाना संभव नहीं है। न्यायालय ने पाया कि ट्रस्ट संचालन एवं प्रबंधन हेतु आय की जरूरत हैं, अगर किसी भी ट्रस्टी को नियुक्त नहीं किया तो ट्रस्ट का संचालन मुमकिन नहीं है, इसलिए न्यासी नियुक्त करना आवश्यक है।दोनों प्रकरणों पर आदेश कर जिला न्यायालय द्वारा अग्रिम कार्यवाही हेतु अभिलेख को पुनः कलेक्टर शिवपुरी के समक्ष भेज दिया है।
किरायेदारों पर जिला न्यायालय की टिप्पणी को उच्च न्यायालय ने हटाया
जिला न्यायालय द्वारा किरायेदारों के आपत्ति आवेदन को अस्वीकार करने के अलावा उनके ट्रस्ट संपत्ति पर लंबे वक्त से बने रहने के व्यवहार पर की गई अतिरिक्त टिपण्णी को किरायेदार द्वारा उच्च न्यायालय के समक्ष आधारहीन होने के कारण चुनौती दी गई, जिसे न्यायालय की एकल पीठ द्वारा स्वीकार किया गया। उच्च न्यायालय द्वारा जिला न्यायालय की टिप्पणी को साक्ष्य के अभाव एवं केवल अनुमान पर आधारित होने के कारण हटा दिया।
कमेंट
प्रकरण में पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता सूर्य कुमार जैन ने बताया कि न्यास डीड लेखन अनुसार चूँकि वर्तमान में 3 न्यासी परिवारों के वारिसों गैरहाजरी है, इसलिए ओसवाल समाज की ओर से न्यासी नियुक्त किया जाना संभव है।अधिवक्ता अंचित जैन ने बताया कि जिला न्यायालय में बताया था कि चूँकि डीड में संपत्ति का विक्रय वर्जित है, इसलिए संपत्ति को जीर्णशीर्ण बताकर जीर्णोधार के लिए विक्रय करने का प्रयास ग़लत है। उच्च न्यायालय ने भी याचिकाकर्ता किरायेदार के नियमित भुगतान को देखने के बाद ही उनके पक्ष में आदेश दिया है।












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