इस कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत में हिंदू ही है और कोई है ही नहीं। किसी खास रस्म या प्रार्थना से जुड़े धर्म को नहीं दिखाता है, न ही यह किसी खास समुदाय का नाम है।
उन्होंने कहा कि RSS किसी के खिलाफ नहीं है और न ही उसे सत्ता या पावर की इच्छा है। संघ राजनीति में सीधे तौर पर शामिल नहीं है, हालांकि संघ के कुछ लोग राजनीति में सक्रिय हैं।
भागवत ने कहा, "बहुत से लोग मानते हैं कि नरेंद्र मोदी RSS की वजह से प्रधानमंत्री हैं। वह एक पॉलिटिकल पार्टी चलाते हैं, लेकिन BJP एक अलग संस्था है। वह RSS की नहीं है, हालांकि उसमें हमारे स्वयंसेवक हैं।"
भागवत ने कहा- भारत का बंटवारा धर्म की वजह से हुआ। हमने कहा कि हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं, क्योंकि हम हिंदू हैं। इस्लाम, ईसाई धर्म अभी भी भारत में मौजूद हैं। झड़पें होती हैं, लेकिन देश एकजुट रहा है। हिंदू भाव को भुला देना भी बंटवारे का कारण बना।
भाषण में बोली गईं प्रमुख बातें
* संघ देश में चल रहे सकारात्मक प्रयासों को समर्थन और मजबूती देने पर फोकस करता है। संघ कोई पैरामिलिट्री फोर्स नहीं है। रूट मार्च और स्वयंसेवकों के लाठी अभ्यास के बावजूद RSS को अखाड़ा या सैन्य संगठन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
* हिंदुत्व अपनाने से किसी को कुछ भी छोड़ना नहीं पड़ता। न आपकी पूजा-पद्धति बदलती है, न भाषा, न रहन-सहन। हिंदुत्व का मतलब है सुरक्षा और साथ-साथ रहने का भरोसा। यह किसी एक धर्म को थोपने की बात नहीं करता।
*लोगों की आस्था, खाने-पीने की आदतें और भाषा अलग हो सकती हैं, लेकिन हम सब एक ही समाज, संस्कृति और देश का हिस्सा हैं। इसी सोच को हिंदुत्व कहा जाता है, आप इसे भारतीयता कह सकते हैं। इसलिए हिंदू-मुस्लिम एकता कहावत सही नहीं है, क्योंकि हम पहले से ही एक हैं।
*1925 में RSS बनने से पहले अंग्रेजों ने इंडियन नेशनल कांग्रेस (INC) को अपने सेफ्टी वाल्व के रूप में (सुरक्षा) बनाया था। लेकिन बाद में भारतीयों ने उसी कांग्रेस को आजादी की लड़ाई का मजबूत हथियार बना दिया।
*देश में अपना उत्पादन (स्वदेशी) मजबूत होना चाहिए, लेकिन दुनिया से जुड़ाव भी जरूरी है। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि यह जुड़ाव टैक्स या टैरिफ लगाकर जबरदस्ती नहीं होना चाहिए।
*परिवारों में बातचीत जरूरी है ताकि यह पक्का हो सके कि नई पीढ़ी ड्रग्स न ले या सुसाइड न करे। नागरिकों को सोचना चाहिए कि वे देश की सेवा के लिए कितना समय दे सकते हैं। सही और शांति से साथ रहने की ताकत को एक्टिवेट करने की जरूरत है, हमें एक-दूसरे का साथ देना होगा।












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