शिवपुरी। माधव टाइगर रिजर्व प्रबंधन की एक और संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण कमी सामने आई है जिसके चलते पार्क घूमने आने वाले पर्यटकों और स्टाफ के बीच झगड़े की नौबत आ रही है। ये गम्भीर मामला माधव टाइगर रिजर्व में प्रवेश की नई दरों से जुड़ा हुआ है जो अभी तक पुरानी उल्लेखित दरों वाले बोर्डों और नहीं लिखी जा सकी हैं। यानी कि प्रबंधन ने जो बोर्ड लगवाए हैं उन पर आज भी माधव राष्ट्रीय उद्यान के समय की पुरानी दर लिखी हैं जबकि नई दर बढ़ा दिए जाने के चलते जब पर्यटक गेट पर आते हैं तो बोर्ड की राशि पढ़कर स्टाफ से उलझने लग जाते हैं। अब वाहन प्रवेश शुल्क: 1320 लगने लगा है और साथ में गाइड चार्ज: 800 लिया जाता है।
बात छोटी लेकिन हर दिन झगड़ा
रिजर्व प्रबंधन को ये बात भले ही छोटी लगे लेकिन इसके फेर में हर दिन कोई न कोई बहस करता है।
ऑन लाइन साइड पर भी नहीं बदलीं पुरानी रेट्स
राष्ट्रीय उद्यान के समय ऑन लाइन साइड पर लिखी प्रवेश शुल्क और अन्य चेतावनी को भी नहीं बदला गया है, वह आज भी पुरानी लिखी हुई हैं जबकि एआई के युग में हर कोई ऑनलाइन ही जिंदगी जी रहा है।
केंद्रीय मंत्री द ग्रेट ज्योतिरादित्य सिंधिया की मंशा पर भारी माधव टाइगर रिजर्व के अधिकारी, खुद ने दी दो जीप लेकिन ऑनलाइन पढ़िए क्या लिखा है
माधव टाइगर रिजर्व के अधिकारी केंद्रीय मंत्री द ग्रेट ज्योतिरादित्य सिंधिया की शिवपुरी को पर्यटन हब बनाने की मंशा पर भारी जान पड़ रहे हैं। तभी तो लापरवाही से बाज नहीं आ रहे। देखिए न ऑनलाइन क्या लिखा है कि माधव टाइगर रिजर्व आपको घूमना हो तो खुद अपना वाहन लेकर आना होगा क्योंकि प्रबंधन के पास वाहन नहीं है। ये बात बेहद शर्मनाक है क्योंकि खुद केंद्रीय मंत्री ने अपनी तरफ से दो जीप रिजर्व प्रबंधन को दी हैं। साथ ही टूरिस्ट विलेज और नरवर रिसॉर्ट भी जीप उपलब्ध करवा रहा है।
"सफारी के लिए आपको अपनी कार खुद लानी होगी, क्योंकि पार्क में वाहन उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं।"
You'll need to take your own car for the safari, as the park doesn't provide vehicles
आखिर टाइगर रिजर्व के अधिकारी चाहते क्या हैं?
माधव टाइगर रिजर्व की स्थापना के बाद से समय समय पर पार्क प्रबंधन की कमियां सामने आती रही हैं। कभी रिजर्व इलाके में लाकर छोड़े गए बाघ बाघिन की मौजूदगी को लेकर खबरें सामने आती हैं तो कभी बाघ के ग्राम में पहुंचने से दहशत के नजारे सामने आते रहे हैं। कहने का सार ये है कि माधव टाइगर रिजर्व की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों को शायद पार्क में टाइगर रिजर्व की स्थापना रास नहीं आ रही! तभी माधव टाइगर रिजर्व को विकसित कर शिवपुरी को टूरिस्ट हब बनाने के स्थान पर उन व्यवस्थाओं पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा जिनसे पर्यटकों का रोजाना सामना होना है। जबकि लापरवाही ये साबित करती है कि माधव टाइगर रिजर्व घूमने आने वाले पर्यटक आना बंद कर दें!
महाराज साहब कोई ऐसे अधिकारी लाइए जो कार्बेट, पन्ना, रणथबौर जैसा चमकाए हमारे माधव टाइगर रिजर्व को!
दोस्तों सिंधिया परिवार के सदस्य किसी पर यूंही भरोसा नहीं करते, करते हैं तो फिर शंका नहीं करते लेकिन शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व की फाइल के एक एक पन्ने पर यदि केंद्रीय मंत्री द ग्रेट ज्योतिरादित्य सिंधिया नजर डालें तो दो महिला अधिकारियों को छोड़कर किसी ने माधव टाइगर रिजर्व को ऊंचाई पर ले जाने के लिए काम नहीं किया! उन दोनों महिला अधिकारियों का तबादला हो चुका है लेकिन उनके रहते माधव टाइगर रिजर्व की दीवार का निर्माण हुआ तो दूसरी अधिकारी जिन्हें इंदौर भेजा गया उन्होंने टाइगर आने के बाद बेहतर काम किया था। कुल मिलाकर अब समय आ गया है जब कई सालों से शिवपुरी में डेरा जमाए अधिकारियों को विदाई देकर ऐसे अधिकारियों की नियुक्ति की जाए जो माधव टाइगर रिजर्व को रणथबौर, पन्ना, कार्बेट नेशनल पार्क की तरह सैलानियों से भर सकें जिससे शिवपुरी को पर्यटन उद्योग का दर्जा हासिल हो सके।













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