Mumbai मुंबई। एक अनजान मदद… जिसने एक परिवार की जिंदगी बदल दी। जी हां, हम बात कर रहे हैं दिवंगत अभिनेता फ़ारूक़ शेख़ की जिन्होंने 26/11 मुंबई हमले (2008) में ताज होटल के मेंटेनेंस कर्मचारी राजन कांबले के मारे जाने के बाद, उनके परिवार की बिना किसी पहचान के सालों तक आर्थिक मदद की थी।
2008 के मुंबई हमलों में कई लोगों ने अपने अपनों को खो दिया। उन्हीं में से एक थे ताज होटल में काम करने वाले राजन कांबले, जिन्होंने दूसरों की जान बचाते हुए अपनी जान गंवा दी।
पीछे रह गईं उनकी पत्नी श्रुति और दो छोटे बच्चे…
घर में ना कोई सहारा था, ना भविष्य की कोई उम्मीद।
इसी बीच एक अखबार में इस परिवार की कहानी छपी। यह खबर एक ऐसे इंसान तक पहुंची, जिसने चुपचाप मदद करने का फैसला किया।
वो थे फ़ारूक़ शेख़।
उन्होंने तय किया कि दोनों बेटों (रोहन और अथर्व) की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाएंगे। लेकिन उन्होंने एक शर्त रखी—
"परिवार को कभी ना बताया जाए कि मदद कौन कर रहा है।"
हर साल वो बिना किसी नाम और पहचान के पैसे भेजते रहे।
ना कोई दिखावा, ना कोई प्रसिद्धि… सिर्फ इंसानियत। परिवार उन्हें केवल "शेख़ साहब" के नाम से जानता था।
कई साल बाद जब सच्चाई सामने आई, तब तक फ़ारूक़ शेख़ इस दुनिया में नहीं थे।
श्रुति आज भी कहती हैं—
“काश मैं उन्हें धन्यवाद कह पाती…”
आज उनके बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ रहे हैं।
और ये सब उस इंसान की वजह से हुआ, जिसने बिना नाम के किसी की जिंदगी बदल दी।
दोस्तों सच्चा हीरो वही होता है, जो बिना दिखावे के दूसरों के काम आए।
यह वाकया दिखाता है कि फ़ारूक़ शेख़ न केवल फिल्मों में बल्कि असल जिंदगी में भी एक नेक इंसान थे।













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