गणगौर पूजा क्यों की जाती है? धार्मिक महत्व
शिव-पार्वती का मिलन: 'गण' का अर्थ है भगवान शिव और 'गौर' का अर्थ है माता पार्वती। यह पर्व उनके अटूट प्रेम और पुनर्मिलन का प्रतीक है।
अखंड सौभाग्य: विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं।
योग्य वर की प्राप्ति: कुंवारी कन्याएं मनचाहा और योग्य जीवनसाथी पाने के लिए शिव-गौरी की पूजा करती हैं।
पौराणिक कथा: मान्यता है कि माता पार्वती ने कठोर तपस्या के बाद इसी दिन भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया था।
पूजा की मुख्य परंपराएं
मिट्टी की मूर्तियां: महिलाएं मिट्टी से 'ईसर' (शिव) और 'गौरी' (पार्वती) की मूर्तियां बनाकर उन्हें सजाती हैं।
गुने का भोग: पूजा में मैदे या आटे से बने विशेष आभूषण 'गुने' चढ़ाए जाते हैं, जो सौभाग्य का प्रतीक माने जाते हैं।
लोकगीत और नृत्य: महिलाएं पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा पहनकर लोकगीत गाती हैं और घेवर जैसे मीठे व्यंजनों का आनंद लेती हैं।













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