कमरे से आई गोली की आवाज, परिजनों के उड़े होश
जानकारी के मुताबिक, 42 वर्षीय संदीप सोनी (पिता जगदीश सोनी) गुरुवार दोपहर करीब 12 से 1 बजे के बीच अपने घर पर थे। अचानक उनके कमरे से गोली चलने की जोरदार आवाज आई। परिजन बदहवास होकर कमरे की ओर भागे, लेकिन दरवाजा अंदर से बंद था। अनहोनी की आशंका में जब दरवाजा तोड़ा गया, तो अंदर का नजारा खौफनाक था; संदीप खून से लथपथ पड़े थे।
अस्पताल ले जाते समय तोड़ा दम
परिजन आनन-फानन में उन्हें बदरवास स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहाँ से गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें गुना जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। लेकिन विधि को कुछ और ही मंजूर था; गुना पहुँचते ही डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
सट्टे का दलदल और अवैध हथियार पर उठ रहे सवाल
कस्बे में चर्चा है कि संदीप पिछले काफी समय से आईपीएल सट्टे के जाल में फंसे थे और एक बड़ी राशि हार चुके थे। भारी कर्ज के कारण वे मानसिक तनाव में थे। पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि जिस पिस्टल से गोली मारी गई, वह अवैध थी।
क्या कहती है पुलिस?
पिस्टल लाइसेंसी नहीं है सुसाइड का कारण अभी कुछ स्पष्ट नहीं है। कुछ कर्जे की भी बात सुनने में आई है, अब वो आईपीएल का था या कुछ और का, यह जांच का बिंदु है। पिस्टल मैगजीन वाली देशी है, जिसका लाइसेंस न होकर अवैध थी।
संजय मिश्रा, एसडीओपी कोलारस
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बदरवास थाना प्रभारी एसआई शिखा तिवारी ने बताया कि पुलिस मामले की हर एंगल से तफ्तीश कर रही है। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है और परिजनों के बयान लिए जा रहे हैं। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि मृतक के पास अवैध हथियार कहाँ से आया और क्या वाकई सट्टेबाजी ही इस आत्महत्या की मुख्य वजह थी।
कैसे लगता है सट्टा
'सेशन एक पैसे का है’, ‘मैने चव्वनी खा ली है’, ‘डिब्बे की आवाज कितनी है’, ‘तेरे पास कितने लाइन है’, ‘आज फेवरिट कौन है’, ‘लाइन को लंबी पारी चाहिए’... कहने को ये सिर्फ चंद ऊटपंटाग शब्द लगें, लेकिन इनके बोलने में करोड़ों का लेनदेन हो रहा है। इस खेल की भाषा भी अजीबो गरीब है। सट्टा लगाने वाले व्यक्ति को लाइन कहा जाता है, जो एजेंट यानी पंटर के माध्यम से बुकी (डिब्बे) तक संपर्क करता है।
एजेंट को एडवांस देकर अकाउंट खुलवाना पड़ता है, जिसकी एक लिमिट होती है। सट्टे के भाव को डिब्बे की आवाज बोला जाता है।
आईपीएल क्रिकेट में सट्टेबाज 20 ओवर को लंबी पारी, दस ओवर को सेशन और छह ओवर तक सट्टा लगाने को छोटी पारी खेलना कहते हैं।
मैच की पहली गेंद से लेकर टीम के जीत तक भाव चढ़ते उतरते हैं। एक लाख को एक पैसा, 50 हजार को अठन्नी, 25 हजार को चवन्नी कहा जाता है।
यदि किसी ने दांव लगा दिया और वह कम करना चाहता है तो फोन कर एजेंट को ‘मैंने चवन्नी खा ली’ कहना होता है।
खास बात यह है कि यह पूरा नेटवर्क आधुनिक संचार प्रणाली लेपटॉप, मोबाइल, वाइस रिकार्डर आदि पर ही चल रहा है।
सावधानी इतनी बरती जाती है कि एक बार कोई मोबाइल नंबर यूज हो गया तो उसे दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जाता।
सट्टे की भाषा
बुकी------------------डिब्बा
एजेंट-----------------पंटर
क्लाइंट---------------लाइन
एक लाख------------एक पैसा
सवा लाख------------सवा पैसा
25 हजार------------चव्वनी
50 हजार------------अठन्नी
भाव------------------डिब्बे की आवाज
20 ओवर------------लंबी पारी
10 ओवर-------------सेशन
छह ओवर------------छोटी पारी
शर्त कम करना-------खा जाना
जिंदगी से खिलबाड़ है सट्टा , जान लीजिए
आईपीएल (IPL) सट्टा बेहद खतरनाक और गैरकानूनी है। यह न केवल आर्थिक बर्बादी का कारण बन सकता है, बल्कि कानूनी और मानसिक रूप से भी गंभीर परिणाम दे सकता है।
यहाँ आईपीएल सट्टे के खतरनाक होने के मुख्य कारण दिए गए हैं:
आर्थिक बर्बादी: सट्टे में लोग रातों-रात अमीर बनने के चक्कर में अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई, घर के गहने, और यहाँ तक कि घर भी हार जाते हैं।
कर्ज का जाल और आत्महत्या: सट्टे में हारने के बाद, लोग अक्सर कर्ज लेते हैं और उसे न चुका पाने के कारण मानसिक तनाव, अवसाद और आत्महत्या जैसे भयानक कदम उठा लेते हैं।
कानूनी कार्रवाई: भारत में सट्टेबाजी अवैध है। इसमें शामिल होने पर पुलिस की कार्रवाई, भारी जुर्माना और जेल की सजा हो सकती है।
लत (Addiction): आईपीएल के दौरान सट्टे का नशा युवाओं में तेजी से फैल रहा है, जो इसे एक गंभीर मानसिक लत बना देता है।
फ्रॉड का खतरा: कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और ऐप्स अवैध तरीके से चल रहे हैं, जो पैसों के लेनदेन में धोखाधड़ी कर सकते हैं और आपकी व्यक्तिगत जानकारी चोरी कर सकते हैं।
सावधानी: फैंटेसी स्पोर्ट्स (जैसे ड्रीम 11) में भी वित्तीय जोखिम है, इसलिए इनसे भी सतर्क रहना चाहिए। अपनी मेहनत की कमाई को इस तरह के जोखिम भरे खेल में लगाने से बचना ही समझदारी है।













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