वन विभाग की कार्रवाई:
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई। शेरनी की लोकेशन का पता लगाने और उसे वापस जंगल में खदेड़ने के लिए विभाग ने हाथियों की मदद ली है। हाथियों के साथ वनकर्मी और विशेषज्ञ मौके पर पहुँचकर लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। पगमार्क (पदचिह्नों) के जरिए शेरनी की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
ग्रामीणों के लिए अलर्ट:
वन विभाग ने ऐरावन और आसपास के गांवों में मुनादी करवाकर अलर्ट जारी किया है:
ग्रामीणों को अकेले खेतों या नदी किनारे न जाने की सलाह दी गई है।
रात के समय मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर बांधने को कहा गया है।
किसी भी आपात स्थिति में तुरंत वन विभाग को सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह घटना एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती चुनौती को उजागर करती है। वन विभाग के अधिकारी ग्रामीणों को आश्वस्त कर रहे हैं कि जल्द ही शेरनी को सुरक्षित क्षेत्र में वापस भेज दिया जाएगा ताकि ग्रामीणों और उनके मवेशियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।













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